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वन्दे मातरम् : गीत के जयघोष से आत्म-चिंतन की ओर एक यात्रा

बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट ‘वन्दे मातरम्‘… यह केवल एक राष्ट्रीय गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा का काव्यात्मक उद्घोष है। बंकिमचन्द्र चटर्जी की यह अमर वाणी धरती को साक्षात् माता के रूप में देखती है। इस गीत के शब्द—सुजलाम्, सुफलाम्, शस्यश्यामलाम्—एक ऐसे भारत का चित्र खींचते हैं जहाँ जल जीवन का पर्याय है, हरियाली आशा … Read more