गोरखपुर/नई दिल्ली: 04 फरवरी 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘अंत्योदय’ की परिकल्पना अब धरातल पर पूरी तरह से उतर चुकी है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण गोरखपुर मंडल में देखने को मिल रहा है, जहाँ वन नेशन–वन राशन कार्ड (ONORC) योजना ने राशन वितरण की पूरी तस्वीर बदल दी है। हाल ही में लोकसभा सत्र के दौरान गोरखपुर के लोकप्रिय सांसद रवि किशन शुक्ला द्वारा पूछे गए एक महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर में केंद्र सरकार ने चौंकाने वाले और उत्साहजनक आंकड़े पेश किए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना न केवल सफल रही है, बल्कि इसने गोरखपुर के लाखों प्रवासियों के लिए ‘लाइफलाइन’ का काम किया है।

गोरखपुर में 23 लाख से अधिक डिजिटल लेनदेन
लोकसभा में प्रस्तुत किए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, गोरखपुर जिले में अब तक 23 लाख से अधिक राशन कार्ड ट्रांजैक्शन पोर्टेबिलिटी के माध्यम से दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा इस बात का पुख्ता सबूत है कि जिले की जनता ने तकनीक और सुशासन के इस मेल को खुले दिल से अपनाया है।
वन नेशन–वन राशन कार्ड योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब लाभार्थी को राशन लेने के लिए अपने मूल गांव या मोहल्ले की दुकान पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। वे अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से अपना हिस्सा प्राप्त कर सकते हैं।
प्रवासी श्रमिकों के लिए बना ‘सुरक्षा कवच’
गोरखपुर और पूर्वांचल का एक बड़ा हिस्सा रोजगार की तलाश में दिल्ली, मुंबई, सूरत और बेंगलुरु जैसे महानगरों में रहता है। पहले इन श्रमिकों को दूसरे राज्यों में राशन नहीं मिल पाता था, जिससे उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च हो जाता था।
केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने बताया कि इस योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश में अब तक 32.7 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का वितरण किया जा चुका है। इसमें से अकेले गोरखपुर जिले के लाभार्थियों ने 0.49 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का लाभ उठाया है। यह उन मजदूरों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो लॉकडाउन जैसी स्थितियों या सामान्य प्रवास के दौरान घर से दूर रहते हैं।

सांसद रवि किशन का लोकसभा में कड़ा रुख
अपने प्रश्न के माध्यम से इस विषय को उठाने वाले सांसद रवि किशन शुक्ला ने केंद्र सरकार के उत्तर पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री मोदी जी की सोच है कि देश का कोई भी गरीब भूखा न सोए। वन नेशन–वन राशन कार्ड योजना ने भ्रष्टाचार की जड़ों पर प्रहार किया है और बिचौलियों को खत्म कर दिया है। आज मेरा गोरखपुर का मजदूर भाई चाहे देश के किसी भी कोने में हो, वह अपना हक सम्मान के साथ मांग सकता है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह योजना Digital India और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प का एक जीवंत उदाहरण है, जिसने तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित की है।
पारदर्शिता और तकनीकी मजबूती
इस योजना की सफलता के पीछे बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और ई-पॉस (e-PoS) मशीनों का बड़ा हाथ है। केंद्र सरकार के अनुसार, देशभर में यह योजना बिना किसी तकनीकी या प्रशासनिक बाधा के सुचारू रूप से संचालित हो रही है। PDS (Public Distribution System) में पोर्टेबिलिटी लागू होने से राशन कार्ड धारकों को अब दुकानदारों की मनमानी से मुक्ति मिल गई है। यदि कोई दुकानदार खराब व्यवहार करता है या कम राशन देता है, तो कार्डधारक तुरंत अपनी दुकान बदल सकता है।
यूपी बना रोल मॉडल: योगी सरकार की तत्परता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने इस योजना को लागू करने में देश में अग्रणी भूमिका निभाई है। राज्य सरकार ने सभी राशन दुकानों को इंटरनेट से जोड़कर रियल-टाइम डेटा मॉनिटरिंग की व्यवस्था की है। गोरखपुर जिले में जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) के माध्यम से नियमित रूप से दुकानों की चेकिंग की जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पोर्टेबिलिटी का लाभ लेने वाले प्रवासियों को प्राथमिकता मिले।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि ONORC Scheme आने वाले समय में देश में भूख की समस्या (Hunger Index) को सुधारने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। गोरखपुर जैसे जिले, जहाँ से पलायन एक बड़ी सच्चाई है, वहां इस डिजिटल व्यवस्था ने सामाजिक सुरक्षा का एक मजबूत ढांचा तैयार कर दिया है।
निष्कर्ष
वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो तकनीक के माध्यम से सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाया जा सकता है। गोरखपुर के 23 लाख ट्रांजैक्शन केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उन 23 लाख परिवारों का भरोसा है जो अब जानते हैं कि उनका राशन कार्ड उनके साथ हर जगह चलेगा। सांसद रवि किशन द्वारा इस मुद्दे को लोकसभा में उठाना और केंद्र का सकारात्मक जवाब मिलना, क्षेत्र के विकास के प्रति प्रशासनिक और राजनीतिक सजगता को दर्शाता है।
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