भटहट, गोरखपुर: 16 फरवरी 2026
ग्लोबल वार्मिंग और तेजी से बदलते जलवायु चक्र के बीच भावी पीढ़ी को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाना समय की सबसे बड़ी मांग है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सोमवार को भटहट क्षेत्र के विद्यालय परिसर में एक भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यालय के प्रबंधक डॉ. मोहम्मद सिद्दीकी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल परिसर की हरियाली को बढ़ाने का काम किया, बल्कि विद्यार्थियों के मन में पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक नई चेतना का संचार भी किया।
अभियान का शुभारंभ और प्रबंधक का संदेश
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ विद्यालय के प्रबंधक डॉ. मोहम्मद सिद्दीकी द्वारा परिसर के मुख्य उद्यान में ‘पाम’ का पौधा लगाकर किया गया। इसके उपरांत उन्होंने अन्य छायादार और फलदार पौधे भी रोपे। इस अवसर पर विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए डॉ. सिद्दीकी ने कहा, “वृक्ष हमारे जीवन का आधार हैं। वे न केवल हमें प्राणवायु (ऑक्सीजन) प्रदान करते हैं, बल्कि धरती के बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने में भी इनकी भूमिका अद्वितीय है।”
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बढ़ते शहरीकरण के कारण पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है, जिसका खामियाजा हम प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाओं के रूप में भुगत रहे हैं। उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन के विशेष अवसरों पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और केवल लगाना ही नहीं, बल्कि उसके विशाल वृक्ष बनने तक उसकी देखभाल भी करनी चाहिए।
छात्रों को दिलाया गया सिंचाई और संरक्षण का संकल्प
विद्यालय के प्रबंध तंत्र ने इस आयोजन को केवल एक दिन के कार्यक्रम तक सीमित न रखकर इसे एक सतत प्रक्रिया बनाने पर जोर दिया। डॉ. सिद्दीकी ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे प्रत्येक पौधे की नियमित सिंचाई और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी लें। उन्होंने कहा कि पौधों के बढ़ने के साथ-साथ विद्यार्थियों में उत्तरदायित्व और ममता के भाव भी विकसित होंगे। विद्यार्थियों ने भी सामूहिक रूप से हाथ उठाकर संकल्प लिया कि वे न केवल विद्यालय परिसर, बल्कि अपने घरों के आसपास भी पौधारोपण करेंगे।

मैनेजिंग डायरेक्टर और स्टाफ की सक्रिय भागीदारी
विद्यालय के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. शाह आलम ने पर्यावरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर के लिए स्वच्छ वातावरण अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि विद्यालय का लक्ष्य छात्रों को न केवल किताबी ज्ञान देना है, बल्कि उन्हें एक जागरूक नागरिक बनाना भी है।
प्रिंसिपल गणेश चन्द पाण्डेय और वाइस प्रिंसिपल कमरून निशा ने भी पौधारोपण किया और विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार के वृक्षों के औषधीय और वैज्ञानिक लाभों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नीम, पीपल और बरगद जैसे वृक्ष हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए ‘फेफड़ों’ का कार्य करते हैं।
परिसर में लगाए गए विविध प्रजाति के पौधे
इस वृक्षारोपण अभियान के तहत विद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए, जिनमें शामिल हैं:
- पाम और डेकोरेटिव प्लांट्स: सौंदर्य बढ़ाने के लिए।
- छायादार वृक्ष: जैसे शीशम और जामुन, ताकि गर्मियों में छात्रों को शीतल छाया मिल सके।
- फलदार पौधे: जैसे अमरूद और आम, जो भविष्य में फल देने के साथ-साथ पक्षियों का बसेरा भी बनेंगे।
पर्यावरण शिक्षा: आधुनिक समय की आवश्यकता
विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि पाठ्यक्रम में पर्यावरण अध्ययन का विषय तो होता ही है, लेकिन ऐसे व्यावहारिक कार्यक्रम छात्रों के सीखने के अनुभव को और गहरा बनाते हैं। जब बच्चा अपने हाथों से मिट्टी खोदकर पौधा लगाता है, तो उसका प्रकृति के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव पैदा होता है। कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने ‘वृक्ष बचाओ-जीवन बचाओ’ के नारे भी लगाए।
उपस्थित गणमान्य और शिक्षकगण
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में विद्यालय के समस्त शिक्षकगण, गैर-शिक्षण कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर परिसर को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने पौधों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए ट्री-गार्ड (Tree Guard) लगाने की भी व्यवस्था सुनिश्चित की।
समापन और धन्यवाद ज्ञापन
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। विद्यालय प्रशासन ने इस पहल की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे सामाजिक और पर्यावरणीय सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों को आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। विद्यालय के इस प्रयास की अभिभावकों और क्षेत्रीय नागरिकों ने भी काफी सराहना की है।
निष्कर्ष
भटहट में आयोजित यह वृक्षारोपण कार्यक्रम समाज के लिए एक प्रेरणा है। यदि हर शैक्षिक संस्थान इसी तरह पर्यावरण के प्रति सजग हो जाए, तो वह दिन दूर नहीं जब हमारी धरती पुनः हरियाली से लबरेज होगी। डॉ. मोहम्मद सिद्दीकी की यह पहल न केवल विद्यालय की शोभा बढ़ाएगी, बल्कि यहाँ शिक्षा ग्रहण करने वाले हजारों बच्चों के जीवन में प्रकृति के प्रति प्रेम का बीज भी बोएगी।
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