बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोरखपुर जनपद के गोला तहसील क्षेत्र के लिए रविवार का दिन बेहद दुखद रहा। क्षेत्र के प्रतिष्ठित समाजसेवी (Social Worker), पूर्व जिला पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशी और ग्राम मिश्रौली निवासी संजय मिश्रा, जिन्हें क्षेत्र में ‘डबलू मिश्रा’ के नाम से भी जाना जाता था, का असामयिक निधन हो गया। 48 वर्षीय संजय मिश्रा पिछले काफी समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर जैसे ही गोला और आसपास के क्षेत्रों में पहुँची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
संजय मिश्रा अपने मृदु व्यवहार और जनसेवा के कार्यों के लिए क्षेत्र में काफी लोकप्रिय थे। उनके निधन को स्थानीय राजनीति और सामाजिक क्षेत्र के लिए एक बड़ी अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

वाराणसी में चल रहा था उपचार
पारिवारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, संजय मिश्रा लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका उपचार वाराणसी स्थित कैंसर अस्पताल से चल रहा था। रविवार अपराह्न वाराणसी के ही एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही मिश्रौली स्थित उनके पैतृक निवास पर शुभचिंतकों और क्षेत्रीय नागरिकों का तांता लग गया। हर कोई अपने प्रिय नेता और साथी को अंतिम बार देखने के लिए व्याकुल नजर आया।
मुक्ति धाम पर नम आँखों से दी गई अंतिम विदाई
सोमवार को संजय मिश्रा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक आवास से गोला उपनगर स्थित मुक्ति धाम लाया गया। यहाँ पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उनकी अंत्येष्टि संपन्न हुई। उनके बड़े पुत्र विनायक मिश्रा ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। श्मशान घाट पर मौजूद हर व्यक्ति की आँखें नम थीं। अंतिम संस्कार के समय ‘संजय भैया अमर रहें’ के नारे भी गूंजे, जो जनता के बीच उनकी लोकप्रियता का प्रमाण थे।
क्षेत्र में शोक और संवेदनाओं का दौर
संजय मिश्रा के निधन पर क्षेत्र के विभिन्न राजनेताओं, समाजसेवी संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। लोगों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि संजय मिश्रा हमेशा गरीबों और असहायों की मदद के लिए तत्पर रहते थे। पूर्व जिला पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशी के रूप में उन्होंने जनता के बीच एक अमिट छाप छोड़ी थी।
उनकी अंत्येष्टि के अवसर पर मिश्रौली गाँव सहित गोला क्षेत्र के सैकड़ों सम्मानित लोग, जन प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने शोक संतप्त परिवार को इस असीम दुख को सहने की शक्ति प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
निष्कर्ष: समाज सेवा के एक अध्याय का अंत
संजय मिश्रा का जाना केवल एक परिवार की हानि नहीं है, बल्कि गोला क्षेत्र ने एक ऐसा समाजसेवी खो दिया है जो हमेशा धरातल पर रहकर लोगों की समस्याओं को हल करने का प्रयास करता था। उनकी कमी आने वाले समय में क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में स्पष्ट रूप से खलेगी।
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