उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार जनसमस्याओं के त्वरित और प्रभावी निस्तारण के लिए शनिवार, 17 जनवरी 2026 को गोरखपुर सदर तहसील में तहसील समाधान दिवस का आयोजन किया गया। इस तहसील समाधान दिवस की अध्यक्षता डिप्टी कलेक्टर और तहसीलदार सदर ज्ञान प्रताप सिंह ने की। तहसील सभागार में आयोजित इस दिवस में बड़ी संख्या में फरियादी अपनी समस्याओं को लेकर पहुँचे। तहसील समाधान दिवस का मुख्य उद्देश्य भूमि विवाद, राजस्व संबंधी गड़बड़ियों और स्थानीय प्रशासनिक समस्याओं को एक ही छत के नीचे हल करना था।

इस तहसील समाधान दिवस के दौरान अधिकारियों ने जनता की शिकायतों को न केवल सुना, बल्कि मौके पर मौजूद संबंधित विभागों के अधिकारियों को उनके समयबद्ध निस्तारण के सख्त निर्देश भी दिए। इस दिवस में आए मामलों ने एक बार फिर राजस्व विभाग की जमीनी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
तहसील समाधान दिवस में अवैध रास्ता निर्माण का मामला
इस तहसील समाधान दिवस में सबसे गंभीर शिकायतों में से एक रुस्तमपुर, रामगढ़ताल निवासी प्रभाकर शुक्ला की रही। उन्होंने तहसील समाधान दिवस के मंच से अधिकारियों को बताया कि ग्रामसभा लहसड़ी मुस्तकिल में उनकी निजी आराजी संख्या 601 और 603 पर पूर्व प्रधान द्वारा अवैध प्लाटिंग के लालच में जबरन रास्ता बनाया जा रहा है।
इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए इस दिवस के अध्यक्ष ज्ञान प्रताप सिंह ने तत्काल रामगढ़ताल पुलिस और राजस्व टीम को मौके पर जाकर जांच करने और अवैध निर्माण को रोकने का निर्देश दिया।
फर्जी वरासत और राजस्व कर्मियों की भूमिका पर तहसील समाधान दिवस में सवाल
तहसील समाधान दिवस के दौरान भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप भी लगे। ग्राम अड्डा मोतीराम के नितेश कुमार ने तहसील समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र देकर लेखपाल और राजस्व निरीक्षक पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि उनके पिता की मृत्यु के बाद, उचित साक्ष्य देने के बावजूद उनकी वरासत का आवेदन निरस्त कर दिया गया और किसी अन्य व्यक्ति के नाम फर्जी वरासत कर दी गई।
नितेश कुमार ने तहसील समाधान दिवस में मांग की कि नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारी से इसकी जांच कराई जाए और दोषी कर्मचारियों को दंडित किया जाए। दिवस में तहसीलदार सदर ने स्पष्ट किया कि यदि राजस्व कर्मियों की संलिप्तता पाई गई, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। दिवस का यह मामला दर्शाता है कि डिजिटल प्रक्रिया के बावजूद जमीनी स्तर पर विसंगतियां मौजूद हैं।
भूमि अधिग्रहण और दस्तावेजी त्रुटियों का तहसील समाधान दिवस में समाधान
तहसील समाधान दिवस में केवल विवाद ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक भूलों के मामले भी सामने आए। जंगल डुमरी नंबर दो के एक निवासी ने दिवस में बताया कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान उनकी केवल 12 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण होना था, लेकिन रजिस्ट्री कागजात में भूलवश 58.45 वर्ग मीटर दर्ज हो गया। इस गंभीर दस्तावेजी त्रुटि को सुधारने के लिए उन्होंने तहसील समाधान दिवस में शुद्धिपत्र (Correction Letter) जारी करने की गुहार लगाई।

अधिकारियों ने तहसील समाधान दिवस में इस प्रकरण को तकनीकी टीम को सौंपा और प्रार्थी को आश्वस्त किया कि राजस्व अभिलेखों में जल्द सुधार किया जाएगा। Tehsil Samadhan Diwas की यही खूबी है कि यहाँ आम आदमी को अपनी बात रखने के लिए भटकना नहीं पड़ता।
तहसील समाधान दिवस: त्वरित निस्तारण का प्रभावी मंच
सदर तहसील में आयोजित इस तहसील समाधान दिवस में नायब तहसीलदार भागीरथी सिंह और नीरू सिंह सहित विकास, पुलिस और शिक्षा विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे। दिवस में कुल प्राप्त प्रार्थना पत्रों में से कई का मौके पर ही निस्तारण किया गया, जबकि शेष को जांच के लिए संबंधित टीम को हस्तांतरित कर दिया गया।
तहसीलदार सदर ने Tehsil Samadhan Diwas के अंत में कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता जनता की शिकायतों का ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर निस्तारण करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दिवस में दी गई शिकायतों की रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की गलत जानकारी देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। Tehsil Samadhan Diwas के आयोजन से स्थानीय नागरिकों में प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है।
निष्कर्ष: क्या तहसील समाधान दिवस सफल रहा?
17 जनवरी का यह दिवस कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। जहाँ एक ओर दिवस ने भू-माफियाओं पर नकेल कसने का प्रयास किया, वहीं दूसरी ओर राजस्व विभाग के भीतर छुपे भ्रष्ट तंत्र को भी उजागर किया। दिवस में उठी मांगें अगर समय पर पूरी होती हैं, तो जनता को न्यायालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।
गोरखपुर की जनता अब अगले दिवस की प्रतीक्षा कर रही है, ताकि प्रशासन के कार्य की प्रगति का आकलन किया जा सके। वास्तव में लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर मजबूत करने वाला एक सशक्त साधन बनकर उभरा है। अधिकारियों की संवेदनशीलता ही इस दिवस की असली सफलता का मापदंड बनेगी।
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