बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 06 फरवरी 2026

बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और शारीरिक विकास के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘स्वास्थ्य मिशन’ को गति देने के लिए गोरखपुर के गोला तहसील में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। शुक्रवार को गोला तहसील परिसर में उप जिलाधिकारी (एसडीएम) अमित कुमार जायसवाल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान (National Deworming Campaign) को सफल बनाने हेतु एक उच्च स्तरीय बैठक सम्पन्न हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के 1 वर्ष से लेकर 19 वर्ष तक के बच्चों को कृमि (कीड़ों) से मुक्त करना और उन्हें स्वस्थ भविष्य प्रदान करना है।
अभियान का पूरा शेड्यूल: कब और क्या होगा?
बैठक के दौरान एसडीएम अमित कुमार जायसवाल ने राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के तहत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि यह अभियान तीन चरणों में प्रभावी रूप से चलाया जाएगा:
- 10 फरवरी: मुख्य कृमि मुक्ति दिवस, जिस दिन सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर दवा दी जाएगी।
- 13 फरवरी: माप-अप राउंड (मॉप-अप दिवस), उन बच्चों के लिए जो किसी कारणवश 10 तारीख को दवा नहीं ले पाएंगे।
- 16 से 27 फरवरी: एमआर (MR) अभियान का संचालन किया जाएगा।
सभी स्कूलों और मदरसों में अनिवार्य होगी दवा
एसडीएम ने सख्त निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के तहत कक्षा 1 से कक्षा 5 तक के सभी सरकारी, गैर-सरकारी, निजी स्कूलों और मदरसों में बच्चों को एल्बेंडाजोल (Albendazole) की एक गोली दी जाएगी। इस दवा का सेवन बच्चों के पेट के कीड़ों को खत्म करने के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि कृमि संक्रमण के कारण बच्चों में खून की कमी (एनीमिया) और कुपोषण जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो जाती हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 10 और 13 फरवरी को क्षेत्र के सभी विद्यालय अनिवार्य रूप से खुले रहेंगे। साथ ही, शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करें ताकि कोई भी बच्चा इस महत्वपूर्ण दवा से वंचित न रहे।
अभिभावकों से अपील: स्वास्थ्य के प्रति बनें सजग
बैठक के माध्यम से राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान को सफल बनाने के लिए अभिभावकों से भी भावुक अपील की गई है। अधिकारियों ने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और सुनिश्चित करें कि उनका बच्चा स्कूल में दवा जरूर खाए। कृमि मुक्त होने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ती है और उनका मानसिक व शारीरिक विकास तेजी से होता है।
प्रशासनिक अमले की उपस्थिति और संचालन
इस तहसील स्तरीय टास्क फोर्स बैठक का सफल संचालन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोला के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ए. एन. ठाकुर द्वारा किया गया। बैठक में विकास और स्वास्थ्य विभाग के कई प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं:
- गोला बी.डी.ओ. दिवाकर सिंह
- खंड शिक्षा अधिकारी उदय शंकर राय
- बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO)
- बी.सी.पी.एम. पूनम मौर्य
- फील्ड मॉनिटर दिनेश यादव
- उरुवा, डेरवा और बड़हलगंज के प्रतिनिधि।
इन सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान की सघन निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि दवा का वितरण पारदर्शी तरीके से हो।
क्यों जरूरी है कृमि मुक्ति?
विशेषज्ञों के अनुसार, कृमि संक्रमण बच्चों के शरीर में पोषक तत्वों को अवशोषित कर लेते हैं। इससे बच्चे थकावट महसूस करते हैं और उनकी पढ़ाई में एकाग्रता कम हो जाती है। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के माध्यम से दी जाने वाली एल्बेंडाजोल की गोली पूरी तरह सुरक्षित है और इसे चबाकर खाना होता है। यह अभियान न केवल बच्चों को स्वस्थ बनाता है बल्कि आने वाली पीढ़ी को कुपोषण मुक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
नियमित मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग
एसडीएम ने फील्ड स्टाफ को निर्देश दिया है कि अभियान के दौरान हर दिन की रिपोर्ट तहसील मुख्यालय पर जमा की जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित विभाग के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान की सफलता के लिए शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया है।
निष्कर्ष
गोला तहसील में आयोजित यह बैठक इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय प्रशासन बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक स्वस्थ समाज की नींव है। यदि गोला क्षेत्र के सभी नागरिक और अभिभावक मिलकर सहयोग करेंगे, तो निश्चित रूप से क्षेत्र का हर बच्चा कृमि मुक्त और स्वस्थ बनेगा।
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