बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 14 March 2026
जनपद के गोला तहसील परिसर में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मर्यादा की रक्षा करने वाले दो अधिवक्ता आपस में ही भिड़ गए। मामला नायब तहसीलदार उरुवा की अदालत का है, जहाँ मुकदमों की पैरवी के दौरान शुरू हुई कहासुनी देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गई। गोला तहसील अधिवक्ता मारपीट 2026 की इस घटना ने न्यायिक कार्यप्रणाली और बार की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना में घायल दोनों अधिवक्ताओं ने गोला थाने पहुंचकर एक-दूसरे के खिलाफ तहरीर दी, जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक पक्ष का मुकदमा दर्ज कर लिया है, जबकि दूसरे पक्ष की जांच जारी है।
घटनाक्रम: बहस से शुरू हुआ विवाद, चली कुर्सी
प्राप्त विवरण के अनुसार, शुक्रवार 13 मार्च को गोला तहसील स्थित नायब तहसीलदार उरुवा की कोर्ट में मुकदमों की सुनवाई चल रही थी। अवरुस निवासी अधिवक्ता रणविजय चंद अपने मुवक्किल के मामले की पैरवी कर रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद कुशलदेइया निवासी अधिवक्ता मनोज कुमार तिवारी के साथ किसी कानूनी बिंदु को लेकर उनकी तीखी बहस शुरू हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार, बहस इतनी बढ़ गई कि अपशब्दों का प्रयोग होने लगा। आरोप है कि बहस के दौरान मनोज कुमार तिवारी ने आपा खो दिया और कोर्ट रूम में ही रखी एक टूटी हुई कुर्सी का पाया निकालकर रणविजय चंद पर जानलेवा हमला कर दिया। इस अचानक हुए हमले से कोर्ट परिसर में हड़कंप मच गया और न्यायिक कार्य बाधित हो गया।
पीड़ित पक्ष का आरोप: जान से मारने की मिली धमकी
अधिवक्ता रणविजय चंद पुत्र अर्जुन चंद ने गोला थाने में दी गई अपनी लिखित तहरीर में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया:
“मैं अपने मुवक्किल की पैरवी कर रहा था, तभी आरोपी अधिवक्ता ने बिना किसी उकसावे के भद्दी-भद्दी गालियां देनी शुरू कर दीं। जब मैंने विरोध किया, तो उन्होंने कुर्सी के पाए से मेरे ऊपर प्रहार किया, जिससे मुझे गंभीर चोटें आईं और मैं अचेत हो गया। उन्होंने मुझे जान से मारने की धमकी भी दी।“
घटना के समय कोर्ट में मौजूद अन्य अधिवक्ताओं ने किसी तरह बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया और घायल अधिवक्ता को प्राथमिक उपचार के लिए भेजा। गोला तहसील अधिवक्ता मारपीट 2026 की इस खबर ने बार एसोसिएशन के बीच भी तनाव पैदा कर दिया है।

पुलिसिया कार्रवाई: एक पक्ष पर बीएनएस के तहत मुकदमा
मामले की गंभीरता को देखते हुए गोला थाना प्रभारी राकेश रोशन सिंह ने त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। पीड़ित अधिवक्ता रणविजय चंद की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी अधिवक्ता मनोज कुमार तिवारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया है:
- धारा 352: शांति भंग करने के इरादे से अपमानित करना।
- धारा 110: खतरनाक हथियारों या साधनों से स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना।
पुलिस का कहना है कि दूसरे पक्ष के अधिवक्ता मनोज कुमार तिवारी ने भी अपनी तहरीर दी है, जिसकी जांच की जा रही है। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
तहसील परिसर में सुरक्षा पर सवाल
गोला तहसील अधिवक्ता मारपीट 2026 की इस घटना ने सरकारी कार्यालयों और अदालतों के भीतर अधिवक्ताओं और वादकारियों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
- सुरक्षा जांच का अभाव: क्या तहसील परिसर के भीतर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं?
- न्यायिक गरिमा: न्यायाधीश की मौजूदगी में इस तरह की मारपीट कानूनी व्यवस्था की चुनौती है।
- बार एसोसिएशन की भूमिका: अधिवक्ताओं के बीच बढ़ते आपसी मनमुटाव को रोकने के लिए संगठन क्या कदम उठा रहा है?
अधिवक्ताओं में आक्रोश और कार्य बहिष्कार की सुगबुगाहट
इस घटना के बाद तहसील के अधिवक्ताओं में दो फाड़ जैसी स्थिति है। एक गुट जहां पीड़ित के समर्थन में कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष मामले को आपसी विवाद बताकर शांत करने की कोशिश में है। कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि पुलिस ने निष्पक्ष जांच नहीं की, तो सोमवार को अधिवक्ता कार्य बहिष्कार कर विरोध प्रदर्शन भी कर सकते हैं।












