बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर:
प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती और न ही इसे संसाधनों की कमी रोक सकती है। इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है गोरखपुर जनपद के गोला तहसील अंतर्गत ग्राम नुआंव निवासी विनीत कुमार ने। विनीत ने इंजीनियरिंग की प्रतिष्ठित परीक्षा में जेईई मेन्स सफलता प्राप्त कर न केवल अपने माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा पेश की है। ग्रामीण अंचल से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में परचम लहराना उनकी कड़ी मेहनत और अटूट संकल्प को दर्शाता है।

संघर्ष और उपलब्धियों की कहानी
विनीत कुमार नुआंव गांव के रहने वाले कृष्ण कुमार के पुत्र हैं। उनकी यह जेईई मेन्स सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि उनके पिता परिवार के भरण-पोषण के लिए सात समंदर पार विदेश में रहकर जीविका चलाते हैं। पिता के घर से दूर रहने के बावजूद विनीत ने अपनी पढ़ाई को कभी प्रभावित नहीं होने दिया। उनकी माँ, जो एक कुशल गृहिणी हैं, उन्होंने घर की जिम्मेदारियों को संभालते हुए विनीत को हमेशा पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया।
विनीत की इस उपलब्धि की सूचना जैसे ही बुधवार को गांव पहुंची, पूरे नुआंव में जश्न का माहौल बन गया। मित्रों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने विनीत के आवास पर पहुंचकर उन्हें माला पहनाई और मिठाइयां खिलाकर अपनी खुशी जाहिर की। ग्रामीणों का कहना है कि विनीत की जेईई मेन्स सफलता गांव के अन्य बच्चों को भी उच्च शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।
प्रारंभिक शिक्षा और कड़ा अनुशासन
विनीत की जेईई मेन्स सफलता के पीछे उनके वर्षों के बुनियादी अनुशासन का बड़ा हाथ है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा क्षेत्र के प्रतिष्ठित ‘के आर मेमोरियल एकेडमी’ से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए ‘एल पी एम स्कूल’ का रुख किया। इन दोनों संस्थानों ने विनीत के भीतर विज्ञान और गणित के प्रति गहरी रुचि पैदा की।
विनीत का मानना है कि JEE Main जैसी कठिन परीक्षा को पास करने के लिए केवल मेधावी होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि निरंतरता (Consistency) सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान सोशल मीडिया और अन्य भटकावों से खुद को दूर रखा और अपना पूरा ध्यान सिलेबस को पूरा करने और मॉक टेस्ट देने पर केंद्रित किया।
सफलता का मंत्र: माता-पिता और गुरुओं का आशीर्वाद
अपनी जेईई मेन्स सफलता का श्रेय विनीत ने अपने माता-पिता के त्याग और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया है। विनीत ने भावुक होते हुए कहा, “मेरे पिता विदेश में रहकर हमारे भविष्य के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे हैं। उनकी यही मेहनत मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा रही। मेरे गुरुओं ने जिस तरह मुझे कठिन विषयों को समझने में मदद की, उसके बिना यह मुकाम हासिल करना असंभव था।”
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के इच्छुक छात्रों के लिए विनीत ने संदेश दिया कि यदि आपके लक्ष्य स्पष्ट हैं और आप अनुशासित होकर मेहनत करते हैं, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। Engineering education in India में प्रवेश पाना एक कठिन चुनौती है, लेकिन सही दिशा में किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।
क्षेत्र में खुशी की लहर और उज्ज्वल भविष्य की कामना
विनीत की जेईई मेन्स सफलता पर गोला क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्तियों और शिक्षाविदों ने बधाई दी है। लोगों का मानना है कि विनीत जैसे युवा ही आने वाले समय में देश के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे। इंजीनियरिंग की मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अब विनीत जेईई एडवांस की तैयारी में जुट गए हैं, ताकि वे देश के प्रमुख Indian Institutes of Technology (IITs) में प्रवेश पा सकें।
ग्रामीणों ने विनीत के घर पहुंचकर उनके परिजनों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। नुआंव गांव के प्रधान और अन्य वरिष्ठ नागरिकों ने विनीत को सम्मानित करने की योजना भी बनाई है, ताकि गांव की अन्य प्रतिभाओं को भी प्रोत्साहन मिल सके।
निष्कर्ष: गांव का नाम हुआ रोशन
आज के समय में जब शिक्षा की लागत और प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, तब विनीत कुमार की जेईई मेन्स सफलता एक मिसाल है। यह साबित करती है कि यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, सफलता के द्वार अवश्य खुलते हैं। विनीत ने न केवल नुआंव गांव बल्कि पूरे गोला तहसील को गौरवान्वित किया है। अब क्षेत्र की नजरें विनीत के अगले पड़ाव पर टिकी हैं, जहां वे एक सफल इंजीनियर बनकर देश सेवा का संकल्प पूरा करेंगे।
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