गोलाबाजार, गोरखपुर: 1 मार्च 2026
गोरखपुर जनपद के गोला तहसील अंतर्गत ग्राम बसन्तपुर में सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। शासन की मंशा के अनुरूप सार्वजनिक एवं सरकारी भूमि को भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारकों से मुक्त कराने के अभियान के तहत सरकारी जमीन पर जबरन निर्माण करने वाले चार लोगों के खिलाफ गोला पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत किया है। हल्का लेखपाल की बार-बार की गई चेतावनी और राजस्व विभाग के आदेशों की अवहेलना करने पर यह कानूनी कदम उठाया गया है, जिससे क्षेत्र के अन्य अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
क्या है पूरा मामला? नवीन परती पर किया कब्जा
प्राप्त विवरण के अनुसार, हल्का लेखपाल मदनजीत सिंह ने गोला थाने में तहरीर देकर बताया कि ग्राम बसन्तपुर में आराजी नंबर 166, जिसका रकबा 0.0080 हेक्टेयर है, सरकारी अभिलेखों में ‘नवीन परती’ के रूप में दर्ज है। नवीन परती का अर्थ होता है वह सरकारी जमीन जो किसी भी निजी व्यक्ति के नाम नहीं होती और सार्वजनिक उपयोग या भविष्य की सरकारी परियोजनाओं के लिए सुरक्षित रखी जाती है।
लेखपाल का आरोप है कि इस भूमि पर गांव के ही कुछ दबंग किस्म के लोग लंबे समय से अपनी नजरें गड़ाए हुए थे और प्रशासन द्वारा पूर्व में दी गई सूचनाओं को लगातार दरकिनार कर रहे थे।
दो बार की चेतावनी भी रही बेअसर
राजस्व विभाग के सूत्रों के अनुसार, उक्त भूमि पर पहले से ही उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67(1) के अंतर्गत बेदखली का वाद (मुकदमा) संख्या दर्ज है। लेखपाल मदनजीत सिंह ने पुलिस को बताया कि उन्होंने स्वयं मौके पर जाकर संबंधित व्यक्तियों को दो बार मौखिक और लिखित रूप से मना किया था कि वे इस सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का निर्माण या कब्जा न करें।
बावजूद इसके, आरोपी पक्ष ने कानून को ठेंगा दिखाते हुए जबरन निर्माण कार्य जारी रखा। जब प्रशासन की नरमी का गलत फायदा उठाया गया, तो अंततः हल्का लेखपाल ने पुलिस की शरण ली और नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई।
इन चार लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
लेखपाल की तहरीर के आधार पर गोला पुलिस ने बसन्तपुर निवासी निम्नलिखित चार लोगों को नामजद किया है:
- रामउग्रह पुत्र पारसनाथ
- सतीराम पुत्र पारसनाथ
- भारत पुत्र रामउग्रह
- रीता देवी पत्नी रामउग्रह
पुलिस ने इन सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। थाना प्रभारी राकेश रोशन सिंह ने पुष्टि की है कि लेखपाल की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस की एक टीम राजस्व विभाग के साथ समन्वय बनाकर अग्रिम कार्रवाई कर रही है।

बीएनएस की धाराओं में कानूनी शिकंजा
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बीएनएस की धारा 223 एवं 329(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी आदेशों की अवहेलना और लोक सेवक के कार्य में बाधा डालने के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाने या अवैध रूप से हथियार लेने (कब्जा करने) के मामलों में ये धाराएं अत्यंत प्रभावी होती हैं। दोषी पाए जाने पर आरोपियों को जेल की सजा और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
राजस्व विभाग का संदेश: “अतिक्रमण मुक्त होगा गोला”
तहसील प्रशासन गोला का कहना है कि क्षेत्र में कहीं भी सरकारी जमीन, चकमार्ग, तालाब या चारागाह की भूमि पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बसन्तपुर की यह कार्रवाई केवल एक शुरुआत है। लेखपालों को अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसी सभी जमीनों की सूची बनाने के निर्देश दिए गए हैं जहाँ अवैध निर्माण हो चुके हैं। आने वाले दिनों में इन कब्जों पर बुलडोजर चलने की भी संभावना है।
ग्रामीणों में चर्चा और भय का माहौल
बसन्तपुर में हुई इस एफआईआर (FIR) के बाद गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई बार आपसी रंजिश या अज्ञानता के कारण भी लोग सरकारी जमीनों पर घेराबंदी कर लेते हैं, लेकिन लेखपाल की मनाही के बाद भी कब्जा करना सीधे तौर पर कानून को चुनौती देना है। अब देखना यह है कि पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी कब करती है और विवादित जमीन को कब तक कब्जा मुक्त कराया जाता है।
निष्कर्ष
बसन्तपुर का यह मामला उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो सरकारी जमीन को अपनी निजी संपत्ति समझकर उस पर निर्माण कार्य कर रहे हैं। गोला प्रशासन और पुलिस की यह संयुक्त कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि सरकारी संपत्तियों पर अब किसी भी प्रकार का “अवैध साम्राज्य” टिकने वाला नहीं है।












