बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 2 मार्च 2026
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद अंतर्गत गोला थाना क्षेत्र में सामाजिक विद्वेष और हिंसा का एक शर्मनाक मामला सामने आया है। ग्राम बारानगर में एक 17 वर्षीय किशोर को न केवल शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि उसे उसकी जाति को लेकर अपमानित भी किया गया। गोला पुलिस ने इस मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और एससी/एसटी एक्ट की संगीन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया है। इस घटना के बाद से गांव में तनावपूर्ण शांति व्याप्त है और दलित समाज में भारी रोष देखा जा रहा है।

दौड़ने गया था किशोर, रास्ते में घेरा
प्राप्त विवरण के अनुसार, बारानगर निवासी खेदू प्रसाद पुत्र स्वर्गीय झिनकू ने गोला थाने में न्याय की गुहार लगाते हुए लिखित तहरीर दी है। तहरीर में बताया गया है कि उनका 17 वर्षीय नाती शाहिल रविवार की शाम को शारीरिक अभ्यास के लिए गांव के पूर्व दिशा में स्थित पुलिया पर दौड़ने गया था। शाहिल अभी पुलिया के पास पहुँचा ही था कि वहाँ पहले से घात लगाए बैठे गांव के ही तीन दबंगों ने उसे घेर लिया।
आरोप है कि गोलू सिंह, लक्की सिंह और मंटू यादव ने शाहिल को रोककर अकारण विवाद शुरू कर दिया। जब शाहिल ने इसका विरोध किया, तो तीनों आरोपियों ने उस पर हमला बोल दिया।
सिर पर आई गंभीर चोट, चप्पलों से पीटा
खेदू प्रसाद का आरोप है कि तीनों आरोपियों ने शाहिल को जमीन पर गिरा दिया और उसे लात-घूंसों व चप्पलों से बेहरमी से पीटा। इस हिंसक हमले में शाहिल के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं और वह लहूलुहान हो गया। मारपीट के दौरान जब शाहिल ने रहम की भीख मांगी, तो आरोपियों ने उसकी जाति का उल्लेख करते हुए अत्यंत भद्दी और जातिसूचक गालियां दीं।
इतना ही नहीं, आरोपियों ने घायल किशोर को डराते हुए कहा कि यदि उसने इस घटना की जानकारी घर वालों को दी या थाने जाकर पुलिस से शिकायत की, तो उसे जान से मार दिया जाएगा। हमलावर शाहिल को मरणासन्न हालत में छोड़कर मौके से फरार हो गए।
पुलिसिया कार्रवाई: एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज
घटना के बाद परिजन घायल शाहिल को लेकर तत्काल गोला थाने पहुँचे और पुलिस को आपबीती सुनाई। थाना प्रभारी राकेश रोशन सिंह ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर तीनों नामजद आरोपियों के खिलाफ निम्नलिखित धाराओं में शिकंजा कसा है:
- बीएनएस धारा 115(2): स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुँचाना।
- बीएनएस धारा 352: शांति भंग करने के इरादे से अपमानित करना।
- बीएनएस धारा 351(3): जान से मारने की धमकी देना।
- एससी/एसटी एक्ट: धारा 3(1)(द), 3(1)(ध) व 3(2)(va) – सार्वजनिक स्थान पर जातिगत अपमान और उत्पीड़न।
थाना प्रभारी ने बताया कि किशोर का चिकित्सीय परीक्षण (Medical) करा लिया गया है और मामले की जांच उच्चाधिकारियों के निर्देशन में शुरू कर दी गई है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
क्षेत्र में बढ़ा आक्रोश, सुरक्षा की मांग
बारानगर की इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में जातिगत भेदभाव की कड़वी सच्चाई को उजागर किया है। दलित समाज के स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की है। ग्रामीणों का कहना है कि सरेराह एक किशोर को जाति के नाम पर अपमानित करना और उस पर जानलेवा हमला करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए और पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में विभाजन पैदा करती हैं। दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी की जाति या धर्म के आधार पर उसे प्रताड़ित करने का साहस न कर सके।
निष्कर्ष: न्याय की उम्मीद
गोला पुलिस द्वारा एससी/एसटी एक्ट में दर्ज यह मुकदमा उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो खुद को कानून से ऊपर समझते हैं। किशोर शाहिल वर्तमान में उपचाररत है और सदमे में है। पुलिस का दावा है कि बहुत जल्द तीनों नामजद आरोपी सलाखों के पीछे होंगे। इस मामले में पुलिस की निष्पक्ष जांच और त्वरित गिरफ्तारी ही समाज में न्याय के प्रति विश्वास को पुनर्जीवित कर सकती है।












