बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 21 मार्च 2026

कलयुग के संतापों से मुक्ति और आत्मिक शांति का एकमात्र मार्ग ‘हरि नाम’ संकीर्तन और भागवत श्रवण ही है। इसी पावन उद्देश्य के साथ गोला तहसील के अंतर्गत आने वाले जानीपुर गांव के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में रुद्र महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा (Shrimad Bhagwat Katha) का भव्य आयोजन शुरू हुआ है। कथा के प्रथम दिन व्यासपीठ पर विराजमान अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बाल व्यास श्वेतिमा माधव प्रिया ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप और भागवत महात्म्य का ऐसा वर्णन किया कि उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। समूचा क्षेत्र ‘जय श्री कृष्ण’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गुंजायमान रहा।
कथा का शुभारंभ: ‘सच्चिदानंद’ स्वरूप का वंदन
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और मंगलाचरण के साथ हुआ। बाल व्यास श्वेतिमा माधव प्रिया ने श्रीमद्भागवत के प्रथम श्लोक ‘सच्चिदानन्द रूपाय विश्वोत्पत्त्यादि हेतवे’ का उच्चारण करते हुए भगवान के सत्य, चित्त और आनंद स्वरूप की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने कहा कि परमात्मा सत्य है, चेतन है और परमानंद का स्रोत है। जो जीव इस आनंद को पहचान लेता है, उसके जीवन के सभी दुखों का अंत हो जाता है।
मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य: आहार-निद्रा से परे
व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए श्वेतिमा माधव प्रिया ने मानव जीवन की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बड़े ही सरल शब्दों में समझाया कि आहार, निद्रा, भय और संतानोत्पत्ति जैसे कार्य तो पशु भी करते हैं। यदि मनुष्य भी केवल इन्हीं कार्यों तक सीमित रहता है, तो उसमें और पशु में कोई अंतर नहीं रह जाता।
“मानव जीवन का वास्तविक लक्ष्य भगवत्प्राप्ति और सत्कर्म है। यह दुर्लभ शरीर हमें केवल इंद्रिय सुखों के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर के स्मरण और समाज सेवा के लिए मिला है।” — बाल व्यास श्वेतिमा माधव प्रिया
भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का प्रसंग
प्रथम दिन की कथा में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के प्रसंग ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बाल व्यास ने बताया कि कलयुग में भक्ति ही जीव के कल्याण का सबसे सरल साधन है। जब ज्ञान और वैराग्य वृद्ध हो जाते हैं, तब भागवत कथा के श्रवण मात्र से वे पुनः युवा और चैतन्य हो जाते हैं। उन्होंने श्रीमद्भागवत को साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप बताया और कहा कि जहाँ भागवत की कथा होती है, वहाँ साक्षात गोविंद का निवास होता है।
बाल व्यास श्वेतिमा: अल्पायु में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार
अंतर्राष्ट्रीय बाल व्यास श्वेतिमा माधव प्रिया का व्यक्तित्व प्रेरणा का पुंज है। अल्पायु में ही वे अपनी अद्भुत स्मरण शक्ति और मधुर कंठ से देश-विदेश में सनातन धर्म का प्रचार कर रही हैं। जानीपुर में आयोजित यह कथा उनके जीवन की 29वीं श्रीमद्भागवत कथा है। उनकी शैली और कथा कहने के ढंग ने न केवल बुजुर्गों बल्कि युवाओं को भी धर्म के प्रति आकर्षित किया है।
रुद्र महायज्ञ और जानीपुर का धार्मिक वातावरण
जानीपुर शिव मंदिर परिसर में आयोजित इस रुद्र महायज्ञ ने पूरे क्षेत्र को तीर्थ स्थल में बदल दिया है। सुबह यज्ञ की आहुतियों की सुगंध और शाम को भागवत के भजनों की गूंज से वातावरण अत्यंत पवित्र हो गया है। मुख्य यजमान डॉ. रमेश सिंह, उमाशंकर सिंह एवं सदानंद वर्मा ने सपरिवार भागवत जी की आरती उतारी और आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्रद्धालुओं और सहयोगियों का उत्साह
इस आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों और मंदिर समिति का विशेष योगदान रहा। कथा में पुजारी राधेश्याम तिवारी, राजेश सिंह राजन, रोशन श्रीवास्तव, मंटू सिंह, विजय कुमार, मनोज वर्मा और कामेश्वर शास्त्री ने व्यवस्थाएं संभालीं। साथ ही नागेंद्र शर्मा, भानुप्रताप दूबे, रमेश दूबे, अजय दूबे एवं अखिलेश दूबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।












