गोलाबाजार, गोरखपुर: 17 फरवरी 2026
आज के दौर में जब खेती योग्य भूमि का क्षेत्रफल निरंतर घट रहा है और देश की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में प्रत्येक नागरिक को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस चुनौती से निपटने और किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने का एकमात्र मार्ग वैज्ञानिक खेती और आधुनिक तकनीक का अपनाना है। इसी उद्देश्य के साथ मंगलवार को उपनगर गोला स्थित राजकीय कृषि बीज भंडार परिसर, रानीपुर में ‘आत्मा’ योजनान्तर्गत आरपीएल आधारित दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।
तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण समय की मांग
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा के वरिष्ठ नेता नित्यानंद मिश्र ने दीप प्रज्वलित कर गोष्ठी का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैज्ञानिक नवाचारों को जोड़ना अनिवार्य हो गया है। किसान भाइयों को उन्नतशील बीज, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और आधुनिक कृषि यंत्रों का अधिकतम उपयोग करना चाहिए ताकि कम लागत में अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त किया जा सके।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके लिए किसानों को भी मृदा स्वास्थ्य और फसल सुरक्षा के प्रति सजग होना होगा।

मृदा परीक्षण और पोषक तत्व प्रबंधन पर विशेषज्ञों की राय
प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने किसानों को जागरूक किया। उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जियाउद्दीन सिद्दकी ने पशुपालन और टीकाकरण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पशुओं को पौष्टिक आहार देने और समय पर टीकाकरण कराने से पशुपालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
विशेषज्ञों की टीम ने निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर विस्तृत जानकारी दी:
- मृदा परीक्षण: मिट्टी की जांच कराकर ही उर्वरकों का प्रयोग करें ताकि भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहे।
- पोषक तत्व प्रबंधन: केवल यूरिया पर निर्भर न रहकर सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलन बनाएं।
- फार्मर रजिस्ट्री: सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया को समझना आवश्यक है।
- फसल अवशेष प्रबंधन: पराली जलाने के बजाय उसे खाद के रूप में उपयोग करने की तकनीक सिखाई गई।
आधुनिक कृषि यंत्र और प्राकृतिक खेती का महत्व
पूर्व अपर जिला कृषि अधिकारी राम अधार यादव ने तकनीकी सत्र में किसानों को रबी की फसलों के सामयिक प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संतुलित उर्वरक और उन्नतशील बीजों के साथ-साथ ‘प्राकृतिक खेती’ (Natural Farming) भविष्य की जरूरत है। उन्होंने कृषि यंत्रों की उपयोगिता पर चर्चा करते हुए कहा कि आधुनिक यंत्र न केवल श्रम बचाते हैं बल्कि बीज और खाद की बर्बादी को भी रोकते हैं।
उन्होंने सरकार की विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं जैसे सब्सिडी पर कृषि यंत्र, बीज ग्राम योजना और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के उचित प्रबंधन पर भी विस्तार से जानकारी दी।
प्रशिक्षण में उमड़ा किसानों का जनसैलाब
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमुख प्रतिनिधि उमाशंकर ने की और सफल संचालन प्रभारी कृषि बीज भंडार राज नरायन यादव द्वारा किया गया। प्रशिक्षण में बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसानों और महिला कृषकों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से बबूना दुबे, बिंदु मिश्रा, पूनम गुप्ता, सुषमा सिंह, जागृति शर्मा, रागिनी राय, निशीथ राय, दीपांकर सरोज, शेषनाथ यादव, मेघनाथ, सुरेंद्र यादव, सुभाष, भृगूनाथ, घनश्याम मौर्य सहित भारी संख्या में किसान भाई और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। अंत में करुणाकर सिंह ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
किसानों के लिए सफलता के पांच सूत्र
प्रशिक्षण के समापन पर विशेषज्ञों ने किसानों के लिए पांच महत्वपूर्ण सूत्र साझा किए:
- बीज शोधन के बिना बुवाई न करें।
- रसायनों के स्थान पर जैविक खादों को प्राथमिकता दें।
- सिंचाई के लिए ड्रिप या स्प्रिंकलर तकनीक अपनाएं।
- पशुपालन को खेती के सहायक उद्योग के रूप में विकसित करें।
- बाजार की मांग के अनुसार फसलों का चयन करें।
निष्कर्ष
गोला में आयोजित यह दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम क्षेत्र के किसानों के लिए ज्ञान का नया द्वार खोलने वाला साबित हुआ है। वैज्ञानिक खेती के प्रति किसानों का बढ़ता उत्साह यह दर्शाता है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था अब तकनीक के सहारे नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है। यदि किसान इन वैज्ञानिक विधियों को धरातल पर उतारते हैं, तो न केवल उनकी उपज बढ़ेगी बल्कि ‘खाद्यान्न आत्मनिर्भर भारत’ का सपना भी साकार होगा।
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