बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोरखपुर जनपद के गोला थाना क्षेत्र से कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर सवाल उठाने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। एक मुस्लिम महिला को अपने पति के खिलाफ तीन तलाक, शारीरिक शोषण और जान से मारने की धमकी के मामले में मुकदमा दर्ज कराने के लिए 11 दिनों तक दर-दर भटकना पड़ा। जब स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई, तो पीड़िता ने न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) और पुलिस के उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई। अधिकारियों के कड़े निर्देश के बाद अब जाकर गोला पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है।

यह मामला न केवल घरेलू हिंसा की क्रूरता को दर्शाता है, बल्कि ‘मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम 2019’ के प्रभावी क्रियान्वयन की चुनौतियों को भी उजागर करता है।
निकाह से लेकर प्रताड़ना तक की दर्दनाक दास्तां
पीड़िता निलोफर खान, जो ग्राम कोहड़ी बुजुर्ग की निवासी है, ने अपनी तहरीर में जो आपबीती सुनाई है वह रूह कंपा देने वाली है। निलोफर का निकाह 17 दिसंबर 2012 को मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार अफजल खान के साथ हुआ था। शादी के शुरुआती वर्षों के बाद उनके तीन बच्चे हुए—पुत्र हसन खान (13), पुत्री अलीना खान (11) और आयजल खान (3)।
पीड़िता का आरोप है कि कुछ समय पहले उसके पति का संबंध किसी अन्य महिला से हो गया। जब उसने इसका विरोध किया, तो उसके जीवन में प्रताड़ना का दौर शुरू हो गया। आरोपी पति ने न केवल उसके साथ मारपीट की, बल्कि उसे जबरन दवा खिलाकर उसका गर्भपात भी करा दिया। इसके अलावा, पीड़िता ने पति पर अप्राकृतिक संबंध बनाने और विरोध करने पर बेरहमी से पीटने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
15 जनवरी की घटना: मौखिक तीन तलाक और बेदखली
मामले ने तूल तब पकड़ा जब 15 जनवरी को आरोपी पति अफजल खान ने सारी हदें पार कर दीं। पीड़िता के अनुसार, अफजल ने उसे मौखिक रूप से तीन बार ‘तलाक’ कहकर वैवाहिक संबंध खत्म करने की घोषणा कर दी। कानूनन अपराध होने के बावजूद, उसे और उसके तीनों मासूम बच्चों को घर से निकालने का प्रयास किया गया। जब निलोफर ने इसका विरोध किया, तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई और घर से बाहर धकेल दिया गया।
पुलिस की सुस्ती और उच्चाधिकारियों का हस्तक्षेप
पीड़िता ने सबसे पहले 24 जनवरी को थाना गोला में लिखित तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। 11 दिनों तक थाने के चक्कर काटने के बाद भी जब एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो पीड़िता ने हार नहीं मानी। उसने जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया और अपनी व्यथा सुनाई।
उच्चाधिकारियों द्वारा मामले को संज्ञान में लेने और तत्काल कार्रवाई के निर्देश देने के बाद गोला पुलिस हरकत में आई। पुलिस की यह प्रारंभिक सुस्ती एक बार फिर उन प्रशासनिक कमियों को दर्शाती है जहाँ पीड़ितों को अपनी न्यायिक सक्रियता का सहारा लेना पड़ता है।
बीएनएस और तीन तलाक अधिनियम के तहत मुकदमा
थाना प्रभारी राकेश रौशन सिंह ने पुष्टि की है कि पीड़िता की तहरीर के आधार पर आरोपी पति अफजल खान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और विशेष अधिनियमों के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
दर्ज की गई धाराएं:
- BNS धारा 85 और 89: क्रूरता और शारीरिक चोट पहुँचाने से संबंधित।
- BNS धारा 115(2) और 351(3): स्वेच्छा से चोट पहुँचाना और गंभीर धमकी देना।
- मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम 2019 (धारा 3 व 4): मौखिक या लिखित तीन तलाक को अवैध और दंडनीय बनाने वाली धाराएं।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साक्ष्य संकलन शुरू कर दिया है और आरोपी की तलाश जारी है।
निष्कर्ष: महिला अधिकारों की सुरक्षा एक चुनौती
गोला की यह घटना याद दिलाती है कि तीन तलाक के खिलाफ सख्त कानून होने के बावजूद, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर महिलाओं को अभी भी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है। न्यायिक सक्रियता और पुलिस के उच्च अधिकारियों का समय पर हस्तक्षेप ही ऐसे मामलों में न्याय की उम्मीद जगाता है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर पीड़िता को उचित न्याय दिला पाती है।













