बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 28 फरवरी 2026
गोरखपुर जनपद के गोला थाना क्षेत्र में बेखौफ अपराधियों ने पुलिस की गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखा रखा है। बीते गुरुवार को दिन-दहाड़े बीसरा पेट्रोल पंप के पास एक महिला से हुई सरेराह लूट की घटना को 48 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन गोला पुलिस अब तक अंधेरे में हाथ-पांव मार रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि घटना के पहले ही दिन पुलिस ने दावा किया था कि बदमाशों की पहचान कर ली गई है, मगर दो दिन बीत जाने के बाद भी सलाखें इन लुटेरों का इंतजार ही कर रही हैं। पुलिस की इस कछुआ चाल वाली कार्यशैली को लेकर क्षेत्र की जनता में भारी आक्रोश और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।

क्या थी घटना? ई-रिक्शा पर महिला को बनाया शिकार
प्राप्त विवरण के अनुसार, गगहा थाना क्षेत्र के ग्राम सकरी की निवासी इन्द्रावती देवी, पत्नी बलवीर, अपने मायके झरकटा (गोला) आई थीं। गुरुवार को वह अपने पुत्र के साथ ई-रिक्शा पर सवार होकर वापस ससुराल लौट रही थीं। दोपहर करीब सवा एक बजे जैसे ही उनका ई-रिक्शा बीसरा पेट्रोल पंप के पास पहुँचा, पीछे से आए दो अज्ञात बाइक सवार बदमाशों ने झपट्टा मारकर उनके गले से कीमती मंगलसूत्र छीन लिया और फरार हो गए।
इन्द्रावती देवी ने गोला पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि बदमाशों ने इतनी तेजी से वारदात को अंजाम दिया कि उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला। इस घटना के बाद पुलिस ने आनन-फानन में डकैती की धाराओं में केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन गिरफ्तारी के मोर्चे पर अब तक कोई ठोस कामयाबी नहीं मिल सकी है।
दावे और हकीकत के बीच फंसी ‘गोला पुलिस’
घटना के दिन ही पुलिस के उच्चाधिकारियों और स्थानीय थाने की टीम ने यह दावा किया था कि सीसीटीवी फुटेज और मुखबिरों के माध्यम से दोनों लुटेरों की पहचान कर ली गई है। क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी (CO) गोला, दरबेश कुमार का कहना है कि पुलिस अपराधियों के बेहद करीब है और दोनों लुटेरों की पहचान स्पष्ट हो चुकी है। लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि पहचान हो गई है, तो 48 घंटे बाद भी लुटेरे पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों हैं?
पुलिस की अब तक की कार्रवाई:
- ई-रिक्शा चालक से पूछताछ: गोला पुलिस ने संदेह के आधार पर ई-रिक्शा चालक को हिरासत में लिया है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस को शक है कि कहीं लुटेरों को महिला के बारे में जानकारी देने में चालक की कोई भूमिका तो नहीं थी।
- दबिश का दौर: संदिग्ध ठिकानों पर पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं, लेकिन अब तक नतीजा सिफर रहा है।
- सीसीटीवी की पड़ताल: पुलिस ने पेट्रोल पंप और आसपास के रास्तों के कैमरों को खंगाला है, जिससे लुटेरों के भागने के रूट का पता चला है।
क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म
गोला पुलिस की इस सुस्त कार्यवाही को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन-दहाड़े मुख्य मार्ग पर पेट्रोल पंप जैसी व्यस्त जगह पर लूट हो जाना और फिर पुलिस का अपराधियों को न पकड़ पाना, कानून-व्यवस्था की लचर स्थिति को दर्शाता है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या पुलिस केवल छोटे-मोटे मामलों में ही सक्रियता दिखाती है? बड़े अपराधियों पर नकेल कसने में पुलिस के पसीने क्यों छूट रहे हैं?
महिलाओं में बढ़ती असुरक्षा की भावना
इस वारदात ने राह चलती महिलाओं के मन में डर पैदा कर दिया है। बीसरा पेट्रोल पंप और उसके आसपास का इलाका हमेशा व्यस्त रहता है, बावजूद इसके अपराधी बेखौफ होकर लूट कर रहे हैं। गोला पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों का कहना है कि यदि 48 घंटे में पुलिस एक मंगलसूत्र लूटने वाले गिरोह तक नहीं पहुँच सकती, तो बड़े अपराधों पर नियंत्रण कैसे होगा?
पुलिस का पक्ष और आगामी रणनीति
क्षेत्राधिकारी दरबेश कुमार का कहना है कि टीम लगातार काम कर रही है। “हमने कुछ महत्वपूर्ण सुराग जुटाए हैं और जल्द ही लुटेरे जेल की सलाखों के पीछे होंगे। पहचान सुनिश्चित करना पहला कदम था, अब उन्हें दबोचने के लिए घेराबंदी की जा रही है।” हालांकि, पुलिस के ये आश्वासन पीड़िता और क्षेत्रवासियों के लिए बेमानी साबित हो रहे हैं क्योंकि लुटेरे अब भी खुलेआम घूम रहे हैं।

निष्कर्ष
48 घंटे का समय किसी भी जांच के लिए निर्णायक होता है। गोला पुलिस के पास पहचान होने का दावा तो है, लेकिन परिणाम की कमी है। जनता की सुरक्षा के दावों के बीच अपराधियों का इस तरह पुलिस की पहुँच से दूर रहना व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। अब देखना यह है कि गोला पुलिस अपने दावों को कब तक हकीकत में बदल पाती है और कब पीड़िता का लूटा हुआ माल बरामद होता है।
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