गोरखपुर: 09 फरवरी 2026
गोरखपुर की कमान संभालते ही नवागत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। जिले की कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने और पुलिस के प्रति जनता के विश्वास को बहाल करने के लिए उन्होंने सोमवार को पुलिस कार्यालय में भव्य जनता दरबार का आयोजन किया। सुबह से ही कड़कड़ाती ठंड के बावजूद जिले के दूर-दराज के इलाकों से बड़ी संख्या में पीड़ित अपनी फरियाद लेकर एसएसपी कार्यालय पहुंचे थे। डॉ. कौस्तुभ ने न केवल सबकी बात सुनी, बल्कि मातहतों को ‘त्वरित न्याय’ का कड़ा पाठ भी पढ़ाया।

एक-एक फरियादी से सीधा संवाद
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ की कार्यशैली में संवेदनशीलता और सख्ती का अनूठा संगम देखने को मिला। उन्होंने जनता दरबार में आए एक-एक फरियादी को अपने पास बुलाया और उनकी शिकायतों को धैर्यपूर्वक सुना। एसएसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस कार्यालय का दरवाजा हर उस व्यक्ति के लिए खुला है जिसे थानों से न्याय नहीं मिला है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा, “जनता की शिकायतों का समाधान हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। किसी भी पीड़ित को अनावश्यक रूप से दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, यह सुनिश्चित करना संबंधित थानेदार और क्षेत्राधिकारी का काम है।”

शिकायतों का स्वरूप: जमीनी विवाद और साइबर ठगी की भरमार
जनता दरबार के दौरान शिकायतों का अंबार लगा रहा, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दे छाए रहे:
- जमीन विवाद व अवैध कब्जा: ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों ने अपनी पुश्तैनी जमीनों पर दबंगों के कब्जे की शिकायत की।
- साइबर ठगी: डिजिटल युग के बढ़ते अपराधों के बीच कई युवाओं ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले एसएसपी के सामने रखे।
- महिला उत्पीड़न: महिलाओं ने घरेलू हिंसा और छेड़खानी जैसे गंभीर मामलों में पुलिस की सुस्ती की शिकायत दर्ज कराई।
- पारिवारिक कलह: बुजुर्गों और वैवाहिक जोड़ों के बीच के विवादों को भी सुलझाने की गुहार लगाई गई।
लापरवाही पर ‘जीरो टॉलरेंस’: एसएसपी के सख्त निर्देश
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतों के निस्तारण में ‘टालमटोल’ की नीति अब नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मामले में पारदर्शिता होनी चाहिए और फरियादी को समय-समय पर उसकी शिकायत की प्रगति (Status) की जानकारी दी जानी चाहिए। डॉ. कौस्तुभ ने निर्देश दिया कि गंभीर मामलों में तुरंत विशेष टीम गठित कर कार्रवाई की जाए। महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में उन्होंने ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाने और संवेदनशीलता के साथ निपटने के निर्देश दिए।
थानों के लिए नया ‘वर्किंग मॉडल’
एसएसपी ने जिले के सभी थाना प्रभारियों के लिए कड़ा संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि जो काम वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में हो रहा है, वही थानों पर भी होना चाहिए। थानेदार स्वयं फरियादी से सीधे संवाद करें और छोटी-छोटी समस्याओं का निस्तारण गांव या थाने के स्तर पर ही करें। उन्होंने लंबित विवेचनाओं की गुणवत्तापूर्ण समीक्षा करने और चार्जशीट या फाइनल रिपोर्ट समय सीमा के भीतर लगाने के निर्देश दिए।
पुलिस-जनता के बीच बढ़ेगा विश्वास
डॉ. कौस्तुभ ने बैठक के अंत में कहा कि कानून-व्यवस्था तभी मजबूत होगी जब आम नागरिक और पुलिस के बीच अटूट विश्वास होगा। उन्होंने कहा, “जब एक गरीब और मजलूम व्यक्ति को यह भरोसा होगा कि पुलिस कप्तान उसकी बात सुनेंगे और उसे न्याय मिलेगा, तभी मेरा यहाँ होना सार्थक है।” उनकी इस पहल से जनता दरबार में आए लोगों के चेहरों पर संतोष देखा गया।
वरिष्ठ अधिकारियों की टीम रही मुस्तैद
इस जनता दरबार के दौरान प्रशासन का पूरा अमला एसएसपी के साथ मौजूद रहा। एसपी सिटी अभिनव त्यागी, एसपी नॉर्थ ज्ञानेंद्र, एसपी दक्षिणी दिनेश कुमार पुरी, सहायक पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार, एसपी यातायात राजकुमार पांडेय, एसपी मंदिर संतोष कुमार और सीओ ऑफिस दीपांशी सिंह राठौर ने फरियादियों की शिकायतों के वर्गीकरण और तत्काल कार्रवाई में सहयोग किया।
निष्कर्ष
नवागत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ की यह पहली बड़ी जनसुनवाई गोरखपुर की जनता के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई है। “पुलिस मित्र” की अवधारणा को धरातल पर उतारने का जो प्रयास एसएसपी ने शुरू किया है, यदि वह निरंतर जारी रहता है, तो निश्चित रूप से गोरखपुर में अपराधियों के हौसले पस्त होंगे और पीड़ितों को न्याय के लिए दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा।
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