नई दिल्ली में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच आगामी मुक्त व्यापार (Free Trade) समझौते को एक ‘ऐतिहासिक मील का पत्थर’ करार देते हुए अपना दृढ़ समर्थन व्यक्त किया है। ब्रसेल्स (EU मुख्यालय) द्वारा ‘सभी व्यापार समझौतों की जननी’ के रूप में वर्णित इस डील को लेकर नॉर्वे का मानना है कि यह न केवल भारत और यूरोपीय संघ, बल्कि पूरे यूरोपीय क्षेत्र के साथ नई दिल्ली के आर्थिक संबंधों को एक नई गति प्रदान करेगा।
यद्यपि नॉर्वे स्वयं यूरोपीय संघ का हिस्सा नहीं है, लेकिन इसने भारत के साथ अपने स्वयं के आर्थिक संबंधों को पहले ही सुदृढ़ कर लिया है। एक विशेष साक्षात्कार में राजदूत स्टेनर ने स्पष्ट किया कि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में संरक्षणवाद के बजाय व्यापारिक बाधाओं को हटाना ही विकास का एकमात्र मार्ग है।

भारत-नॉर्वे और EFTA: एक मजबूत साझेदारी
राजदूत स्टेनर ने रेखांकित किया कि नॉर्वे, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) का सदस्य है। भारत और EFTA के बीच ‘व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता’ (TEPA) पहले से ही 1 अक्टूबर से प्रभावी हो चुका है।

*यह भविष्य में बदल सकता है*
- ऐतिहासिक मील का पत्थर: राजदूत ने TEPA को दोनों देशों के संबंधों में एक टर्निंग पॉइंट बताया।
- यूरोपीय एकीकरण: उनका मानना है कि भारत का यूरोपीय संघ (EU) के साथ व्यापारिक रूप से जुड़ना नॉर्वे के लिए भी सकारात्मक है, क्योंकि यूरोपीय संघ नॉर्वे का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
संरक्षणवाद के विरुद्ध नॉर्वे का स्टैंड
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ‘टैरिफ वार’ और संरक्षणवादी नीतियों के वैश्विक प्रभाव के बीच, नॉर्वे ने मुक्त व्यापार (Free Trade) का पक्ष लिया है। स्टेनर ने कहा कि नॉर्वे जैसी छोटी और खुली अर्थव्यवस्थाओं ने मुक्त व्यापार से अत्यधिक लाभ उठाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नॉर्वे एक नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था में विश्वास करता है जहाँ व्यापारिक बाधाओं को खड़ा करने के बजाय उन्हें गिराया जाना चाहिए।
तकनीक और शांति कूटनीति: AI और वैश्विक मुद्दे
भारत और नॉर्वे के बीच सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की तकनीक तक फैला हुआ है:
- AI समिट 2026: नॉर्वे के डिजिटलीकरण मंत्री अगले महीने भारत में होने वाले एआई (AI) शिखर सम्मेलन में एक बड़े प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। नॉर्वे, भारत के ‘एआई के लोकतंत्रीकरण’ के लक्ष्य का पुरजोर समर्थन करता है।
- नोबेल शांति पुरस्कार विवाद: राष्ट्रपति ट्रम्प के दावों पर स्पष्टीकरण देते हुए स्टेनर ने कहा कि नोबेल समिति एक स्वतंत्र निकाय है और इसके चयन में नॉर्वे सरकार की कोई भूमिका नहीं होती।
- गाजा और यूक्रेन: नॉर्वे ने शांति के सभी वास्तविक प्रयासों का समर्थन किया है, हालांकि उन्होंने ट्रम्प के प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पर स्पष्टता मांगी है कि यह संयुक्त राष्ट्र (UN) की संरचनाओं के साथ कैसे तालमेल बिठाएगा।
पीएम मोदी की संभावित नॉर्वे यात्रा
द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य पर प्रकाश डालते हुए राजदूत ने पुष्टि की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस वर्ष के अंत में ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ (India-Nordic Summit) के लिए नॉर्वे जाने की संभावना है। यह यात्रा वैश्विक उथल-पुथल के समय में नई दिल्ली और ओस्लो के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक सामंजस्य को और मजबूत करेगी।
निष्कर्ष: वैश्विक व्यापार का नया अध्याय

भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाला यह व्यापारिक समझौता वैश्विक अर्थव्यस्था के लिए एक नई दिशा तय करेगा। नॉर्वे का समर्थन यह दर्शाता है कि विकसित यूरोपीय देश भारत को एक विश्वसनीय और प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में देख रहे हैं। यदि यह समझौता सफल होता है, तो यह मुक्त व्यापार (Free Trade) के सिद्धांतों को पुनः जीवित करेगा और संरक्षणवाद की बढ़ती लहर को संतुलित करने में मदद करेगा।
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