गोलाबाजार, गोरखपुर: 13 फरवरी 2026
गोरखपुर के गोला थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम भूपगढ़ में जमीन के टुकड़े को लेकर उपजा विवाद अंततः हिंसक झड़प में बदल गया। पंचायत के बहाने बुलाकर एक महिला और उसके परिवार पर जानलेवा हमले का मामला सामने आया है। इस घटना में पीड़िता की तहरीर पर गोला पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए चार नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया है। घटना के बाद से ही गांव में दो पक्षों के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है।

क्या है पूरा विवाद?
मिली जानकारी के अनुसार, भूपगढ़ निवासिनी भामा देवी पत्नी रामसिंगार गौड़ का अपने ही देवर रमेश गौड़ के साथ काफी समय से जमीनी विवाद चल रहा है। भामा देवी ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि बुधवार, 11 फरवरी को इस विवाद को सुलझाने के लिए पंचायत की बात कही गई थी। आरोपी पक्ष ने प्रस्ताव रखा कि ग्राम प्रधान के दरवाजे पर बैठकर मामले का निपटारा किया जाएगा।
पंचायत के बहाने हमला
पीड़िता का आरोप है कि जैसे ही वह पंचायत के लिए आगे बढ़ी, वहां पहले से घात लगाए बैठे रमेश गौड़, गुलाब राय, सीमा राय और शिवकुमारी ने उन पर हमला कर दिया। आरोपियों ने लाठी-डंडों, लात और मुक्कों से भामा देवी को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। जब शोर सुनकर भामा देवी के पति रामसिंगार और पुत्र अभिषेक बीच-बचाव करने पहुंचे, तो दबंगों ने उन्हें भी नहीं बख्शा। हमले में पति-पत्नी और पुत्र तीनों को गंभीर चोटें आई हैं। आरोपियों ने जाते-जाते पीड़ित परिवार को भद्दी-भद्दी गालियां दीं और भविष्य में जान से मारने की धमकी भी दी।
पुलिस की कार्रवाई: चार पर एफआईआर
घटना के तुरंत बाद पीड़िता ने गोला थाने पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। थानाध्यक्ष गोला ने मामले की गंभीरता और चोटों के निशान को देखते हुए तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए। पुलिस ने मुख्य आरोपी रमेश गौड़ सहित चार लोगों के खिलाफ निम्नलिखित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है:
- धारा 115(2): स्वेच्छा से चोट पहुँचाने के लिए सजा।
- धारा 352: शांति भंग करने के इरादे से अपमान करना।
- धारा 351(3): आपराधिक धमकी (गंभीर रूप)।
- धारा 324(4): संपत्ति या अन्य विवाद में घातक हथियारों का प्रयोग।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते जमीनी विवाद
भूपगढ़ की यह घटना कोई इकलौती मिसाल नहीं है। गोला और आसपास के क्षेत्रों में जमीनी विवाद के कारण हिंसक झड़पें आम होती जा रही हैं। अक्सर परिवार के भीतर ही पैतृक संपत्ति को लेकर भाइयों और रिश्तेदारों के बीच तकरार होती है।
- राजस्व विभाग की भूमिका: जानकारों का कहना है कि यदि राजस्व विभाग और हल्का लेखपाल समय रहते पैमाइश कर विवाद का निपटारा कर दें, तो ऐसी मारपीट की नौबत नहीं आएगी।
- सामाजिक प्रभाव: छोटे-छोटे विवादों में मुकदमेबाजी के कारण ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति और आपसी रिश्तों पर गहरा बुरा असर पड़ता है।
पुलिस की चेतावनी: कानून हाथ में न लें
थानाध्यक्ष गोला ने स्पष्ट किया है कि किसी भी विवाद को सुलझाने का तरीका कानून सम्मत होना चाहिए। मारपीट और दबंगई करने वालों के खिलाफ पुलिस कड़ा रुख अपनाएगी। फिलहाल, पुलिस की एक टीम आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। घायलों का चिकित्सकीय परीक्षण (मेडिकल) कराया गया है और रिपोर्ट के आधार पर विवेचना को आगे बढ़ाया जा रहा है।
निष्कर्ष
भूपगढ़ में हुआ यह जमीनी विवाद एक बार फिर गांव की राजनीति और पारिवारिक कलह को उजागर करता है। पुलिस की त्वरित एफआईआर ने पीड़िता को न्याय की उम्मीद तो दी है, लेकिन सवाल वही है क्या समाज में संवाद का स्थान अब लाठियों ने ले लिया है? फिलहाल, गांव के प्रबुद्ध जनों ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है ताकि माहौल और न बिगड़े।
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