गोरखपुर: 27 फरवरी 2026
गोरखपुर के बांसगांव क्षेत्र में मामूली नाली विवाद को लेकर हुए हिंसक हमले में गंभीर रूप से घायल हुए गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के आजीवन सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार अग्निवेश सिंह ने आखिरकार दम तोड़ दिया। उनके निधन की खबर जैसे ही शहर में फैली, समूचे पत्रकार जगत में शोक की लहर दौड़ गई। जिला अस्पताल परिसर देखते ही देखते छावनी में तब्दील हो गया, जहाँ सैकड़ों की संख्या में पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता एकत्रित हुए। यह पत्रकार की मौत प्रशासन की उस सुस्ती पर भी करारा तमाचा है, जिसने समय रहते शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया।

अस्पताल में पत्रकारों का ऐतिहासिक जमावड़ा
अग्निवेश सिंह की मृत्यु की सूचना मिलते ही गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के पदाधिकारियों सहित जनपद के कोने-कोने से पत्रकार जिला अस्पताल पहुँच गए। वहां का माहौल गमगीन तो था ही, साथ ही व्यवस्था के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश भी देखने को मिला। प्रेस क्लब के अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी, उपाध्यक्ष धनेश, मंत्री पंकज श्रीवास्तव, संयुक्त मंत्री महेंद्र गौड़ और कोषाध्यक्ष दुर्गेश यादव ने मौके पर पहुँचकर कानूनी प्रक्रिया की कमान संभाली। पत्रकारों ने स्वयं खड़े होकर पंचनामा की प्रक्रिया पूरी कराई ताकि किसी भी स्तर पर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न हो सके।
प्रशासनिक लापरवाही और ‘मेडिकल टीम’ की मांग
पत्रकारों का स्पष्ट आरोप है कि अग्निवेश सिंह ने पूर्व में कई बार अपनी जान को खतरा बताते हुए स्थानीय थाने और उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए थे, लेकिन पुलिसिया निष्क्रियता के कारण हमलावरों के हौसले बुलंद रहे। मौके पर मौजूद पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से वार्ता की और इस पत्रकार की मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए एक विशेष मेडिकल टीम गठित कर पोस्टमार्टम कराने की मांग की। पत्रकारों के भारी दबाव को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल मेडिकल बोर्ड का गठन किया, जिसके बाद शव को बीआरडी मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
मौके पर मौजूद रहे दिग्गज पत्रकार
इस दुःखद घड़ी में मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के अध्यक्ष अरविंद राय, पूर्व अध्यक्ष रितेश मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार टी.पी. शाही, रामचंद्र शाही, राजू सैनी, राजेश कुमार, शिवहर्ष द्विवेदी, प्रिंस पांडेय, वेद पाठक, निखलेश प्रताप सहित बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि अग्निवेश सिंह एक जुझारू पत्रकार थे जिन्होंने हमेशा जनहित के मुद्दों को प्रमुखता दी, लेकिन अंततः वे स्वयं व्यवस्था की भेंट चढ़ गए।

घटना की पृष्ठभूमि: क्या था विवाद?
बांसगांव क्षेत्र के निवासी अग्निवेश सिंह का उनके पड़ोसियों से नाली के निकास को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि विपक्षियों ने सुनियोजित तरीके से उन पर हमला किया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। कई दिनों तक अस्पताल में संघर्ष करने के बाद वे जिंदगी की जंग हार गए।

पत्रकार समाज की चेतावनी: “कार्रवाई नहीं तो आंदोलन”
जिला अस्पताल में एकजुट हुए पत्रकारों ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि:
- शीघ्र गिरफ्तारी: घटना में शामिल सभी मुख्य आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया जाए।
- लापरवाह अधिकारियों पर गाज: जिन पुलिसकर्मियों ने पूर्व में दिए गए प्रार्थना पत्रों को रद्दी की टोकरी में डाला, उन्हें तत्काल निलंबित कर उन पर विभागीय जांच बैठाई जाए।
- आर्थिक सहायता: मृतक पत्रकार के परिवार को उचित मुआवजा और उनके बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी सरकार उठाए।
वरिष्ठ पत्रकारों ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों और लापरवाह अधिकारियों पर कठोर विधिक कार्रवाई नहीं हुई, तो संपूर्ण उत्तर प्रदेश का पत्रकार समाज सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
निष्कर्ष
अग्निवेश सिंह के रूप में गोरखपुर ने एक निर्भीक आवाज खो दी है। यह पत्रकार की मौत व्यवस्था के उस काले पक्ष को उजागर करती है जहाँ एक सूचना देने वाले और समाज को आईना दिखाने वाले व्यक्ति की सुरक्षा भी सुनिश्चित नहीं है। अब सबकी नजरें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। पत्रकार समाज एकजुट है और अपने साथी के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए संकल्पित है।













