गोरखपुर: 10 फरवरी 2026
गोरखपुर की सड़कों पर सरपट दौड़ते बाइक सवार हों या छतों पर पतंगबाजी का आनंद लेते बच्चे, अब उनकी गर्दन पर ‘कातिल डोर’ का खतरा नहीं मंडराएगा। नवागत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ ने चाइनीज मांझा (सिंथेटिक मांझा) की बिक्री और उपयोग को लेकर अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जो भी दुकानदार या सप्लायर चंद रुपयों के मुनाफे के लिए मानव जीवन से खिलवाड़ करेगा, उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

कातिल है यह डोर: क्यों लगा प्रतिबंध?
चाइनीज मांझा न केवल कानूनन प्रतिबंधित है, बल्कि यह पर्यावरण और मानव जीवन के लिए एक अदृश्य दुश्मन की तरह है। प्लास्टिक और कांच के मिश्रण से बना यह मांझा इतना मजबूत होता है कि यह आसानी से नहीं टूटता, बल्कि त्वचा और हड्डियों को काट देता है। एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने बताया कि पिछले कुछ समय में राहगीरों, विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के गले कटने और गंभीर रूप से घायल होने की कई घटनाएं सामने आई हैं। इसके अलावा, यह मांझा बेजुबान पक्षियों के लिए भी काल साबित होता है।
दुकानों की सघन जांच और जब्ती के आदेश
एसएसपी ने जिले के सभी थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पतंग और मांझा बेचने वाली दुकानों की सूची तैयार करें और वहां औचक छापेमारी (Raid) करें।
- मुकदमा और गिरफ्तारी: जहाँ भी प्रतिबंधित चाइनीज मांझा बरामद होगा, वहां केवल सामान जब्त नहीं किया जाएगा, बल्कि संबंधित दुकानदार के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजा जाएगा।
- सप्लाई चेन पर नजर: पुलिस केवल खुदरा विक्रेताओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि थोक विक्रेताओं और उन रास्तों की भी जांच करेगी जहाँ से यह मांझा गोरखपुर में प्रवेश कर रहा है।

बीट पुलिसिंग से बढ़ेगी जागरूकता
डॉ. कौस्तुभ का मानना है कि केवल डंडे के बल पर इस समस्या को खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए उन्होंने ‘बीट पुलिसिंग’ को सक्रिय किया है। पुलिसकर्मी अब मोहल्लों और बाजारों में जाकर लोगों को चाइनीज मांझा के खतरों के प्रति जागरूक करेंगे। सार्वजनिक स्थानों पर माइकिंग कराई जाएगी और पंपलेट बांटे जाएंगे। एसएसपी ने अभिभावकों से भी भावुक अपील की है कि वे अपने बच्चों की जिद के आगे न झुकें और उन्हें केवल सूती धागे (सद्दी) से ही पतंग उड़ाने के लिए प्रेरित करें।
लापरवाह पुलिसकर्मियों पर भी गिरेगी गाज
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एसएसपी ने अधिकारियों की भी जवाबदेही तय कर दी है। उन्होंने साफ कहा है कि यदि किसी थाना क्षेत्र में खुलेआम चाइनीज मांझा बिकता पाया गया या उससे कोई अप्रिय घटना हुई, तो संबंधित थानेदार की जिम्मेदारी मानी जाएगी। खुफिया तंत्र (एलआईयू) को भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि चोरी-छिपे गोदामों में रखे गए मांझे का पता लगाया जा सके।
त्योहारों पर रहेगी विशेष चौकसी
आने वाले त्योहारों और विशेष अवसरों पर जब पतंगबाजी का क्रेज बढ़ जाता है, पुलिस अपनी गश्त और तेज करेगी। फ्लाईओवरों और मुख्य सड़कों पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी ताकि कोई भी कातिल डोर किसी की जान न ले सके। एसएसपी ने जनता से भी सहयोग मांगा है और अपील की है कि यदि कहीं भी इस प्रतिबंधित वस्तु की बिक्री हो रही हो, तो तुरंत पुलिस के हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा।
निष्कर्ष
गोरखपुर पुलिस का यह अभियान स्वागत योग्य है। “मानव जीवन से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा” का संदेश देकर डॉ. कौस्तुभ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा ही शासन की पहली प्राथमिकता है। चाइनीज मांझा के खिलाफ इस युद्ध में यदि समाज भी पुलिस का साथ दे, तो निश्चित रूप से गोरखपुर की हवाएं और रास्ते सुरक्षित हो सकेंगे।
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