बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 28 फरवरी 2026
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के पावन अवसर पर गोला तहसील क्षेत्र के ग्राम सुरदापार स्थित केआर मेमोरियल एकेडमी संस्थान में शनिवार को ‘विज्ञान उत्सव’ का अत्यंत प्रेरणादायक और भव्य आयोजन किया गया। इस उत्सव ने न केवल बच्चों की वैज्ञानिक मेधा को प्रदर्शित किया, बल्कि ग्रामीण परिवेश में विज्ञान की मौजूदगी और उसके महत्व पर एक नई बहस भी छेड़ी। विद्यालय परिसर में आयोजित इस विज्ञान उत्सव के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि विज्ञान केवल बड़ी प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे रोजमर्रा के जीवन और ग्रामीण संघर्षों का हिस्सा है।
सरस्वती वंदना और दीप प्रज्वलन से शुभारंभ
कार्यक्रम का विधिवत आरंभ मुख्य अतिथियों और विद्यालय प्रबंधन द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। विद्यालय की छात्राओं ने अत्यंत सुरीली आवाज में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की और स्वागत गान के माध्यम से आगंतुकों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक बागेश्वरी राय ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि डॉ. अनिल तिवारी सहित कई गणमान्य शिक्षाविद् विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

प्रबंधक बागेश्वरी राय का संबोधन: “धूल भरी सड़कों में है विज्ञान”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रबंधक बागेश्वरी राय ने विज्ञान की एक अनूठी और जमीनी परिभाषा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा, “आज हम यहाँ विज्ञान उत्सव मना रहे हैं, जिसका मूल मंत्र है—’जानो तो मानो’। हमारे लिए विज्ञान महज एक विषय नहीं, बल्कि एक चुनौती है। अक्सर लोग समझते हैं कि विज्ञान केवल वातानुकूलित (AC) कमरों और बड़े शहरों में होता है, लेकिन हकीकत यह है कि विज्ञान गांवों में मौजूद है। यह धूल भरी सड़कों, खेतों और हमारे घरों की छोटी-छोटी समस्याओं में छिपा है।”
उन्होंने आगे कहा कि जब जीवन में कठिनाई आती है, तभी विज्ञान का जन्म होता है। जो बच्चा या नौजवान कठिनाई से मुंह मोड़ लेता है, वह कभी विज्ञान के करीब नहीं पहुँच सकता। देश के महान वैज्ञानिकों ने जो नींव रखी है, उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी इन्हीं ग्रामीण परिवेश से आने वाले बच्चों की है। यदि जीवन से विज्ञान को निकाल दिया जाए, तो विकास की कल्पना करना भी असंभव है।

संयुक्त विज्ञान प्रदर्शनी: प्रतिभा का अनूठा संगम
इस विज्ञान उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता केआर मेमोरियल एकेडमी भड़सड़ा और सूरदापार, दोनों विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा संयुक्त रूप से प्रस्तुत की गई विज्ञान प्रदर्शनी रही। ग्रामीण क्षेत्र के इन नौनिहालों ने ऐसे-ऐसे मॉडल प्रस्तुत किए कि वहां मौजूद अभिभावक और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक आश्चर्यचकित रह गए।
प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षण:
- कृषि नवाचार: सिंचाई की आधुनिक तकनीक और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए बनाए गए सस्ते ड्रोन मॉडल।
- ग्रामीण ऊर्जा समाधान: गोबर गैस और सौर ऊर्जा से चलने वाले घरेलू उपकरणों के प्रोटोटाइप।
- पर्यावरण और सुरक्षा: कचरा प्रबंधन और स्मार्ट विलेज के मॉडलों ने सभी का ध्यान खींचा।
- दैनिक विज्ञान: दैनिक जीवन में होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं को सरल प्रयोगों के जरिए समझाया गया।
डॉ. अनिल तिवारी और अन्य वक्ताओं के विचार
विशिष्ट अतिथि डॉ. अनिल तिवारी ने कहा कि विज्ञान उत्सव जैसे आयोजन बच्चों में जिज्ञासा (Curiosity) पैदा करते हैं। जिज्ञासा ही वह बीज है जिससे महान खोजों का वृक्ष पनपता है। उन्होंने विद्यालय की इस पहल की सराहना की कि विगत चार वर्षों से निरंतर यह कार्यक्रम आयोजित कर ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच दिया जा रहा है। अन्य वक्ताओं ने भी विज्ञान के रचनात्मक उपयोग और अंधविश्वास से दूर रहने की आवश्यकता पर बल दिया।
अभिभावकों का उत्साह और आभार प्रदर्शन
इस प्रदर्शनी को देखने के लिए सुरदापार और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में अभिभावक और गणमान्य लोग पहुँचे। बच्चों के हुनर को देखकर अभिभावकों ने महसूस किया कि उनके बच्चे भी बड़े शहरों के छात्रों से किसी भी मामले में कम नहीं हैं। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य ने आए हुए सभी आगंतुकों, अतिथियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने शिक्षकों की मेहनत की भी सराहना की जिन्होंने बच्चों को इन जटिल मॉडलों को बनाने में मार्गदर्शन दिया।
निष्कर्ष: सुदूर गांवों से निकलेगी नई वैज्ञानिक क्रांति
केआर मेमोरियल एकेडमी में संपन्न हुआ यह विज्ञान उत्सव इस बात का प्रमाण है कि यदि सही अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण अंचलों से भी ‘डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम’ और ‘सीवी रमन’ जैसे वैज्ञानिक निकल सकते हैं। बागेश्वरी राय के नेतृत्व में विद्यालय ने विज्ञान को किताबी दुनिया से निकालकर समाज की धूल भरी सड़कों और घरों की जरूरतों से जोड़ दिया है। यह उत्सव भविष्य के वैज्ञानिकों के निर्माण की दिशा में एक बड़ा और सार्थक कदम है।












