गोरखपुर: 15 March 2026

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद अंतर्गत पिपराइच थाना क्षेत्र के सिंहोरिया गांव में एक पिता-पुत्री के पवित्र रिश्ते को कलंकित करने वाली घटना सामने आई है। जिस बेटी को पिता ने उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उसी पिता ने मोबाइल पर बात करने के विवाद में अपनी 23 वर्षीय जवान बेटी की हंसिया से हमला कर हत्या कर दी। इस पिपराइच मर्डर केस 2026 ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। पुलिस की सक्रियता और गहन पूछताछ के कारण उस ‘हादसे’ की परतें खुल गईं, जिसे परिवार ने एक दुर्घटना बताने की पूरी कोशिश की थी।
हादसा या हत्या: पुलिस को ऐसे हुआ संदेह
घटनाक्रम के अनुसार, 13 मार्च को पिपराइच पुलिस को सिंहोरिया गांव की एक युवती के गंभीर रूप से घायल होने और बाद में इलाज के दौरान बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मौत होने की सूचना मिली थी। उस समय परिजनों ने पुलिस को यह कहकर गुमराह करने का प्रयास किया कि युवती घर में काम करते समय अचानक हंसिया पर गिर गई थी, जिससे उसे गंभीर चोट लगी।
हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान पुलिस को घाव की प्रकृति और परिजनों के बयानों में काफी विरोधाभास मिला। पुलिस ने जब वैज्ञानिक तरीके से जांच शुरू की, तो पिपराइच मर्डर केस 2026 की खौफनाक सच्चाई सामने आ गई।
मोबाइल फोन बना विवाद और मौत की वजह
पुलिस की पूछताछ में यह बात सामने आई कि मृतक युवती अक्सर किसी युवक से मोबाइल पर बात किया करती थी। पिता कमलेश को यह कतई मंजूर नहीं था और इस बात को लेकर घर में अक्सर कलेश होता था।
- 13 मार्च की घटना: उस दिन भी युवती को फोन पर बात करते देख पिता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
- हमला: पहले पिता ने बेटी के साथ मारपीट की और फिर आपा खोते हुए घर में रखे धारदार हंसिया से उसके गले और शरीर के अन्य हिस्सों पर ताबड़तोड़ वार कर दिए।
- साक्ष्य मिटाने की कोशिश: जब बेटी लहूलुहान होकर गिर पड़ी, तो परिवार उसे अस्पताल ले गया और समाज व पुलिस के सामने इसे एक साधारण ‘दुर्घटना’ का रूप देने की साजिश रची।
आरोपी पिता गिरफ्तार: आला-ए-कत्ल बरामद
पिपराइच थाना पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर कड़ाई से पूछताछ की, तो आरोपी पिता कमलेश पुत्र रामबृक्ष ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त रक्त रंजित हंसिया भी बरामद कर लिया है। पिपराइच मर्डर केस में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है।
समाज के लिए एक चेतावनी
यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में बढ़ते ‘ईगो’ और संवादहीनता का परिणाम है।
- संवाद की कमी: मोबाइल के उपयोग को लेकर डांट-फटकार के बजाय यदि पिता-पुत्री के बीच संवाद होता, तो शायद यह जान बच सकती थी।
- कानून का डर: आरोपी ने न केवल हत्या की, बल्कि साक्ष्य छिपाकर कानून को चुनौती देने की कोशिश भी की।
- युवाओं की निजता: युवाओं के फैसलों पर हिंसक प्रतिक्रिया देना ऑनर किलिंग जैसी कुप्रथा को बढ़ावा देता है।












