बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 14 फरवरी 2026
जनता की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निस्तारण के लिए आयोजित होने वाला ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ शनिवार को गोला थाने में केवल औपचारिकताओं तक ही सीमित नजर आया। नायब तहसीलदार बालचंद चौहान और थानाध्यक्ष राकेश रोशन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस दिवस में फरियादियों की उम्मीदों को उस वक्त झटका लगा, जब मेज पर आए पांचों मामलों में से एक का भी मौके पर निस्तारण नहीं हो सका। इन सभी मामलों में राजस्व संबंधी विवाद हावी रहे, जिसके कारण प्रशासन को इन्हें लंबी जांच प्रक्रिया के लिए हल्का लेखपालों को सौंपना पड़ा।
न्याय की आस में पहुंचे फरियादी: प्रमुख शिकायतें
गोला थाना दिवस में पहुंचे पीड़ितों की व्यथा सुनकर यह स्पष्ट हो गया कि ग्रामीण अंचलों में भूमि विवाद किस कदर जटिल रूप ले चुके हैं।
- जानीपुर का मकान कब्जा विवाद: ग्राम जानीपुर निवासी सुभान, सम्मसुद्दीन और सम्मुद्दीन ने एक संयुक्त प्रार्थना पत्र देकर सनसनीखेज आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि कुछ रसूखदार लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उनके पुश्तैनी मकान पर कब्जा करने का कुचक्र रच रहे हैं। पीड़ितों ने अपनी सुरक्षा और संपत्ति के बचाव की गुहार लगाई है।
- चकनाली पर अवैध निर्माण: बंशीधर गिरी नामक फरियादी ने सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने शिकायत की कि एक महत्वपूर्ण चकनाली के ऊपर आरसीसी (RCC) निर्माण कराया जा रहा है। यदि यह निर्माण नहीं रुका, तो चकनाली का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और जल निकासी की बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। उन्होंने तत्काल पैमाइश कराकर निर्माण रोकने की मांग की।
- अदालती आदेश के बाद भी दबंगों का कब्जा: सड़सड़ा खुर्द निवासी लक्षमिना देवी की पीड़ा सबसे अलग थी। उन्होंने बताया कि जिस भूमि का उन्होंने बैनामा कराया था, उस पर न्यायालय का फैसला भी उनके पक्ष में आ चुका है। इसके बावजूद कुछ स्थानीय दबंग भूमि पर कब्जा जमाए हुए हैं। पुलिस और प्रशासन के चक्कर काट रही लक्षमिना ने प्रशासन से अपना हक दिलाने की अपील की।

निस्तारण ‘जीरो’ होने के पीछे की तकनीकी वजह
गोला थाना दिवस में एक भी मामले का निस्तारण न हो पाना प्रशासनिक कुशलता पर सवाल खड़े करता है, लेकिन नायब तहसीलदार बालचंद चौहान ने स्पष्ट किया कि चूंकि सभी मामले भूमि पैमाइश, दस्तावेजों की जांच और मौके पर जाकर सत्यापन (Spot Verification) से जुड़े हैं, इसलिए बिना जांच रिपोर्ट के तत्काल निर्णय लेना विधिक रूप से संभव नहीं था।
अधिकारियों ने सभी प्रकरणों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित हल्का लेखपालों और राजस्व निरीक्षकों को फाइलें सौंपीं और निर्देश दिए कि वे स्थलीय निरीक्षण कर गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम पर दारोमदार
थानाध्यक्ष राकेश रोशन सिंह ने बताया कि भूमि विवाद अक्सर कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन जाते हैं। इसलिए, इन मामलों में राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर मौके पर भेजा जाएगा। उन्होंने हल्का लेखपालों को सख्त लहजे में कहा कि किसी भी रिपोर्ट में हीलाहवाली या पक्षपात अक्षम्य होगा। यदि गलत रिपोर्ट के कारण विवाद बढ़ता है, तो संबंधित कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
आम जनमानस में बढ़ता असंतोष
समाधान दिवस से खाली हाथ लौट रहे फरियादियों में असंतोष देखा गया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब अधिकांश मामले राजस्व से जुड़े होते हैं, तो लेखपालों की पूर्व सक्रियता अनिवार्य होनी चाहिए। बिना मौके पर जाए केवल फाइलों को एक हाथ से दूसरे हाथ में सौंपने से जनता का भरोसा इन आयोजनों से उठने लगता है।
उपस्थित अधिकारी एवं कर्मचारी
इस अवसर पर गोला तहसील के विभिन्न क्षेत्रों के राजस्व निरीक्षक, हल्का लेखपाल और पुलिस स्टाफ मौजूद रहा। अधिकारियों ने रजिस्टर में प्रविष्टियां दर्ज कर अगले समाधान दिवस तक रिपोर्ट तलब की है।
निष्कर्ष
गोला थाना दिवस की यह रिपोर्ट दर्शाती है कि राजस्व संबंधी विवाद सुलझाने के लिए केवल कागजी कार्यवाही काफी नहीं है। जब तक मौके पर पैमाइश और विधिक दस्तावेजों का त्वरित सत्यापन नहीं होगा, तब तक ‘निस्तारण शून्य’ की यह स्थिति बनी रहेगी। प्रशासन को चाहिए कि वह जटिल भूमि विवादों के लिए ‘फास्ट ट्रैक’ व्यवस्था अपनाए ताकि लक्षमिना देवी जैसे पीड़ितों को अदालती आदेश के बाद दर-दर न भटकना पड़े।
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