गोलाबाजार, गोरखपुर: 13 फरवरी 2026
गोरखपुर के गोला थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां उजाड़ दी हैं। गुरुवार की देर शाम काम खत्म कर अपने घर लौट रहे एक मजदूर की बाइक सड़क किनारे रखे सीमेंट के बेंच से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसकी सांसें थम गईं। इस घटना ने एक बार फिर सड़क किनारे रखे जाने वाले अवैध अवरोधों और असुरक्षित निर्माणों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे हुआ हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गोला थाना क्षेत्र के ग्राम हरपुर निवासी रामचंद्र (38 वर्ष) पुत्र रामसूरत पेशे से मजदूर थे और मकानों की छत का सरिया बांधने का काम करते थे। गुरुवार को वे गोला क्षेत्र के ही ग्राम बाड़ीतरया में सरिया बांधने गए थे। दिन भर कड़ी मेहनत करने के बाद शाम को वे अपनी बाइक से वापस अपने गांव हरपुर लौट रहे थे।
जैसे ही वे लमतिया गांव के पास पहुँचे, अंधेरा होने के कारण सड़क के बिल्कुल किनारे ग्राम सभा द्वारा रखे गए सीमेंट के भारी-भरकम बेंच को देख नहीं पाए। उनकी बाइक सीधे उस बेंच से जा टकराई। टक्कर के बाद रामचंद्र बाइक समेत सड़क पर दूर जा गिरे, जिससे उनके सिर और शरीर के आंतरिक अंगों में गंभीर चोटें आईं।
अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
हादसे के बाद मौके पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना परिजनों को दी और घायल रामचंद्र को आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) गोला पहुँचाया। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल पहुँचते ही चिकित्सकों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर सुनते ही अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई।
परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था रामचंद्र
रामचंद्र की असामयिक मृत्यु से हरपुर गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। 38 वर्षीय रामचंद्र अपने परिवार के मुख्य आधार थे। दिन भर मेहनत-मजदूरी कर वे अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी मृत्यु के बाद उनके वृद्ध माता-पिता, पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि रामचंद्र बहुत ही मिलनसार और मेहनती व्यक्ति थे, उनके जाने से पूरे गांव ने एक नेक इंसान खो दिया है।
सड़क किनारे रखे बेंच बने ‘यमराज’
इस सड़क दुर्घटना ने ग्राम सभाओं द्वारा सड़क की पटरियों पर रखे जाने वाले सीमेंट के बेंचों की उपयोगिता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
- अंधेरे में खतरा: रात के समय इन बेंचों पर रिफ्लेक्टर या लाइट न होने के कारण ये बाइक चालकों के लिए अदृश्य मौत साबित होते हैं।
- नियमों का उल्लंघन: पीडब्ल्यूडी और सड़क सुरक्षा नियमों के अनुसार, मुख्य मार्ग के किनारे कोई भी ठोस अवरोध नहीं होना चाहिए जो आवागमन में बाधक बने।
- प्रशासनिक चूक: लमतिया गांव के पास जहाँ यह हादसा हुआ, वहां बेंच की स्थिति सड़क के बेहद करीब बताई जा रही है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
घटना की सूचना मिलने पर गोला थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा ताकि मृत्यु के सही कारणों का पता चल सके। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या सड़क पर रोशनी की कमी या बेंच का गलत तरीके से रखा जाना इस हादसे का मुख्य कारण था।
निष्कर्ष
रामचंद्र की मौत केवल एक सांख्यिकीय सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा में बरती गई लापरवाही का परिणाम है। सड़क किनारे रखे गए वे बेंच, जो लोगों के बैठने के लिए बनाए गए थे, आज एक परिवार के लिए काल बन गए। प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल संज्ञान लेकर सड़कों के किनारे से ऐसे खतरनाक अवरोधों को हटाए या उन पर रिफ्लेक्टिव टेप लगवाए, ताकि भविष्य में कोई और ‘रामचंद्र’ अपनी जान न गंवाए।
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