गोरखपुर: 7 मार्च 2026
गोरखपुर की मिट्टी ने एक बार फिर देश को एक होनहार प्रशासनिक अधिकारी दिया है। शहर के राप्तीनगर फेज-4 की रहने वाली इशिता शर्मा ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 26वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम पूरे देश में रोशन किया है। इशिता की यह उपलब्धि उन हजारों युवाओं के लिए एक मिसाल है, जो कठिन परिश्रम और हार न मानने वाले जज्बे के साथ अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं। यूपीएससी रिजल्ट की घोषणा के बाद से ही इशिता के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
हार नहीं मानी: चौथे प्रयास में मिली ऐतिहासिक सफलता
इशिता शर्मा की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे वर्षों का कड़ा तप और धैर्य है। इशिता ने यह मुकाम अपने चौथे प्रयास में हासिल किया। गौरतलब है कि अपने तीसरे प्रयास में वह इंटरव्यू (साक्षात्कार) तक पहुँची थीं, लेकिन अंतिम चयन सूची में कुछ अंकों से स्थान नहीं बना सकीं।
किसी भी अभ्यर्थी के लिए इंटरव्यू तक पहुँचकर असफल होना मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन इशिता ने इसे एक नई सीख के रूप में लिया। उन्होंने अपनी कमियों पर काम किया और दोगुने उत्साह के साथ चौथे प्रयास की तैयारी की। परिणाम आज सबके सामने है—वे न केवल सफल हुईं, बल्कि टॉपर्स की सूची में जगह बनाई।

सेल्फ स्टडी और कॉमर्स पर रहा भरोसा
इशिता की प्रारंभिक शिक्षा गोरखपुर से हुई, जिसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली का रुख किया। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से बीकॉम और एमकॉम की पढ़ाई पूरी की। खास बात यह है कि वह पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रही हैं और उन्होंने पहले ही प्रयास में नेट-जेआरएफ (NET-JRF) की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी।
सिविल सेवा परीक्षा के लिए इशिता ने अपने ही विषय ‘कॉमर्स’ (Commerce) को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना। इशिता का मानना है कि वैकल्पिक विषय का चयन अपनी रुचि और पकड़ के आधार पर करना चाहिए, न कि दूसरों को देखकर। उन्होंने अधिकांश तैयारी घर पर रहकर ‘सेल्फ स्टडी’ के माध्यम से की, जो यह संदेश देता है कि आज के डिजिटल युग में सही संसाधनों के साथ घर से भी आईएएस बना जा सकता है।
परिवार का साथ और भाई का मार्गदर्शन
इशिता की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का अटूट सहयोग रहा है। उनके पिता डी.के. शर्मा बैंक मैनेजर हैं और माँ अर्चना शर्मा एक गृहिणी हैं। इशिता अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने बड़े भाई को देती हैं। इशिता के अनुसार, उनके भाई ने न केवल एक गुरु की तरह उनका मार्गदर्शन किया, बल्कि हर उस मोड़ पर उनका हौसला बढ़ाया जहाँ वे खुद को कमजोर महसूस कर रही थीं।
लक्ष्य: शिक्षा व्यवस्था में सुधार
आईएएस के रूप में अपनी प्राथमिकताएं बताते हुए इशिता शर्मा ने बहुत ही नेक इरादे जाहिर किए हैं। उन्होंने कहा कि वह शिक्षा व्यवस्था (Education System) में जमीनी स्तर पर सुधार करना चाहती हैं। इशिता का मानना है कि शिक्षा ही वह एकमात्र औजार है जिससे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चे का भविष्य संवारा जा सकता है। वे चाहती हैं कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता ऐसी हो कि हर बच्चे को समान अवसर मिल सकें।
उभरते अभ्यर्थियों के लिए इशिता का मंत्र
यूपीएससी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए इशिता ने तीन मुख्य बातें साझा कीं:
- निरंतरता (Consistency): हर दिन थोड़ा-थोड़ा पढ़ना महत्वपूर्ण है।
- सटीक रणनीति: केवल पढ़ने से काम नहीं चलेगा, सही दिशा में पढ़ना जरूरी है।
- वैकल्पिक विषय: उस विषय को चुनें जिसे आप घंटों पढ़ सकें और जो आपकी ताकत हो।
गोरखपुर में गौरव का क्षण
इशिता की सफलता पर गोरखपुर के जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी प्रसन्नता व्यक्त की है। राप्तीनगर क्षेत्र में लोग इशिता को अपनी आँखों का तारा मान रहे हैं। एक साधारण बैंक मैनेजर की बेटी ने जिस तरह देश की सबसे कठिन परीक्षा में 26वीं रैंक पाई है, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या नामचीन कोचिंग संस्थान की मोहताज नहीं होती।












