गोरखपुर जनपद में इन दिनों स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान अपने चरम पर है। सदर तहसील सभागार में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मतदाता (Voters) सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए दावों और आपत्तियों के निस्तारण का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य एक पारदर्शी और शुद्ध मतदाता सूची तैयार करना है, ताकि आगामी चुनावों में कोई भी पात्र नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रहे।
हालांकि, इस अभियान की व्यापकता और इसमें राजस्व अमले की पूरी व्यस्तता के कारण तहसील के अन्य महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे आम नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पीठासीन अधिकारियों की निगरानी में निस्तारण प्रक्रिया
सदर तहसील सभागार में मतदाता (Voters) सूची से जुड़े विवादों के त्वरित समाधान के लिए कई अनुभवी पीठासीन अधिकारियों की तैनाती की गई है। इनमें ज्ञान प्रताप सिंह, सुनील सिंह, आकांक्षा पासवान, अरविंद नाथ पांडे और देवेंद्र यादव शामिल हैं।
प्रक्रिया के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- साक्ष्यों की जांच: मतदाता अपने साथ आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, और जन्म प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज लेकर पहुंच रहे हैं।
- त्रुटि सुधार: नाम, पता, आयु और फोटो से जुड़ी गलतियों को दुरुस्त करने के लिए मौके पर ही साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है।
- पारदर्शिता: पीठासीन अधिकारी प्रत्येक दावे को गंभीरता से सुन रहे हैं ताकि फर्जीवाड़े की कोई गुंजाइश न रहे।
एसआईआर का दबदबा: ठप पड़े राजस्व कार्य
एसआईआर अभियान की प्राथमिकता इतनी अधिक है कि तहसील और राजस्व कार्यालयों के अन्य जरूरी कार्य जैसे दाखिल-खारिज, पैमाइश, वरासत और खतौनी सुधार लगभग ठप हो गए हैं। लेखपाल से लेकर उच्चाधिकारियों तक सभी इस चुनावी प्रक्रिया को समय पर पूरा करने में जुटे हैं।
इसका परिणाम यह है कि जो ग्रामीण या शहरवासी अपने भूमि संबंधी कार्यों के लिए तहसील आ रहे हैं, उन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा है। तहसील परिसर में दलालों की सक्रियता भी बढ़ने की शिकायतें मिल रही हैं, जो सीधे सादे लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।
“तारीख पे तारीख” से टूटी 75 वर्षीय बुजुर्ग की उम्मीद
बृहस्पतिवार को सदर तहसील में एक हृदय विदारक दृश्य देखने को मिला, जब 75 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला अपनी फरियाद लेकर साहब के पास पहुंचीं। उन्होंने रुंधे गले से कहा, “बाबू कहिया बइठल जाई, तारीख पे तारीख से सब्र टूट गइल बा।” उनकी पीड़ा यह थी कि वे महीनों से अपने एक छोटे से कार्य के लिए चक्कर काट रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें ‘एसआईआर चल रहा है’ कहकर टाल दिया जाता है।
अधिकारी ने बुजुर्ग महिला को ढांढस बंधाते हुए कहा कि अभी पूरा अमला मतदाता सूची के कार्य में व्यस्त है, लेकिन जल्द ही उनके प्रकरण का निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने महिला को बिचौलियों से सावधान रहने की भी नसीहत दी।
प्रशासन की चुनौती: संतुलन की आवश्यकता
एसआईआर अभियान निसंदेह लोकतंत्र की मजबूती के लिए अनिवार्य है। एक शुद्ध मतदाता (Voters) सूची ही निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला है। लेकिन, प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती यह है कि वह इस अभियान के साथ-साथ आम जनता के रोजमर्रा के राजस्व कार्यों को कैसे सुचारू रखे।
राजस्व कार्य ठप होने से आम जनता का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न बढ़ रहा है। लोगों की मांग है कि एसआईआर के लिए अलग से एक विंडो या विशेष स्टाफ नियुक्त किया जाए ताकि अन्य विभागीय कार्य पूरी तरह से बंद न हों।
निष्कर्ष: पारदर्शिता और संवेदनशीलता का मेल
सदर तहसील में चल रहा एसआईआर अभियान अपनी प्रगति पर है, और बड़ी संख्या में मतदाता (Voters) इसका लाभ उठाकर अपनी प्रविष्टियां सही करा रहे हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह बुजुर्गों और दूर-दराज से आए ग्रामीणों के प्रति थोड़ी अधिक संवेदनशीलता दिखाए। यदि एसआईआर के साथ-साथ अन्य कोर्ट केस और वरासत जैसे मामलों के लिए निश्चित समय तय कर दिया जाए, तो जनता की परेशानियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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