गोरखपुर/नई दिल्ली: 06 फरवरी 2026

गोरखपुर के विकास और यहाँ के संस्थानों की गरिमा को लेकर सांसद रवि किशन शुक्ला हमेशा सजग रहते हैं। हाल ही में जब गोरखपुर एम्स समस्या का मामला उनके संज्ञान में आया, तो उन्होंने बिना विलंब किए इसे प्राथमिकता पर लिया। मामला एम्स के छात्रों की पढ़ाई और वहां प्रशासनिक व्यवस्थाओं में आ रही अड़चनों से जुड़ा था। छात्रों के शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए सांसद रवि किशन ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात की और एक मांग पत्र सौंपकर जल्द समाधान की अपील की।
क्या है असल ‘गोरखपुर एम्स समस्या’?
दरअसल, गोरखपुर एम्स में वर्तमान में लेखाकार (Accountant) के पद पर कोई स्थाई नियुक्ति नहीं है। इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद का अतिरिक्त प्रभार बायोकेमिस्ट्री विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर आकाश बंसल के पास है। प्रशासनिक कार्यों के बोझ के कारण विभागाध्यक्ष छात्रों को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे थे, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। इस गोरखपुर एम्स समस्या के कारण छात्रों और फैकल्टी दोनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
संसद रवि किशन का कड़ा रुख और समाधान का प्रयास
सांसद रवि किशन शुक्ला ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “छात्रों का भविष्य सर्वोपरि है और बच्चे देश का भविष्य हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि गोरखपुर एम्स समस्या का समाधान उनकी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि प्रशासनिक पदों पर स्थाई नियुक्तियां न होने से शैक्षणिक गुणवत्ता पर असर पड़ता है।
मुलाकात के दौरान सांसद ने एम्स के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं और लंबित मामलों पर भी विस्तार से चर्चा की। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने सांसद की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि इस गोरखपुर एम्स समस्या को जल्द से जल्द दूर किया जाएगा।
स्थाई लेखाकार की नियुक्ति से सुधरेगी स्थिति
स्वास्थ्य मंत्री से मिले आश्वासन के बाद यह तय माना जा रहा है कि एम्स में जल्द ही एक स्थाई लेखाकार तैनात कर दिया जाएगा। इससे डॉक्टर आकाश बंसल प्रशासनिक कार्यों से मुक्त होकर अपना पूरा समय छात्रों को पढ़ाने और शोध कार्यों में लगा सकेंगे। इस कदम से गोरखपुर एम्स समस्या का अंत होगा और एम्स की शैक्षणिक छवि और अधिक मजबूत होगी।
मोदी सरकार के सुशासन पर रवि किशन का बयान
मुलाकात के बाद रवि किशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की स्वास्थ्य सेवाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज देश में आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं गरीबों के लिए वरदान साबित हो रही हैं और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं हर वर्ग तक पहुँच रही हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर आने वाली किसी भी गोरखपुर एम्स समस्या को दूर करना सरकार की प्रतिबद्धता है।
एम्स के अन्य मामलों पर भी हुआ मंथन
सांसद ने केवल लेखाकार की नियुक्ति ही नहीं, बल्कि एम्स के अन्य बुनियादी ढांचों और सुविधाओं के विस्तार पर भी बात की। उन्होंने मंत्री से आग्रह किया कि एम्स गोरखपुर को पूर्वांचल का सबसे सशक्त मेडिकल हब बनाने के लिए जो भी आवश्यक कदम हों, उन्हें तेजी से उठाया जाए। यह गोरखपुर एम्स समस्या अन्य विभागों के समन्वय से जुड़ी थी, जिस पर मंत्री जी ने सकारात्मक रुख दिखाया है।
छात्रों में हर्ष की लहर
सांसद रवि किशन के इस सक्रिय हस्तक्षेप के बाद एम्स के छात्रों और अभिभावकों में खुशी की लहर है। छात्रों का मानना है कि जनप्रतिनिधि द्वारा गोरखपुर एम्स समस्या को सीधे केंद्रीय स्तर पर उठाने से अब उनकी पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आएगी।
निष्कर्ष
सांसद रवि किशन शुक्ला की इस पहल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि छात्रों और आम जनता के सच्चे अभिभावक हैं। गोरखपुर एम्स समस्या का समाधान होने से न केवल संस्थान की कार्यप्रणाली में सुधार होगा, बल्कि गोरखपुर मेडिकल हब के रूप में और अधिक विकसित होकर उभरेगा।
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