बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 1 मार्च 2026
उत्तर प्रदेश की धार्मिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राम जानकी मार्ग इन दिनों विकास नहीं, बल्कि अराजकता और गंदगी के कारण चर्चा में है। गोला उपनगर के वार्ड संख्या 16, देवकली में इस राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे खुलेआम चल रही मांस और मछली की अवैध दुकानों ने न केवल राहगीरों का जीना मुहाल कर दिया है, बल्कि सरकारी संस्थानों के अस्तित्व को भी संकट में डाल दिया है। यहाँ नियमों को ताक पर रखकर राजकीय यूनानी चिकित्सालय के ठीक सामने मांस का कारोबार फल-फूल रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं में भारी रोष व्याप्त है।
राजकीय यूनानी चिकित्सालय के अस्तित्व पर संकट
हैरानी की बात यह है कि जहाँ एक ओर सरकार आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं देवकली स्थित राजकीय यूनानी चिकित्सालय के प्रवेश द्वार के सामने ही मुर्गा और बकरा काटकर मांस बेचा जा रहा है। अस्पताल आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य लाभ मिलने के बजाय वहाँ पसरी भीषण दुर्गंध और खून के अवशेषों के बीच से गुजरना पड़ता है। स्वच्छता के मानकों की सरेराह धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिससे अस्पताल का वातावरण पूरी तरह दूषित हो चुका है।
कुत्तों का जमावड़ा और हादसों को दावत
राम जानकी मार्ग एक उच्च गति वाला मार्ग है जहाँ चौबीसों घंटे वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। मांस की दुकानों से निकलने वाले अवशेषों और खून के कारण सड़क के किनारे दर्जनों आवारा कुत्तों का जमावड़ा लगा रहता है। ये कुत्ते अक्सर मांस के टुकड़ों के लिए आपस में लड़ते हुए अचानक तेज रफ्तार वाहनों के सामने आ जाते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कुत्तों के इस आतंक और अफरा-तफरी के कारण दुपहिया वाहन चालक अक्सर असंतुलित होकर गिर जाते हैं। यह स्थिति कभी भी किसी बड़े और जानलेवा हादसे का सबब बन सकती है।

आईजीआरएस और गोला पुलिस: कार्रवाई या केवल कागजी खानापूर्ति?
इस समस्या के समाधान के लिए जागरूक नागरिकों द्वारा मुख्यमंत्री के आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। लेकिन शिकायत के निस्तारण में गोला पुलिस की भूमिका पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि पुलिस ने पोर्टल पर जो रिपोर्ट लगाई है, उसमें अतिक्रमण हटवाने और बिक्री बंद कराने का दावा किया गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस द्वारा अपलोड की गई फोटो वास्तविक स्थल की नहीं है, बल्कि गुमराह करने के उद्देश्य से किसी अन्य स्थान की है। धरातल पर स्थिति यह है कि आज भी उसी स्थान पर धड़ल्ले से मांस और मछली की बिक्री जारी है। पुलिस की इस “हवा-हवाई” कार्रवाई ने स्थानीय प्रशासन की विश्वसनीयता को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
ग्रामीणों का आक्रोश और मिलीभगत के आरोप
देवकली के निवासियों का कहना है कि यह अवैध कारोबार स्थानीय प्रशासन और नगर पंचायत की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। राहगीरों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को उस रास्ते से पैदल गुजरने में भारी शर्मिंदगी और परेशानी का सामना करना पड़ता है। खुलेआम सड़क पर फैला खून और अवशेष न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत कर रहे हैं, बल्कि स्वच्छता अभियान को भी चिढ़ा रहे हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया: होली के बाद कार्रवाई का आश्वासन
इस गंभीर मुद्दे पर जब अधिशासी अधिकारी गोला, वैभव चौधरी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए लिखित शिकायत के आधार पर होली के त्यौहार के बाद आवश्यक और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, ग्रामीण इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं और तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि त्यौहार के दौरान माहौल शांतिपूर्ण और स्वच्छ बना रहे।
निष्कर्ष
राम जानकी मार्ग जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर इस तरह का अवैध अतिक्रमण और अस्वास्थ्यकर गतिविधियां शासन के “जीरो टॉलरेंस” दावों को चुनौती दे रही हैं। यदि समय रहते पुलिस और नगर पंचायत ने इन दुकानों को किसी उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया, तो यह लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना या संक्रामक बीमारी का कारण बन सकती है।













