बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोरखपुर के दक्षिणांचल स्थित ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान नेशनल इंटर कॉलेज बड़हलगंज के परिसर में सोमवार को एक गौरवशाली समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के संस्थापक और महान शिक्षाविद स्व. राम छबीले श्रीवास्तव की भव्य मूर्ति का अनावरण किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने प्रतिमा से पर्दा हटाकर क्षेत्र के इस महान व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस समारोह ने न केवल एक संस्थापक को याद किया, बल्कि बड़हलगंज क्षेत्र में शिक्षा की नींव रखने वाली उस ऐतिहासिक ‘त्रिभुर्ती’ (राम छबीले श्रीवास्तव, रामकवल शाही और भृगुनाथ चतुर्वेदी) के योगदान को भी रेखांकित किया।

संसाधनों के अभाव में शिक्षा की अलख: विनय शंकर तिवारी
मूर्ति अनावरण के उपरांत सभा को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने कहा कि नेशनल इंटर कॉलेज, नेशनल डिग्री कॉलेज और नेशनल बाल विद्या मंदिर जैसे संस्थानों की स्थापना उस दौर में की गई थी जब देश में संसाधनों का भारी अभाव था। उन्होंने कहा कि आज के समय में विद्यालय खोलना एक सामान्य कार्य हो सकता है, लेकिन स्व. राम छबीले श्रीवास्तव और उनके साथियों ने जिस दूरदर्शिता के साथ दक्षिणांचल के पहले विद्यालय की स्थापना की, वह अद्वितीय है।
संबोधन की प्रमुख बातें:
- व्यक्तित्व और कृतित्व: छात्र-छात्राएं इस प्रतिमा के माध्यम से जान सकेंगे कि वह कौन सा महान व्यक्तित्व था जिसने इस क्षेत्र को अंधकार से प्रकाश की ओर मोड़ा।
- राष्ट्र सर्वोपरि: उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी विचारधारा से बड़ा राष्ट्र होता है। शिक्षित व्यक्ति का दायित्व केवल स्वयं की उन्नति नहीं, बल्कि शिक्षा को आगे बढ़ाना है।
- बुलडोजर संस्कृति पर टिप्पणी: उन्होंने समसामयिक विषयों पर चर्चा करते हुए कहा कि बुलडोजर निर्माण की वस्तु है, इसे विध्वंस के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। सरकार का प्राथमिक कार्य निर्माण और सृजन होना चाहिए।
शिक्षाविदों और परिजनों का भव्य सम्मान
समारोह के दौरान केवल प्रतिमा का अनावरण ही नहीं हुआ, बल्कि उन परिवारों को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपना जीवन समर्पित कर दिया। कार्यक्रम में स्व. रामकवल शाही के पौत्र जयप्रकाश शाही और स्व. राम छबीले श्रीवास्तव की बहू श्रीमती इंदू श्रीवास्तव को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्यों को भी उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए मंच पर सम्मान मिला।
कॉलेज के वर्तमान प्रधानाचार्य संजय त्रिपाठी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और विश्वास दिलाया कि संस्थान अपने संस्थापकों के आदर्शों पर निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।
प्रबुद्ध वर्ग की गरिमामयी उपस्थिति
इस ऐतिहासिक अवसर पर क्षेत्र के सैकड़ों गणमान्य नागरिक और शिक्षाविद उपस्थित रहे। नेशनल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज के प्राचार्य प्रो. राकेश पांडे, पूर्व प्रमुख राज बहादुर सिंह, अजय दुबे, पूर्व प्रधानाचार्य बुद्धिसागर पांडे और भुवनेश्वर चौबे जैसे प्रमुख नामों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
समाज के बुद्धिजीवियों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और गौरवशाली इतिहास से जुड़ने का अवसर मिलता है। समाज में न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) और प्रशासनिक पारदर्शिता के साथ-साथ नैतिक और शैक्षिक मूल्यों का होना भी उतना ही अनिवार्य है।
निष्कर्ष: शिक्षा के आदर्शों की पुनर्स्थापना
बड़हलगंज में राम छबीले श्रीवास्तव की मूर्ति का अनावरण केवल एक पत्थर की प्रतिमा की स्थापना नहीं है, बल्कि यह उस संकल्प की पुनर्स्थापना है जिसके लिए उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन न्योछावर कर दिया। यह विद्यालय आज भी हजारों छात्रों के भविष्य को संवार रहा है, जो उनके शिक्षा के प्रति समर्पण का जीता-जागता प्रमाण है।
read more news: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर को दी विकास की बड़ी सौगात: जाम से मिलेगी मुक्ति













