बृजनाथ तिवारी
गोलाबाजार, गोरखपुर: 24 मार्च 2026

“स्वयं से पहले आप” (Not Me But You) के ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते हुए, गोरखपुर के गोला तहसील क्षेत्र स्थित बंशीचंद पी.जी. कॉलेज, चिलवा में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) का सात दिवसीय विशेष शिविर मंगलवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। सात दिनों तक चले इस गहन प्रशिक्षण, श्रमदान और बौद्धिक विमर्श ने स्वयंसेवकों के व्यक्तित्व में सेवा और समर्पण के नए बीज बोए हैं। समापन अवसर पर जहाँ एक ओर शिविर की उपलब्धियों पर गर्व था, वहीं दूसरी ओर सात दिनों के साथ का बिछोह स्वयंसेवकों की आँखों में नमी भी दे गया।
मुख्य अतिथि का संबोधन: “अनुशासन ही सफलता की कुंजी”
समापन समारोह के मुख्य अतिथि और महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राणा सत्यप्रकाश सिंह ने अपने संबोधन में स्वयंसेवकों के उत्साह की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय सेवा योजना का यह विशेष शिविर केवल सात दिनों की गतिविधि नहीं है, बल्कि यह अनुशासन और नेतृत्व की भावना को सीखने का एक सशक्त मंच है। यहाँ से सीखा गया हुनर जीवन के हर क्षेत्र में युवाओं को अग्रणी बनाएगा।”
डॉ. सिंह ने सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए आगे कहा, “इस शिविर का वास्तविक उद्देश्य स्वयंसेवकों को जाति-पाँति, ऊँच-नीच और संकीर्ण विचारधाराओं से ऊपर उठाना है। एक सच्चा स्वयंसेवक वही है जो निस्वार्थ भाव से समाज के अंतिम व्यक्ति की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहे।”
सामाजिक समरसता और नेतृत्व क्षमता का विकास
वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. ममता शर्मा ने शिविर के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों के भीतर छिपी हुई नेतृत्व क्षमता निखर कर सामने आती है। उन्होंने कहा, “सात दिनों के सामूहिक प्रवास ने स्वयंसेवकों में सामाजिक समरसता और सेवा भावना का जो संचार किया है, वह उन्हें एक बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक के रूप में स्थापित करेगा।”
सात दिनों की यात्रा: श्रमदान से संदेश तक
शिविर के दौरान स्वयंसेवकों ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया:
- श्रमदान: गोद लिए गए गाँवों में स्वच्छता अभियान चलाकर ग्रामीणों को सफाई के प्रति जागरूक किया।
- बौद्धिक सत्र: जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और डिजिटल साक्षरता जैसे विषयों पर विशेषज्ञों के व्याख्यान आयोजित किए गए।
- सांस्कृतिक संध्या: लोक गीतों और नाटकों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संदेश प्रसारित किए गए।
स्वागत एवं कुशल संचालन
कार्यक्रम की शुरुआत कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रोहित चंद के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने शिविर की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की और बताया कि किस प्रकार स्वयंसेवकों ने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सेवा के कार्यों को अंजाम दिया। उन्होंने सभी अतिथियों और सहयोगियों का आभार प्रकट किया।
पूरे कार्यक्रम का सफल और ओजस्वी संचालन संस्कृत के प्रवक्ता उमेश मिश्रा ने किया। उन्होंने अपनी काव्यमयी वाणी से स्वयंसेवकों में जोश भरा और विदाई के क्षणों को यादगार बना दिया।
पुरस्कार वितरण और विदाई
समापन अवसर पर शिविर के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं (मेंहदी, भाषण, पोस्टर मेकिंग) में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्वयंसेवकों और स्वयंसेविकाओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। ‘सर्वश्रेष्ठ स्वयंसेवक’ का चयन भी किया गया, जिसने पूरे सात दिनों तक अनुशासन और नेतृत्व का बेहतरीन उदाहरण पेश किया।
इस अवसर पर कॉलेज के समस्त शिक्षक, शिक्षिकाएं, गैर-शिक्षण कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में राष्ट्र गान के साथ शिविर का विधिवत समापन किया।
निष्कर्ष: विदाई नहीं, यह तो नई शुरुआत है
बंशीचंद पी.जी. कॉलेज, चिलवा के इस एनएसएस शिविर का समापन वास्तव में एक नई शुरुआत है। यहाँ से निकलने वाले स्वयंसेवक अब अपने-अपने क्षेत्रों में ‘समाज सेवा के दूत’ बनकर कार्य करेंगे। डॉ. राणा सत्यप्रकाश सिंह के मार्गदर्शन में युवाओं ने जो संकल्प लिया है, वह निश्चित रूप से एक समृद्ध और समरस समाज के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।
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