बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 1 मार्च 2026
गोरखपुर जनपद के गोला थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम डड़वापार में रविवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब बच्चों के बीच खेलने के दौरान हुआ एक मामूली विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। कंचा खेलने जैसी छोटी सी बात पर शुरू हुई तकरार ने इतना उग्र रूप ले लिया कि गांव के बड़े आपस में भिड़ गए और जमकर मारपीट हुई। इस घटना में एक पक्ष को गंभीर चोटें आई हैं। पीड़ित की लिखित शिकायत पर तत्परता दिखाते हुए गोला पुलिस ने गांव के ही तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया है।
कंचा खेलने से शुरू हुआ था विवाद
प्राप्त विवरण के अनुसार, घटना की शुरुआत रविवार दोपहर उस समय हुई जब डड़वापार निवासी सूरज यादव के घर के सामने गांव के कुछ बच्चे इकट्ठा होकर कंचा खेल रहे थे। सूरज यादव भी वहीं पास में बैठे थे। खेल के दौरान हार-जीत और कंचों के बंटवारे को लेकर बच्चों में कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते बच्चों के बीच छीना-झपटी होने लगी।
आरोप है कि जब बच्चों के बीच विवाद बढ़ा, तो वहां गांव के ही अंकित यादव, संतोष यादव और अर्जुन यादव पहुँच गए। बच्चों को समझाने या विवाद शांत कराने के बजाय, इन लोगों ने सूरज यादव के साथ बहस शुरू कर दी।
कहासुनी के बाद बरसे लाठी-डंडे
पीड़ित सूरज यादव ने गोला थाने में दी गई तहरीर में बताया कि आरोपियों ने आते ही गाली-गलौज शुरू कर दी। जब उन्होंने विरोध किया, तो तीनों आरोपियों ने उन पर हमला बोल दिया। इस मारपीट में सूरज यादव को शरीर के विभिन्न हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। शोर-शराबा सुनकर ग्रामीण जब तक बीच-बचाव के लिए पहुँचे, आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए।
घटना के बाद लहूलुहान अवस्था में पीड़ित थाने पहुँचा और पुलिस को आपबीती सुनाई। पुलिस ने तत्काल पीड़ित को प्राथमिक उपचार और डॉक्टरी परीक्षण (Medical Examination) के लिए भेज दिया।
गोला पुलिस का एक्शन: बीएनएस की धाराओं में केस दर्ज
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी राकेश रोशन सिंह ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। पुलिस ने अंकित यादव, संतोष यादव और अर्जुन यादव के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है:
- धारा 115(2): स्वेच्छा से चोट पहुँचाने के लिए दंड।
- धारा 352: शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना।
- धारा 351(3): आपराधिक धमकी (जान से मारने की धमकी देना)।
थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया कि गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। पुलिस की एक टीम आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

गांव में तनाव और सामाजिक चिंता
डड़वापार गांव में हुई इस मारपीट की घटना के बाद से गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म है। बुद्धिजीवियों का कहना है कि बच्चों के विवाद में बड़ों का इस तरह हिंसक होना चिंताजनक है। अक्सर ग्रामीण अंचलों में छोटी-छोटी बातों को व्यक्तिगत प्रतिष्ठा (Ego) से जोड़ लिया जाता है, जिसका नतीजा गंभीर मुकदमों और वर्षों तक चलने वाली रंजिश के रूप में सामने आता है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि यदि समय रहते बड़े हस्तक्षेप कर बच्चों को समझा देते, तो इस भीषण मारपीट और थाने-कचहरी की नौबत नहीं आती। अब इस मुकदमे के कारण दोनों परिवारों के बीच कड़वाहट और बढ़ गई है।
निष्कर्ष
गोला पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि छोटे विवादों को भी हल्के में नहीं लिया जाएगा, विशेषकर जब वे हिंसा का रूप ले लें। डड़वापार की यह मारपीट समाज के लिए एक सबक है कि संयम और आपसी संवाद ही विवादों का सबसे अच्छा समाधान है। फिलहाल, पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है और जल्द ही आरोपियों के सलाखों के पीछे होने का दावा कर रही है।












