राम आशीष तिवारी की रिपोर्ट।
खजनी, गोरखपुर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद की खजनी तहसील इन दिनों भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों से सुलग रही है। पिछले एक माह से तहसील परिसर में अधिवक्ताओं का अनवरत धरना प्रदर्शन जारी है। विवाद के केंद्र में हैं वर्तमान तहसीलदार ध्रुवेश कुमार सिंह, जिनके विरुद्ध खजनी बार एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है। तहसीलदार भ्रष्टाचार विरोध के इस आंदोलन ने अब विकराल रूप ले लिया है, जिससे तहसील के न्यायिक और राजस्व कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए हैं। अधिवक्ताओं का आरोप है कि तहसीलदार न केवल नियम विरुद्ध कार्य कर रहे हैं, बल्कि बिना ‘सुविधा शुल्क’ के फाइलों को आगे नहीं बढ़ाते।

विवाद की जड़: तिथि से पहले आदेश और ‘सुविधा शुल्क’ का खेल
अधिवक्ताओं के आक्रोश की मुख्य वजह एक मुकदमे में तहसीलदार द्वारा अपनाई गई संदिग्ध कार्यप्रणाली है। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, एक महत्वपूर्ण मुकदमे में सुनवाई की नियत तिथि 23 जनवरी तय की गई थी। लेकिन तहसीलदार ध्रुवेश कुमार सिंह ने नियमों को ताक पर रखते हुए एक दिन पूर्व यानी 22 जनवरी को ही उस फाइल पर आदेश पारित कर दिया। यह घटनाक्रम न केवल न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन है, बल्कि भ्रष्टाचार की ओर भी सीधा इशारा करता है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि यह कोई इकलौता मामला नहीं है। तहसीलदार भ्रष्टाचार विरोध की आग इसलिए धधक रही है क्योंकि तहसीलदार कार्यालय में बिना रिश्वत के कोई आदेश पारित नहीं हो रहे हैं। वादकारियों के हितों की अनदेखी और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा ने अधिवक्ताओं को न्यायिक कार्यों से विरक्त होने पर मजबूर कर दिया है।

एक माह से जारी धरना: आश्वासन की पोटली से बढ़ता गुस्सा
खजनी तहसील में चल रहा यह धरना प्रदर्शन आज (21 फरवरी) पूरे एक माह की अवधि पार कर गया है। इस दौरान अधिवक्ताओं ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन प्रशासनिक चुप्पी ने उनके गुस्से को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है।
- 7 फरवरी को एडीएम प्रशासन से मुलाकात: जब एडीएम प्रशासन निरीक्षण के लिए खजनी पहुँचे, तो अधिवक्ताओं ने उन्हें लिखित शिकायत सौंपी।
- एसडीएम को अल्टीमेटम: चार दिन पूर्व एसडीएम खजनी राजेश प्रताप सिंह को लिखित ज्ञापन देकर 21 फरवरी के समाधान दिवस से पहले तहसीलदार के स्थानांतरण की मांग की गई थी।
बावजूद इसके, विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न होने से अधिवक्ताओं ने आज ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ का बहिष्कार कर मुख्य गेट पर जोरदार प्रदर्शन किया।
संपूर्ण समाधान दिवस पर हंगामा और ‘मुर्दाबाद’ के नारे
शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर खजनी तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के.के. सिंह के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने तहसील के मुख्य द्वार को घेर लिया। धरना स्थल पर वरिष्ठ अधिवक्ता सत्य प्रकाश उर्फ मालू लाल श्रीवास्तव, जयनाथ दुबे, विनोद पांडे, शशि शेखर सिंह और रामप्रीत यादव ने संबोधित करते हुए तहसीलदार के ‘काले कारनामों’ का कच्चा चिट्ठा खोला।
अधिवक्ताओं ने तहसीलदार भ्रष्टाचार विरोध को और प्रखर करते हुए पूरे परिसर में “तहसीलदार मुर्दाबाद”, “भ्रष्टाचारी वापस जाओ” और “स्थानांतरण नहीं तो काम नहीं” के गगनभेदी नारे लगाए। प्रदर्शन के बाद अधिवक्ताओं का जत्था सीधे बैठक हॉल में पहुँचा, जहाँ उप जिलाधिकारी (एसडीएम) और क्षेत्राधिकारी (सीओ) समाधान दिवस की अध्यक्षता कर रहे थे। वहां अधिवक्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक तहसीलदार ध्रुवेश कुमार सिंह का स्थानांतरण नहीं होता, आंदोलन थमेगा नहीं।
सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया समाधान दिवस?
अधिवक्ताओं के इस प्रदर्शन ने तहसील स्तरीय बैठकों की पोल भी खोल दी है। पिछले तहसील दिवस में एडीएम प्रशासन ने कई अधिकारियों के अनुपस्थित होने पर नोटिस जारी किया था, लेकिन उसका कोई असर धरातल पर नहीं दिखा। आज भी संपूर्ण समाधान दिवस में अधिकांश तहसील स्तरीय अधिकारी नदारद थे। केवल राजस्व निरीक्षक, लेखपाल और पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारी ही उपस्थित थे। ऐसे में सवाल उठता है कि जब अधिकारी ही मौजूद नहीं रहेंगे, तो मुख्यमंत्री के ‘जनसुनवाई’ अभियान का क्या अर्थ रह जाता है?
वादकारियों की बढ़ती मुश्किलें
तहसीलदार भ्रष्टाचार विरोध के चलते पिछले 30 दिनों से खजनी तहसील में मुकदमों की सुनवाई नहीं हो रही है। दूर-दराज के गांवों से आए गरीब किसान और वादकारी रोज बैरंग वापस लौट रहे हैं। तारीखों पर तारीखें लग रही हैं, लेकिन न्यायिक पीठ खाली है। अधिवक्ताओं का कहना है कि वे वादकारियों के हित में ही यह लड़ाई लड़ रहे हैं, क्योंकि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने से बेहतर है कि व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन हो।
निष्कर्ष: प्रशासन के पाले में गेंद
खजनी तहसील बार एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि अब समझौता केवल तहसीलदार के स्थानांतरण के साथ ही होगा। तहसीलदार भ्रष्टाचार विरोध का यह मामला अब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक पहुँचने की तैयारी में है। यदि जिला प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह आंदोलन जनपद स्तर पर भी फैल सकता है।
फिलहाल, खजनी तहसील में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे तहसीलदार पर गाज गिराता है या अधिवक्ताओं के इस आक्रोश को और बढ़ने देता है।
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