गोलाबाजार, गोरखपुर:
मुख्यमंत्री के ‘जनसुनवाई’ अभियान के तहत आयोजित होने वाले संपूर्ण समाधान दिवस (तहसील दिवस) में शनिवार को जमीनी विवादों की भरमार रही। इस दौरान गोला तहसील क्षेत्र के ग्राम सुअरज बुजुर्ग से एक ऐसा मामला सामने आया जिसने राजस्व टीम की कार्यप्रणाली और पैमाइश की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम निवासी बंशीधर गिरी ने अपनी आराजी संख्या और सार्वजनिक रास्ते को लेकर हो रहे चकमार्ग विवाद पैमाइश के संबंध में तहसील प्रशासन को प्रार्थना पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
विवाद की पृष्ठभूमि: पत्थर गाड़े गए, फिर भी असंतोष
प्राप्त विवरण के अनुसार, सुअरज बुजुर्ग निवासी बंशीधर गिरी (पुत्र स्व. विकायल गिरी) की अपनी पैतृक आराजी संख्या 229 (रकबा 0.09180 हेक्टेयर) को लेकर पड़ोसी पक्ष से विवाद चल रहा है। पीड़ित का आरोप है कि उनकी इस निजी भूमि पर गलत तरीके से चकमार्ग (रास्ता) बनाकर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बंशीधर ने पूर्व में जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके अनुपालन में राजस्व टीम ने 26 जनवरी 2026 को मौके पर पहुंचकर पैमाइश की थी। उस समय टीम ने आराजी संख्या 229 की पूर्व दिशा में स्थित सरकारी नाली और चकमार्ग का सीमांकन कर पत्थर (मेड़बन्दी) गाड़ दिए थे। बताया जाता है कि उस समय मौके पर मौजूद सभी पक्ष इस चकमार्ग विवाद पैमाइश की कार्यवाही से संतुष्ट थे।

दोबारा पैमाइश की मांग पर उठा सवाल
बंशीधर गिरी का मुख्य आरोप यह है कि एक बार सीमांकन होने और पत्थर गाड़े जाने के बावजूद कुछ प्रभावशाली लोग दोबारा पैमाइश कराने का दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार चकमार्ग संख्या 232 का जो स्थान नियत है, उसे इधर-उधर खिसकाने की साजिश रची जा रही है।
पीड़ित ने प्रार्थना पत्र में स्पष्ट किया है कि यदि चकमार्ग संख्या 232 की स्थिति के साथ छेड़छाड़ की गई, तो इसका सीधा असर उनकी आराजी नंबर 229 की भूमि पर पड़ेगा। चकमार्ग विवाद पैमाइश को बार-बार दोहराना न केवल राजस्व नियमों के विरुद्ध है, बल्कि यह प्रार्थी की भूमि को हड़पने की एक सोची-समझी कोशिश भी प्रतीत होती है।
नाली और जलभराव का संकट
जमीन के टुकड़े के साथ-साथ यह विवाद जल निकासी की समस्या से भी जुड़ा हुआ है। बंशीधर गिरी के अनुसार, चकमार्ग के बगल में स्थित नाली की सही स्थिति से छेड़छाड़ होने पर उनके घर के मुख्य द्वार पर पानी भरने की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाएगी। ग्रामीण इलाकों में Drainage System की सही व्यवस्था न होना अक्सर बड़े झगड़ों का कारण बनता है। प्रार्थी ने मांग की है कि नक्शे के आधार पर ही चकमार्ग और नाली की स्थिति बहाल रखी जाए ताकि भविष्य में किसी भी तरह का जलभराव न हो।
अवैध आरसीसी कार्य पर रोक की मांग
शिकायतकर्ता ने तहसील प्रशासन को यह भी अवगत कराया कि विवादित स्थल पर कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से आरसीसी (RCC) निर्माण या खड़ंजा बिछाने की तैयारी की जा रही है। बंशीधर ने मांग की है कि:
- पूर्व में 26 जनवरी को हुई चकमार्ग विवाद पैमाइश और राजस्व नक्शे के आधार पर ही चकमार्ग 232 को स्थापित किया जाए।
- आराजी नंबर 229 की भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- किसी भी नए निर्माण कार्य पर तब तक रोक लगाई जाए जब तक कि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट न हो जाए।
- बार-बार पैमाइश कर प्रार्थी को प्रताड़ित करने वाले लोगों पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
तहसील प्रशासन का रुख
तहसील दिवस की अध्यक्षता कर रहे प्रभारी अधिकारी ने बंशीधर गिरी की इस चकमार्ग विवाद पैमाइश से जुड़ी शिकायत को गंभीरता से सुना। उन्होंने तत्काल संबंधित क्षेत्र के राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) और लेखपाल को निर्देशित किया कि वे मौके की पुनः जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी निजी भूमि पर अवैध कब्जा न होने पाए। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि राजस्व रिकॉर्ड और पुराने नक्शे के आधार पर ही न्यायसंगत कार्रवाई की जाएगी।
राजस्व मामलों में बढ़ती जटिलताएं
गोला तहसील में अक्सर यह देखा गया है कि एक बार टीम द्वारा सीमांकन किए जाने के बाद भी दूसरा पक्ष उसे मानने से इनकार कर देता है। Land Records के जानकारों का कहना है कि डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब ‘जीआईएस मैपिंग’ और ‘ड्रोन सर्वे’ के जरिए ऐसी समस्याओं का स्थाई समाधान निकाला जाना चाहिए ताकि चकमार्ग विवाद पैमाइश जैसे मामलों में किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।

निष्कर्ष: पारदर्शिता की आवश्यकता
सुअरज बुजुर्ग का यह मामला प्रशासन के लिए एक चुनौती है। यदि सरकारी टीम द्वारा एक बार पत्थर गाड़ दिए गए थे, तो दोबारा पैमाइश की मांग किस आधार पर की जा रही है? यह सवाल प्रशासन को सुलझाना होगा। बंशीधर गिरी जैसे छोटे काश्तकारों के लिए उनकी भूमि ही उनकी पूंजी है। चकमार्ग विवाद पैमाइश में पारदर्शिता और निष्पक्षता ही इस विवाद का एकमात्र समाधान है।
अब देखना यह होगा कि तहसील दिवस में मिले आश्वासन के बाद क्या राजस्व टीम मौके पर जाकर बंशीधर की भूमि को सुरक्षित कर पाती है या प्रभावशाली लोगों का दबाव कायम रहता है। क्षेत्र के लोगों की नजरें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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