बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: भारत की सीमाओं की रक्षा करना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक कठिन साधना है। जब कोई सैनिक अपनी जवानी के चार दशक देश की सीमाओं की सुरक्षा में समर्पित कर देता है, तो उसकी वापसी किसी उत्सव से कम नहीं होती। जनपद गोरखपुर के दक्षिणांचल स्थित गोला तहसील के ग्राम पंचायत नवली में सोमवार तड़के कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (Indo-Tibetan Border Police) में 40 वर्षों तक निरंतर और निष्कलंक सेवा देने के उपरांत, श्री महेंद्र प्रताप ITBP जवान जब अपनी सेवानिवृत्ति के बाद पहली बार अपने पैतृक गांव पहुंचे, तो पूरा क्षेत्र उनके सम्मान में उमड़ पड़ा।

हिमालय की चोटियों से गांव की मिट्टी तक का सफर
आईटीबीपी (ITBP) को भारत की उन सुरक्षा एजेंसियों में गिना जाता है, जो विश्व के सबसे कठिन और ऊंचे युद्ध क्षेत्रों में तैनात रहती हैं। ‘शौर्य-दृढ़ता-कर्मनिष्ठा’ के आदर्श वाक्य को जीने वाले इस बल में ITBP जवान महेंद्र प्रताप जी ने देश के विभिन्न राज्यों और चीन से सटी दुर्गम सीमाओं पर अपनी सेवाएं दीं। उनकी 40 साल की यह लंबी यात्रा केवल एक कार्यकाल नहीं, बल्कि भारत के बदलते रक्षा परिदृश्य की साक्षी रही है।
31 जनवरी 2026 को औपचारिक रूप से सेवानिवृत्त होने के बाद, जब शनिवार को वे अपने गांव नवली की सीमा में दाखिल हुए, तो फिजाओं में राष्ट्रभक्ति के नारों की गूंज सुनाई देने लगी। ग्रामीणों ने उन्हें फूलों की मालाओं से लाद दिया और ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए उनके घर तक ले गए। हर चेहरे पर अपने गांव के इस लाल के प्रति गर्व के भाव स्पष्ट झलक रहे थे।
अनुशासन और देशभक्ति: युवाओं के लिए अनमोल पाथेय
स्वागत समारोह के दौरान एक जनसभा का भी आयोजन किया गया, जहां ITBP जवान महेंद्र प्रताप जी ने अपने चार दशकों के सेवाकाल के अनुभव साझा किए। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वर्दी पहनना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य था, लेकिन अब समाज के बीच रहकर वे नई पीढ़ी को तैयार करना चाहते हैं।
उन्होंने उपस्थित जनसमूह, विशेषकर युवाओं और बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, “देशसेवा केवल सीमा पर बंदूक लेकर खड़े होने तक सीमित नहीं है। यदि आप अपने कार्य के प्रति ईमानदार हैं, समाज में अनुशासन बनाए रखते हैं और अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करते हैं, तो आप भी एक सच्चे राष्ट्रसेवक हैं।” उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सोशल मीडिया और अन्य भटकावों से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में अपनी ऊर्जा लगाएं। उनकी बातों ने वहां मौजूद हर युवा के भीतर देशभक्ति का जज्बा पैदा कर दिया।
नवली गांव में उत्सव सा माहौल और जनभागीदारी
ITBP जवान महेंद्र प्रताप जी के स्वागत में नवली गांव के साथ-साथ आसपास के कई गांवों के लोग भी शामिल हुए। यह समारोह केवल एक पारिवारिक कार्यक्रम न रहकर एक सामाजिक उत्सव में बदल गया। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से नई पीढ़ी को सेना और अर्धसैनिक बलों के प्रति सम्मान और रुचि पैदा होती है।
इस गौरवशाली अवसर पर ग्राम प्रधान धर्मेंद्र यादव के साथ-साथ क्षेत्र के तमाम प्रतिष्ठित लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम की व्यवस्था और गरिमा को बनाए रखने में रविंद्र प्रताप, रूद्र प्रताप, शिवम् पाण्डेय, अनूप पाण्डेय, अभय पाण्डेय, अश्वनी पाण्डेय, अमरेंद्र पाण्डेय, सत्यप्रकाश मिश्र, अभिषेक त्रिपाठी, गौरी पाण्डेय, वेदप्रकाश पाण्डेय, केदार पाण्डेय, हरी प्रकाश पाण्डेय, शास्त्री पाण्डेय, विनय पाण्डेय, घनश्याम पाण्डेय और भानू प्रताप पांडेय सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सक्रिय योगदान दिया।
रिटायरमेंट नहीं, नई पारी की शुरुआत
आमतौर पर सेवानिवृत्ति को आराम का समय माना जाता है, लेकिन ITBP जवान महेंद्र प्रताप जी के तेवर आज भी एक युवा सैनिक की तरह हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे गांव में रहकर युवाओं को सेना भर्ती के लिए प्रोत्साहित करेंगे और उन्हें अनुशासन का पाठ पढ़ाएंगे। उनके परिवार के सदस्यों ने भी इस अवसर पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इतने वर्षों बाद अब उन्हें अपने मुखिया के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा, जो पूरे परिवार के लिए गर्व की बात है।
निष्कर्ष: राष्ट्रभक्ति की एक अमर मिसाल
गोला क्षेत्र के नवली गांव से निकला यह संदेश पूरे गोरखपुर जिले के लिए प्रेरणा का स्रोत है। 40 साल की अटूट सेवा के बाद ITBP जवान महेंद्र प्रताप जी का यह भव्य स्वागत यह सिद्ध करता है कि देश आज भी अपने सैनिकों और उनके बलिदान का सर्वोच्च सम्मान करता है। उनकी यह वापसी समाज में नैतिकता, अनुशासन और सेवा-भाव की एक नई लहर पैदा करेगी।
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