
उत्तराखंड की हसीन वादियों और ऊंचे पहाड़ों के बीच सफर करना जितना रोमांचक है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। पिछले कुछ समय में पहाड़ी रास्तों पर बढ़ते सड़क हादसों ने प्रदेश सरकार की चिंता बढ़ा दी है। इसी गंभीर विषय को संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे राज्य में सड़क सुरक्षा (Road Safety) ऑडिट करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
मुख्यमंत्री का यह आदेश केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य धरातल पर बदलाव लाना है ताकि उत्तराखंड की सड़कों पर होने वाली अकाल मौतों को रोका जा सके। शासन ने स्पष्ट किया है कि “सुरक्षित सड़क, सुरक्षित उत्तराखंड” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
‘रोड सेफ्टी ऑडिट’ और ब्लैक स्पॉट्स की पहचान
सड़क सुरक्षा के इस विशेष अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘रोड सेफ्टी ऑडिट’ है। इसके तहत तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें प्रदेश के सभी छोटे-बड़े राजमार्गों का बारीकी से निरीक्षण कर रही हैं।
इस ऑडिट का मुख्य फोकस ‘ब्लैक स्पॉट्स’ (Black Spots) यानी वे स्थान हैं जहाँ बार-बार दुर्घटनाएं होती हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि इन ब्लैक स्पॉट्स को केवल चिन्हित न किया जाए, बल्कि वहां दुर्घटना के कारणों—जैसे तीखा मोड़, खराब ढलान, या सड़क की चौड़ाई—को तुरंत सुधारा जाए। ऑडिट की रिपोर्ट के आधार पर लोक निर्माण विभाग (PWD) को तत्काल मरम्मत और निर्माण कार्य शुरू करने की समयसीमा दी गई है।
पहाड़ी क्षेत्रों के लिए विशेष सुरक्षा घेरे (Crash Barriers)

पहाड़ी क्षेत्रों में सबसे बड़ा खतरा वाहन का सड़क से फिसलकर गहरी खाई में गिरना होता है। इसे रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘क्रैश बैरियर’ और ‘सुरक्षा घेरे’ लगाने का काम युद्ध स्तर पर चलाने का आदेश दिया है।
पहाड़ी रास्तों पर निम्नलिखित सुरक्षा मानकों को अनिवार्य किया जा रहा है:
- स्टील डब्लू-बीम बैरियर: ये बैरियर वाहन के टकराने पर उसे सड़क पर वापस धकेलने की क्षमता रखते हैं।
- पैरापेट और कंक्रीट गार्डरेल: संवेदनशील ढलानों पर मजबूत कंक्रीट की दीवारें बनाई जा रही हैं।
- कॉन्वेक्स मिरर: संकरे और तीखे मोड़ों पर बड़े दर्पण लगाए जा रहे हैं, ताकि चालक को दूसरी तरफ से आने वाले वाहन का पूर्वानुमान हो सके।
चेतावनी बोर्ड और रिफ्लेक्टिव संकेतक
रात के समय और खराब मौसम (कोहरा या भारी बारिश) में पहाड़ी रास्तों पर दृश्यता कम हो जाती है। इसके समाधान के लिए सीएम धामी ने पूरे प्रदेश में उन्नत ‘चेतावनी बोर्ड’ और ‘रिफ्लेक्टिव साइनबोर्ड’ लगाने के निर्देश दिए हैं।
- कैट्स आइज (Road Studs): सड़कों के बीचों-बीच चमकने वाली पट्टियां लगाई जा रही हैं जो रात में चालक को सड़क की सीमा समझने में मदद करती हैं।
- इल्यूमिनेटेड साइनेज: बिजली या सौर ऊर्जा से चलने वाले बोर्ड लगाए जा रहे हैं जो तीखे मोड़ों, संकरे पुलों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की जानकारी देंगे।
आधुनिक तकनीक और ड्रोन से निगरानी
सड़क सुरक्षा (Road Safety) को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है। सीएम धामी ने परिवहन विभाग को निर्देश दिया है कि वे उन संवेदनशील क्षेत्रों की ड्रोन से निगरानी करें जहां मैन्युअल गश्त संभव नहीं है। साथ ही, ओवरस्पीडिंग और ओवरलोडिंग को रोकने के लिए ‘स्पीड गन’ और ‘ऑटोमेटेड चालान सिस्टम’ को और अधिक सक्रिय किया जा रहा है।
जन जागरूकता और प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री का मानना है कि सड़क सुरक्षा केवल सरकारी इंजीनियरिंग से ही सफल नहीं हो सकती, इसमें जनभागीदारी भी आवश्यक है।
- ड्राइवर ट्रेनिंग: पहाड़ी रास्तों पर वाहन चलाने वाले चालकों के लिए विशेष रिफ्रेशर कोर्स अनिवार्य किए जा रहे हैं।
- शिक्षा: स्कूली पाठ्यक्रम में सड़क सुरक्षा नियमों को शामिल किया जा रहा है।
- प्रचार-प्रसार: रेडियो, समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से “गति पर नियंत्रण” और “नशे में गाड़ी न चलाने” का संदेश घर-घर पहुँचाया जा रहा है।
निष्कर्ष: शून्य दुर्घटना का लक्ष्य
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ये कड़े निर्देश और सक्रिय निगरानी उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा (Road Safety) के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। सड़कों के ऑडिट से लेकर सुरक्षा घेरों तक, हर कदम का उद्देश्य यात्री की जान को कीमती मानना है। उम्मीद है कि इन प्रयासों से आने वाले समय में उत्तराखंड की सड़कें पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए भयमुक्त और सुरक्षित बनेंगी।













