बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 14 फरवरी 2026
भारत को संक्रामक बीमारियों से मुक्त करने के राष्ट्रीय संकल्प के तहत गोरखपुर के गोला तहसील क्षेत्र में एक बड़ा स्वास्थ्य अभियान शुरू होने जा रहा है। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस एवं खसरा-रूबेला (MR) उन्मूलन अभियान के तहत आगामी 16 फरवरी से 27 फरवरी के बीच विशेष टीकाकरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह अभियान क्षेत्र के सभी सरकारी स्कूलों, निजी स्कूलों, गैर सहायता प्राप्त विद्यालयों और मदरसों में चलाया जाएगा, ताकि 5 से 10 वर्ष तक की आयु के हर बच्चे को सुरक्षा कवच प्रदान किया जा सके।

अभियान की रूपरेखा और तिथियां
उप जिलाधिकारी (SDM) गोला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोला के अधीक्षक डॉ. अमरेंद्र नाथ ठाकुर ने संयुक्त रूप से इस अभियान की विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि यह विशेष टीकाकरण नियमित टीकाकरण दिवसों (बुधवार और शनिवार) को छोड़कर अन्य दिनों यानी सोमवार, मंगलवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार को संचालित किया जाएगा।
इस समय सारणी को इसलिए तैयार किया गया है ताकि नियमित टीकाकरण भी प्रभावित न हो और स्कूल जाने वाले बच्चों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा सके। प्रशासन का लक्ष्य कक्षा 1 से कक्षा 5 तक के शत-प्रतिशत बच्चों को कवर करना है।

क्यों जरूरी है खसरा और रूबेला का टीका?
डॉ. अमरेंद्र नाथ ठाकुर ने बताया कि खसरा (Measles) और रूबेला (Rubella) अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारियां हैं।
- खसरा (Measles): यह छोटे बच्चों के लिए जानलेवा हो सकता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, नाक से पानी आना और पूरे शरीर पर लाल दाने निकलना शामिल है। समय पर उपचार और टीकाकरण न होने से यह निमोनिया और मस्तिष्क में सूजन जैसी जटिलताएं पैदा कर सकता है।
- रूबेला (Rubella): इसे ‘तीन दिन की बीमारी’ भी कहा जाता है। इसके लक्षण खसरे से मिलते-जुलते होते हैं। यदि कोई गर्भवती महिला इसकी चपेट में आती है, तो यह गर्भस्थ शिशु के लिए अत्यंत घातक हो सकता है, जिसे ‘कंजनाइटल रूबेला सिंड्रोम’ कहा जाता है।
स्कूलों और मदरसों के लिए अपील
प्रशासन ने क्षेत्र के सभी प्रधानाचार्यों और मौलवियों से विशेष अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि विद्यालय स्तर पर अभिभावकों की बैठक (PTM) बुलाकर उन्हें इस टीकाकरण अभियान के महत्व के बारे में सूचित किया जाए। 5 से 10 वर्ष की आयु के बच्चों के अभिभावकों को प्रेरित किया जाए कि वे बिना किसी डर या भ्रम के अपने बच्चों का टीकाकरण कराएं।
डॉ. ठाकुर ने स्पष्ट किया कि यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्रमाणित है। यह बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर उन्हें भविष्य की दिव्यांगता और अकाल मृत्यु से बचाता है।
अधिकारियों का संदेश: “उन्मूलन में करें सहयोग”
एसडीएम गोला ने कहा कि समाज से खसरा और रूबेला को जड़ से मिटाने के लिए यह एक सामूहिक जिम्मेदारी है। टीकाकरण केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही बच्चों के स्वास्थ्य के लिए भारी पड़ सकती है, इसलिए इस विशेष अवसर का लाभ उठाएं और अपने बच्चों को प्रतिरक्षित करें।
टीकाकरण के दौरान सावधानियां
स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण के लिए कुछ आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं:
- बच्चे को खाली पेट टीका न लगवाएं।
- यदि बच्चा पहले से बहुत बीमार है, तो स्वास्थ्य कर्मी को इसकी जानकारी दें।
- टीकाकरण के बाद बच्चे को कम से कम 30 मिनट तक स्वास्थ्य कर्मी की निगरानी में रहने दें।
निष्कर्ष
गोला क्षेत्र में शुरू हो रहा यह टीकाकरण अभियान स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। खसरा और रूबेला जैसी जानलेवा बीमारियों से मुक्ति पाने का यही एकमात्र रास्ता है। प्रशासन की सक्रियता और जनता का सहयोग मिलकर गोला को इन बीमारियों से मुक्त बना सकता है। 16 फरवरी से शुरू हो रहे इस महाअभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें और देश के भविष्य को सुरक्षित बनाएं।
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