गोलाबाजार, गोरखपुर: 13 फरवरी 2026
शिक्षा की वह दहलीज जहाँ कभी नन्हे-नन्हे कदमों ने अपनी पहचान बनाना शुरू किया था, आज उसी दहलीज से विदा होने का वक्त आ गया। गोला तहसील मुख्यालय के समीप स्थित एल.पी.एम. पब्लिक स्कूल के परिसर में शुक्रवार को कक्षा 12वीं के छात्र-छात्राओं के लिए एक भव्य और भावुक ‘फेयरवेल सह गुडलक’ समारोह का आयोजन किया गया। यह केवल एक औपचारिक विदाई नहीं थी, बल्कि पिछले 15 वर्षों के उस सफर का उत्सव था, जिसने नन्हे बच्चों को भविष्य के जिम्मेदार नागरिक के रूप में गढ़ा है।

परंपरा और आधुनिकता के बीच स्वागत
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रबंधक भागीरथी प्रसाद स्वर्णकार और प्रबंध निदेशक अमरनाथ वर्मा द्वारा दीप प्रज्वलन और छात्रों को तिलक लगाकर किया गया। ग्यारहवीं कक्षा के जूनियर छात्रों ने अपने सीनियर्स का स्वागत किसी उत्सव की तरह किया। फूलों की वर्षा और इमोजी बैज लगाकर किए गए इस स्वागत ने माहौल को खुशनुमा बना दिया। पूरे परिसर में ‘कल हो न हो’ और ‘पुराने दिन’ जैसे गीतों की धुनों ने यादों का एक ऐसा सिलसिला शुरू किया, जिसने हर आँख को नम कर दिया।
नर्सरी से 12वीं तक का भावनात्मक सफर
समारोह के दौरान उन दिनों की यादें साझा की गईं जब ये छात्र करीब डेढ़ दशक पहले अपने माता-पिता की उंगली थामे, रोते-सिसकते नर्सरी कक्षा में दाखिल हुए थे। शिक्षकों ने याद किया कि कैसे उन शरारती बच्चों ने आज आत्मविश्वास से लबरेज युवाओं का रूप ले लिया है। विद्यालय के प्रबंधक भागीरथी स्वर्णकार ने कहा, “एक युग का अंत हो रहा है। हमने आपको बढ़ते, गिरते और फिर संभलते देखा है। आज जब आप समाज में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने निकल रहे हैं, तो हमें गर्व है कि आप हमारे संस्कार लेकर जा रहे हैं।”

शिक्षकों का मार्गदर्शन: “अपनी जड़ों से जुड़े रहें”
प्रधानाचार्या एकता वर्मा ने ममतापूर्ण संबोधन में छात्रों को जीवन की नई चुनौतियों के लिए तैयार रहने का मंत्र दिया। उन्होंने कहा, “यहाँ से मिली सीख ही आपका असली हथियार है। आप दुनिया के किसी भी कोने में रहें, अपनी जड़ों और संस्कारों को कभी न भूलें। नेतृत्व और ईमानदारी का जो बीज यहाँ बोया गया है, उसे अब विशाल वृक्ष बनाना आपकी जिम्मेदारी है।”
वहीं, विद्यालय के एच.ओ.डी. रेवरेण्ट डी.के. सिंह भावुक होकर बोले, “मुझे याद है जब आप नर्सरी में अपने माता-पिता का हाथ छोड़ने को तैयार नहीं थे, और आज आप पूरे आत्मविश्वास के साथ हमारा हाथ छोड़कर दुनिया जीतने निकल रहे हैं। यह एक गुरु के लिए सबसे सुखद अनुभूति है।”
सम्मान और पुरस्कारों की झड़ी
इस विदाई समारोह में केवल यादों का दौर ही नहीं चला, बल्कि मेधावी और अनुशासित छात्रों को प्रोत्साहित भी किया गया। विभिन्न श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को स्मृति चिन्ह और पट्टिका देकर सम्मानित किया गया। 11वीं के छात्रों ने मनोहारी नृत्य और गीतों की प्रस्तुति देकर अपने बड़े भाई-बहनों को शुभकामनाएं दीं। जूनियर छात्रों ने ‘स्मृति’ के रूप में अपने सीनियर्स को विशेष उपहार भेंट किए।

भविष्य के ‘कर्णधारों’ का उत्साह
विद्यालय के प्रबंध निदेशक अमरनाथ वर्मा ने विश्वास जताया कि ये छात्र भविष्य के डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश और विद्यालय का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने अनुशासन और चरित्र निर्माण पर जोर देते हुए कहा कि कठिन समय में इंसान का चरित्र ही उसकी पहचान बनता है। शिक्षकों ने सभी छात्र-छात्राओं को तिलक लगाकर और आशीर्वाद देकर सुनहरे भविष्य की मंगलकामना की।
समारोह में उपस्थित गणमान्य
इस यादगार अवसर पर विद्यालय के समन्वयक मनीष यादव और सह-समन्वयक अनूप सिंह सहित वरिष्ठ शिक्षक मनोज पाण्डेय, शैलेश कुमार त्रिपाठी, दुर्गेश धर दुबे, वी.के. राय, सत्येन्द्र मौर्य, के.के. भट्ट, विनय मिश्रा, रमेश कुमार यादव, मुकेश तिवारी, हरेन्द्र तिवारी, शिव शंकर पंडित, अजय जायसवाल, मनोज मिश्रा, पी.पी. पासवान, शुभम मिश्रा, दिनेश मिश्रा, अर्जुन प्रजापति, विनय सिंह, और सुमैला अख्तर उपस्थित रहे। समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं ने छात्रों को गले लगाकर विदा किया।
निष्कर्ष
एल.पी.एम. पब्लिक स्कूल का यह विदाई समारोह छात्रों के दिलो-दिमाग पर एक अमिट छाप छोड़ गया। क्लासरूम की वो शरारतें, लंच बॉक्स साझा करना और शिक्षकों की प्यार भरी डांट अब यादों के संदूक में बंद हो गईं। लेकिन विद्यालय से मिले संस्कार और शिक्षा की ज्योति इन छात्रों के जीवन पथ को सदैव आलोकित करती रहेगी।
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