बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 3 मार्च 2026
सांस्कृतिक नगरी गोला और इसके आस-पास के ग्रामीण अंचलों में सोमवार देर शाम होलिका दहन (Holika Dahan) का पर्व अपार हर्षोल्लास, श्रद्धा और पारंपरिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ। फाल्गुन मास की पूर्णिमा की चाँदनी के नीचे, जब अग्नि प्रज्वलित हुई, तो न केवल लकड़ियाँ जलीं, बल्कि समाज की बुराइयों और नकारात्मकता को भी राख करने का संकल्प लिया गया। नगर पंचायत गोला से लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक, हर गली-चौराहा “होली है” के जयकारों और पारंपरिक फाग गीतों की मधुर लहरियों से सराबोर नजर आया।
शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजन
ज्योतिषाचार्यों द्वारा बताए गए शुभ मुहूर्त के अनुसार, शाम होते ही श्रद्धालुओं का हुजूम होलिका स्थलों की ओर उमड़ने लगा। होलिका दहन (Holika Dahan) से पूर्व महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में थाली सजाकर होलिका की पूजा-अर्चना की। गोबर के बड़कुल्लों (उपलों), नई फसल के गेहूं की बालियों और जल से होलिका का तर्पण किया गया। श्रद्धालुओं ने सपरिवार होलिका की परिक्रमा की और सुख-समृद्धि के साथ-साथ आरोग्य की कामना की।

नगर और ग्रामीण क्षेत्रों का अद्भुत नजारा
नगर पंचायत गोला के विभिन्न मोहल्लों—जैसे कि साकेत नगर, शिवपुरी और अन्य प्रमुख चौराहों पर युवाओं ने कई दिनों की मेहनत से विशालकाय होलिका तैयार की थी। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में इस उत्सव का रंग और भी गाढ़ा दिखा।
प्रमुख गांवों की झलकियाँ:
- रानीपुर और सेमरी: यहाँ के प्राचीन मंदिरों के पास स्थित होलिका स्थलों पर भारी भीड़ रही। ढोलक और मंजीरे की थाप पर लोक गायकों ने फाग गीतों के माध्यम से भगवान राम और कृष्ण के प्रसंगों का वर्णन किया।
- मेहड़ा और बारानगर: इन गांवों में बुजुर्गों ने नई पीढ़ी को होलिका दहन (Holika Dahan) की पौराणिक कथा सुनाई और बताया कि कैसे भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति के सामने अहंकारी हिरण्यकश्यप और उसकी बहन होलिका का अहंकार परास्त हुआ।
फाग गीतों की गूंज: लोक संस्कृति का जीवंत रूप
गोला क्षेत्र की पहचान यहाँ के लोक गीतों से है। देर रात तक चलने वाली फाग मंडलियों ने उत्सव में चार चाँद लगा दिए। “होली खेले रघुवीरा अवध में…” और “आज बिरज में होली रे रसिया…” जैसे गीतों पर युवाओं और बुजुर्गों की टोलियाँ झूमती रहीं। महिलाओं ने भी समूह में एकत्रित होकर सोहर और फाग गाए, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमयी और उत्सवधर्मी माहौल में डूबा रहा। कई स्थानों पर लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर गले लगाया और पुरानी कड़वाहट को मिटाने का संदेश दिया।
प्रशासनिक सतर्कता और शांतिपूर्ण आयोजन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद का हिस्सा होने के नाते, गोला में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। होलिका दहन (Holika Dahan) के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए उपजिलाधिकारी (SDM) और क्षेत्राधिकारी (CO) गोला के नेतृत्व में पुलिस बल निरंतर गश्त करता रहा। दमकल की गाड़ियों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया था। प्रशासन की इस मुस्तैदी का परिणाम रहा कि पूरे क्षेत्र में कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश
होलिका की पवित्र अग्नि के प्रज्वलित होते ही लोगों ने उसमें अपनी चिंताओं और द्वेष की आहुति दी। प्रह्लाद की विजय की खुशी में अबीर उड़ाये गए। यह पर्व हमें सिखाता है कि सत्य को कभी दबाया नहीं जा सकता। गोला की देवतुल्य जनता ने इस अवसर पर आपसी भाईचारे और एकता को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लिया।
निष्कर्ष: रंगों के आगमन की पदचाप
होलिका दहन (Holika Dahan) के साथ ही अब रंगों के त्यौहार ‘धुलेंडी’ की शुरुआत हो गई है। गोला के बाजारों में रंग, गुलाल और पिचकारियों की दुकानों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। बुराई की राख ठंडी होने के बाद अब खुशियों के रंग हवा में तैरने को बेताब हैं। यह उत्सव केवल रंगों का नहीं, बल्कि मानव मूल्यों और प्रेम के पुनर्जागरण का प्रतीक बनकर उभरा है।













