बृजनाथ तिवारी,
गोलाबाजार (गोरखपुर): 24 मार्च 2026

ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा कभी निष्फल नहीं जाती। गोरखपुर जनपद के गोला तहसील अंतर्गत गोला-कौड़ीराम सड़क मार्ग पर स्थित ग्राम सभा ककरही के टोला आमगाड़ा (मिश्राना) में स्थापित दुर्गा माता मंदिर इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। इस दरबार की महिमा ऐसी है कि यहाँ जो भी भक्त सच्चे हृदय और पूर्ण श्रद्धा के साथ मत्था टेकता है, आदि शक्ति माँ दुर्गा उसकी झोली खुशियों से भर देती हैं। नवरात्र के पावन दिनों में यहाँ का दृश्य किसी भव्य कुंभ जैसा प्रतीत होता है, जहाँ भक्तों का अनवरत जमावड़ा लगा रहता है।
मंदिर की स्थापना का रोचक इतिहास: एक भक्त का संकल्प
ककरही ग्राम सभा का एक मजरा (टोला) ब्राह्मणों की बहुलता के कारण ‘मिश्राना’ के रूप में प्रसिद्ध है। इस मंदिर की स्थापना के पीछे एक अत्यंत भावुक और चमत्कारिक घटना जुड़ी है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, आमगाड़ा निवासी जब्बर नाथ मिश्रा माँ दुर्गा के परम उपासक थे। उनके घर में लगातार सात पुत्रियों का जन्म हुआ, जिससे वे भविष्य को लेकर काफी चिंतित रहने लगे। पुत्र की कामना और वंश वृद्धि के लिए उन्होंने नवरात्र के समय माँ भगवती की शरण ली। उन्होंने माँ से मन्नत मांगी कि “हे माँ! यदि मेरे घर पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है, तो मैं आपकी स्मृति में एक विशाल मंदिर बनवाकर दिव्य प्रतिमा स्थापित करूँगा।“
शक्ति नाथ का जन्म और मंदिर का निर्माण
माँ दुर्गा ने अपने अनन्य भक्त की करुण पुकार सुन ली। जब्बर नाथ मिश्रा के घर आठवीं संतान के रूप में पुत्र का जन्म हुआ। भक्त ने माता की कृपा मानते हुए पुत्र का नाम ‘शक्ति नाथ’ रखा। अपने संकल्प को पूरा करते हुए उन्होंने अपनी निजी भूमि पर माँ दुर्गा का एक भव्य और विशाल मंदिर बनवाया और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ माता की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा करवाई।
धीरे-धीरे इस चमत्कार की चर्चा पूरे क्षेत्र में फैल गई। लोगों का विश्वास जागृत हुआ और वे दूर-दूर से इस मंदिर में मत्था टेकने आने लगे। आज यह मंदिर केवल एक परिवार की निजी आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सार्वजनिक श्रद्धा का महाकेंद्र बन चुका है।
मन्नतों का दरबार: दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु
ककरही आमगाड़ा के इस दरबार में भक्तों की भीड़ वर्ष भर बनी रहती है, लेकिन शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान यहाँ मेला लग जाता है।
- मन्नतें: लोग यहाँ संतान प्राप्ति, रोग मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना लेकर आते हैं।
- पूजा-अर्चना: मन्नत पूरी होने पर भक्त यहाँ विशेष पूजा, हवन और चुनरी-नारियल का चढ़ावा चढ़ाते हैं।
- क्षेत्रीय विस्तार: अब माता की ख्याति केवल गोला तहसील तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी जनपदों जैसे देवरिया, मऊ और आजमगढ़ से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माँ के दर्शन हेतु यहाँ पहुँच रहे हैं।
आध्यात्मिक वातावरण और जनमानस का विश्वास
मंदिर परिसर में पहुँचते ही एक असीम शांति का अनुभव होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहाँ से कोई भी भक्त कभी निराश होकर नहीं लौटा है। माता के दरबार में ऊँच-नीच और भेदभाव का कोई स्थान नहीं है; यहाँ हर श्रद्धालु केवल एक ‘भक्त’ के रूप में माँ की गोद में सुकून पाता है।
ककरही आमगाड़ा का यह दुर्गा माता मंदिर भक्ति और संकल्प की विजय का प्रतीक है। जब्बर नाथ मिश्रा द्वारा अपनी आस्था के वशीभूत होकर बनवाया गया यह मंदिर आज हजारों परिवारों की आशाओं का संबल है। यदि आप भी मानसिक शांति और दैवीय कृपा की तलाश में हैं, तो ककरही का यह पावन दरबार आपका स्वागत करने के लिए तैयार है।
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