बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 17 March 2026

शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास का माध्यम है। इसी उद्देश्य के साथ गोला क्षेत्र के प्रतिष्ठित लक्ष्मी प्रसाद मेमोरियल पब्लिक स्कूल में मंगलवार को एक भव्य सुलेख (Handwriting) प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। सुलेख प्रतियोगिता गोला 2026 के इस मंच पर एलकेजी से लेकर कक्षा आठ तक के छात्र-छात्राओं ने अपनी सुंदर लिखावट और रचनात्मकता का अद्भुत प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता का मुख्य लक्ष्य डिजिटल युग में लुप्त होती जा रही हस्तलेखन कला के प्रति बच्चों में रुचि जगाना और उनकी एकाग्रता को बढ़ाना रहा।
वर्गवार मुकाबला: नन्हें अक्षरों से लेकर गंभीर अनुच्छेदों तक

प्रतियोगिता को छात्रों की आयु और कक्षा के अनुसार विभिन्न वर्गों में विभाजित किया गया था, ताकि निष्पक्ष मूल्यांकन हो सके:
- प्राथमिक वर्ग (LKG से UKG): नन्हे-मुन्ने बच्चों ने रंगीन पेंसिल और कलम से वर्णमाला के अक्षरों को बेहद खूबसूरती से कागज़ पर उकेरा।
- कनिष्ठ वर्ग (कक्षा 1 से 5): इन छात्रों ने सुंदर शब्दों और वाक्यों के माध्यम से अपनी लेखन कला का परिचय दिया।
- वरिष्ठ वर्ग (कक्षा 6 से 8): बड़े विद्यार्थियों के लिए अनुच्छेद लेखन की चुनौती रखी गई थी, जहाँ उन्होंने न केवल सुंदर लिखावट बल्कि अपनी रचनात्मक सोच और भाषा प्रवाह का भी प्रदर्शन किया।
सुलेख: धैर्य और अनुशासन का प्रतीक
विद्यालय के प्रबंधक अमरनाथ वर्मा ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने सुलेख के महत्व पर प्रकाश डाला:
“सुंदर लेखन केवल कागज़ पर शब्द नहीं हैं, बल्कि यह बच्चे के धैर्य, अनुशासन और एकाग्रता का प्रतिबिंब है। जो बच्चा अपने अक्षरों को सहेज कर लिखना सीख जाता है, वह जीवन के लक्ष्यों के प्रति भी उतना ही गंभीर और एकाग्र रहता है।”
व्यक्तित्व का आईना है सुंदर लेखन: प्रधानाचार्य रेखा वर्मा
प्रधानाचार्य रेखा वर्मा ने कहा कि आज के कंप्यूटर और मोबाइल के दौर में कलम से लिखने का अभ्यास कम होता जा रहा है। ऐसे में सुलेख प्रतियोगिता गोला 2026 जैसे आयोजन बच्चों की सोच को स्पष्टता प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि सुंदर लिखावट से न केवल परीक्षाओं में अच्छे अंक मिलते हैं, बल्कि यह आत्मविश्वास भी बढ़ाता है।
शिक्षकों का मार्गदर्शन और प्रोत्साहन
विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक आलोक शुक्ला, मनीष पांडेय और विवेक दुबे ने भी छात्रों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि नियमित अभ्यास से किसी भी कला में निपुणता हासिल की जा सकती है। शिक्षकों ने छात्रों को प्रतिदिन कम से कम एक पेज सुलेख लिखने के लिए प्रेरित किया, ताकि उनका मानसिक विकास और भाषाई पकड़ मजबूत हो सके।
पुरस्कार वितरण: खिले बच्चों के चेहरे
प्रतियोगिता के अंत में परिणाम घोषित किए गए। प्रत्येक वर्ग से प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले मेधावियों को पुरस्कृत किया गया। विजेताओं को प्रोत्साहन स्वरूप स्कूल बैग, लंच बॉक्स और वॉटर बॉटल जैसे उपयोगी उपहार भेंट किए गए। पुरस्कार पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे और उनमें भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए एक नया उत्साह देखने को मिला।
अभिभावकों की उपस्थिति और सराहना
इस अवसर पर बड़ी संख्या में अभिभावक भी मौजूद रहे, जिन्होंने विद्यालय की इस पहल की सराहना की। उनका मानना था कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों को मोबाइल की दुनिया से निकालकर कलात्मक कार्यों की ओर मोड़ती हैं। कार्यक्रम के सफल संचालन में विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।












