बसंत का शंखनाद: जड़ता का त्याग कर नवजीवन के श्रृंगार में डूबी वसुंधरा
यह रिपोर्ट बृजनाथ तिवारी की लिखी हुई है शिशिर की ठिठुरन भरी जड़ता जब अपनी अंतिम सांसें ले रही होती है और चराचर जगत में एक मौन प्रतीक्षा पसरी होती है, तभी प्रकृति के आंगन में एक सूक्ष्म और मादक स्पंदन सुनाई देता है। यह आहट है ऋतुराज बसंत (Basant) की। यह केवल एक ऋतु … Read more
