बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार/बेलघाट, गोरखपुर: 8 March 2026
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज पूरा विश्व नारी शक्ति की उपलब्धियों का उत्सव मना रहा है। इसी क्रम में गोरखपुर जनपद के बेलघाट क्षेत्र स्थित पंडित हरि सहाय पीजी कॉलेज जैती में संचालित राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सात दिवसीय विशेष शिविर के चतुर्थ दिन ‘एनएसएस महिला दिवस जागरूकता’ के तहत भव्य आयोजन किए गए। स्वयंसेवकों ने न केवल रैली के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया, बल्कि संगोष्ठी के जरिए महिला अधिकारों और उनकी सुरक्षा पर गंभीर चिंतन भी किया।
जागरूकता रैली: नारों से गूंजा जैती और आसपास का इलाका
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ एनएसएस के स्वयंसेवकों द्वारा एक विशाल जागरूकता रैली के साथ हुआ। यह रैली महाविद्यालय के शिविर स्थल से प्रारंभ हुई और जैती गांव के विभिन्न मोहल्लों, चौराहों और ग्रामीण क्षेत्रों से होकर गुजरी। रैली का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचल में महिलाओं के प्रति संकुचित विचारधारा को बदलना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रेरित करना था।
रैली के दौरान स्वयंसेवकों और स्वयंसेविकाओं के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर “नारी सम्मान, देश का अभिमान”, “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और “महिलाओं का सम्मान, समाज का उत्थान” जैसे प्रेरक संदेश लिखे थे। स्वयंसेवकों ने गगनभेदी नारों के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया कि एक प्रगतिशील राष्ट्र की कल्पना तब तक अधूरी है, जब तक महिलाओं को समान अधिकार और सुरक्षा प्रदान नहीं की जाती। ग्रामीणों ने भी इस पहल का स्वागत किया और स्वयंसेवकों के उत्साह की सराहना की।
संगोष्ठी: सशक्तिकरण के विविध आयामों पर चर्चा
रैली के पुनः शिविर स्थल पर पहुंचने के उपरांत एक बौद्धिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अजय सिंह एवं डॉ. कौशल कुमार पाठक ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने एनएसएस महिला दिवस जागरूकता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आज की नारी अब अबला नहीं, बल्कि सबला है।
डॉ. अजय सिंह ने कहा:
“आज महिलाएं अंतरिक्ष विज्ञान से लेकर राजनीति और खेल के मैदान तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। हमें यह समझना होगा कि महिलाओं का सशक्तिकरण केवल कानून बनाने से नहीं, बल्कि समाज की मानसिकता बदलने से होगा। शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता ही वह कुंजी है जो महिलाओं को समाज में बराबरी का हक दिला सकती है।“
डॉ. कौशल कुमार पाठक ने स्वयंसेवकों को प्रेरित करते हुए कहा कि एनएसएस का मूल मंत्र ‘स्वयं से पहले आप’ है, और इस मंत्र को सार्थक करने के लिए हमें सबसे पहले अपने घर और समाज में महिलाओं को सम्मान देना सीखना होगा। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर सरकारी योजनाओं (जैसे कन्या सुमंगला योजना) के प्रति लोगों को जागरूक करें।
युवाओं ने लिया नारी सम्मान का संकल्प
इस विशेष शिविर में भाग ले रहे छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। संगोष्ठी के दौरान कई स्वयंसेविकाओं ने भी अपने विचार रखे और आधुनिक समाज में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। एनएसएस महिला दिवस जागरूकता कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने एक सुर में संकल्प लिया कि वे समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या और लिंग भेद के खिलाफ आवाज उठाएंगे और नारी सुरक्षा के प्रति सदैव सजग रहेंगे।

वरिष्ठ शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति
महाविद्यालय के इस आयोजन को सफल बनाने में वरिष्ठ शिक्षकों और विशेषज्ञों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर डॉ. कमलकांत मिश्र, डॉ. सचिंद्र कुमार, डॉ. कृष्ण मोहन मौर्य और डॉ. प्रताप सिंह ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और स्वयंसेवकों के प्रयासों का मार्गदर्शन किया। शिक्षकों ने सामूहिक रूप से कहा कि इस प्रकार के ग्रामीण शिविरों से न केवल छात्रों का व्यक्तित्व विकास होता है, बल्कि समाज में भी सकारात्मक सोच का संचार होता है।

आभार और भविष्य की कार्ययोजना
कार्यक्रम के समापन सत्र में कार्यक्रम अधिकारी ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, गणमान्य व्यक्तियों एवं स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि सात दिवसीय शिविर के आगामी दिनों में भी स्वच्छता, स्वास्थ्य और साक्षरता जैसे विषयों पर विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। एनएसएस महिला दिवस जागरूकता के इस कार्यक्रम ने शिविर के उद्देश्यों को एक नई ऊंचाई प्रदान की है।
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