गोरखपुर:
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद अंतर्गत तिवारीपुर थाना क्षेत्र शनिवार को रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। पुरानी रंजिश को लेकर दो गुटों के बीच हुए हिंसक संघर्ष ने न केवल कानून-व्यवस्था को चुनौती दी, बल्कि आम जनता के मन में भी गहरा डर पैदा कर दिया। गोरखपुर सड़क तांडव की यह घटना इतनी भीषण थी कि दबंगों ने सरेराह ईंट-पत्थर चलाए, जिससे न केवल दुकानें क्षतिग्रस्त हुईं बल्कि सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों के शीशे भी चकनाचूर हो गए। करीब 10 मिनट तक चले इस उत्पात के दौरान पुलिस नदारद रही और हमलावर बेखौफ होकर तांडव मचाते रहे।
घटना का विवरण: चाय की दुकान से शुरू हुई ‘जंग’
प्राप्त विवरण के अनुसार, यह पूरी घटना शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे की है। तिवारीपुर थाना क्षेत्र के दुल्हन मैरेज हाउस के पास स्थित एक चाय की दुकान पर कुछ युवक बैठे हुए थे। तभी रूद्रपुर और अंधियारीबाग मोहल्ले के युवकों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते यह विवाद गाली-गलौज से बढ़कर हिंसक झड़प में तब्दील हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गोरखपुर सड़क तांडव तब शुरू हुआ जब एक पक्ष के करीब 10 से अधिक युवक हाथों में बेल्ट और पत्थर लिए मौके पर पहुंचे। उन्होंने विपक्षी गुट के युवकों को निशाना बनाते हुए दुकान पर धावा बोल दिया। हमलावरों के तेवर देख विपक्षी युवक अपनी जान बचाने के लिए चाय की दुकान के ऊपर बनी छत पर चढ़ गए और वहां से खुद को बचाने की कोशिश करने लगे।
10 मिनट की दहशत: बेल्ट और पत्थरों से हमला
हमलावर युवकों ने कानून का डर छोड़कर सरेआम गुंडागर्दी का प्रदर्शन किया। वे सड़क पर खड़े होकर छत की ओर पत्थर फेंक रहे थे और गंदी-गंदी गालियां देते हुए जान से मारने की धमकियां दे रहे थे। गोरखपुर सड़क तांडव के दौरान हमलावरों ने वहां खड़ी आम लोगों की गाड़ियों को भी नहीं बख्शा। ईंट-पत्थर लगने से कई दोपहिया और चार पहिया वाहनों के शीशे टूट गए।

दुकानदार और आसपास के लोग अपनी दुकानें बंद कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि 10 मिनट तक सड़क पर केवल पत्थरों की गूंज और चीख-पुकार सुनाई दे रही थी। हमलावर खुलेआम बेल्ट लहराते हुए अपनी धमक दिखा रहे थे, जिससे उस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल: पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस पूरी घटना का एक वीडियो वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह युवक झुंड बनाकर हमला कर रहे हैं और पुलिस का कोई खौफ नहीं दिख रहा है। गोरखपुर सड़क तांडव के इस वीडियो ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की गश्त पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूचना मिलने के काफी देर बाद जब तिवारीपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक सभी आरोपी हमलावर गलियों के रास्ते फरार हो चुके थे। मौके पर केवल टूटे हुए कांच, ईंट के टुकड़े और दहशतजदा लोग ही बचे थे।
पुलिस की कार्रवाई: आरोपियों की पहचान और तलाश
घटना की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी तिवारीपुर के साथ दो अन्य चौकियों के इंचार्ज भी आरोपियों की धरपकड़ में जुट गए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह कोई तात्कालिक विवाद नहीं था बल्कि अंधियारीबाग और तरंग क्रॉसिंग के युवकों के बीच लंबे समय से चली आ रही रंजिश का नतीजा है।
थाना प्रभारी ने बताया:
“हमने घटनास्थल का मुआयना किया है और वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। गोरखपुर सड़क तांडव मचाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। शांति भंग करने वालों के खिलाफ कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।“
पुरानी रंजिश: तरंग क्रॉसिंग बनाम अंधियारीबाग
पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया है कि दोनों गुटों के बीच पूर्व में भी कई बार झड़प हो चुकी है। वर्चस्व की इस लड़ाई ने आज हिंसक रूप ले लिया। गोरखपुर सड़क तांडव के बाद पुलिस अब उन मुख्य साजिशकर्ताओं की तलाश कर रही है जिन्होंने युवकों को इस हमले के लिए उकसाया था। इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है और संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
स्थानीय निवासियों में आक्रोश
तिवारीपुर के स्थानीय निवासियों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि ऐसे दबंगों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाए जो एक मिसाल बने। लोगों का कहना है कि बीच शहर में इस तरह का गोरखपुर सड़क तांडव होना आम नागरिकों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा है। विशेष रूप से दोपहर के समय जब स्कूल और बाजार का समय होता है, ऐसी घटनाएं किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।
निष्कर्ष: कानून का राज या दबंगई?
गोरखपुर में हुई यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि अपराधियों के मन में कानून का डर बिठाना कितना जरूरी है। गोरखपुर सड़क तांडव की यह घटना केवल दो गुटों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा में लगी एक बड़ी सेंध है। अब देखना यह होगा कि पुलिस कितनी जल्दी इन उपद्रवियों को सलाखों के पीछे भेजती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाती है।
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