गोलाबाजार, गोरखपुर: जनपद के दक्षिणांचल स्थित नगर पंचायत गोला के वार्ड नंबर सात और आठ के नागरिकों के लिए विकास की एक योजना अब विनाश का कारण बनती जा रही है। थाना मार्ग से तहसील चौराहे तक जाने वाली मुख्य सड़क के किनारे बना खुला गहरा नाला यहाँ के मासूम बच्चों और राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि दो वर्ष पूर्व एक मासूम की जान जाने के बावजूद नगर पंचायत प्रशासन ने इस असुरक्षित नाले को पूरी तरह ढकने की जहमत नहीं उठाई। गोला नगर पंचायत खुला नाला की यह समस्या अब किसी बड़ी अनहोनी की आहट दे रही है।
हादसों का इतिहास: कोरोना काल में हुई थी मासूम की मौत
वार्ड संख्या सात और आठ के बीच से गुजरने वाली यह सड़क गोला कस्बा, थाना और तहसील को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। आर.पी.एम. स्कूल के पास राम जानकी मार्ग से मिलने वाली इस सड़क के किनारे एक विशाल और गहरा नाला बनाया गया है। नागरिकों का कहना है कि कोरोना काल के दौरान, जब सड़कें सूनी थीं, एक मासूम बच्चा खेलते समय इस खुले नाले में गिर गया था और समय पर मदद न मिलने के कारण उसकी मृत्यु हो गई थी। इस हृदयविदारक घटना के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी है।

अभिभावकों में दहशत: हर पल बना रहता है खतरा
नाला घनी आबादी के बीच से गुजरता है और लोगों के घरों का निकास इसी सड़क की ओर है। वार्ड नंबर आठ की उत्तरी पटरी की तरफ इस गोला नगर पंचायत खुला नाला को कहीं पटिया (Slab) डालकर ढका गया है, तो कहीं यह पूरी तरह खुला है।
- बच्चों की सुरक्षा: घरों के बाहर खेलने वाले छोटे बच्चे अक्सर माता-पिता की नजरों से ओझल होते ही नाले की ओर चले जाते हैं।
- हालिया घटनाएं: स्थानीय लोगों के अनुसार, कई बार बच्चे नाले में गिर चुके हैं, जिन्हें गनीमत रही कि समय रहते बचा लिया गया।
- नागरिकों का सवाल: क्या नगर पंचायत प्रशासन को फिर किसी मासूम की बलि चढ़ने का इंतजार है? आखिर कब इस नाले को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाएगा?
मुख्य मार्ग पर जोखिम: स्कूल और तहसील का रास्ता
यह सड़क केवल वार्ड वासियों के लिए ही नहीं, बल्कि तहसील और स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आर.पी.एम. स्कूल के पास होने के कारण यहाँ बच्चों की आवाजाही अधिक रहती है। रात के अंधेरे में खुले नाले के कारण राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों के गिरने का खतरा भी दोगुना हो जाता है। गोला नगर पंचायत खुला नाला की वर्तमान स्थिति ‘स्मार्ट सिटी’ और ‘विकसित नगर’ के दावों पर सवालिया निशान लगाती है।
प्रशासनिक पक्ष: फाइल और स्टीमेट का खेल
इस गंभीर समस्या पर जब नगर पंचायत के बड़े बाबू लल्लन प्रसाद से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर पूर्व में दुर्घटना हुई थी, वहां नाले को ढक दिया गया है। शेष खुले हिस्से के बारे में उन्होंने जानकारी दी:
“ईओ (EO) साहब ने जेई (JE) को आदेश दे दिया है कि वे पूरे खुले नाले की नाप-जोख कर स्टीमेट तैयार करें। जैसे ही स्टीमेट फाइनल होगा, बजट स्वीकृत कर काम शुरू करा दिया जाएगा।“
हालांकि, नागरिकों का कहना है कि स्टीमेट और बजट की यह प्रक्रिया महीनों से चल रही है, लेकिन धरातल पर कोई बदलाव नहीं दिख रहा।
स्थानीय निवासियों की मांग: तत्काल कार्रवाई हो
वार्ड नंबर सात और आठ के नागरिकों ने सामूहिक रूप से मांग की है कि:
- नाले के खुले हिस्सों को अविलंब ‘आरसीसी पटिया’ (RCC Slabs) से ढका जाए।
- जिन स्थानों पर पटिया टूटी हुई है, उन्हें तुरंत बदला जाए।
- नाले की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए ताकि बरसात में जलभराव न हो।
निष्कर्ष: कागजों से बाहर निकले समाधान
गोला नगर पंचायत खुला नाला की यह समस्या प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाती है। एक मासूम की मौत के बाद भी स्टीमेट और बजट का इंतजार करना दुर्भाग्यपूर्ण है। नगर पंचायत को चाहिए कि वह किसी और दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय युद्धस्तर पर इस नाले को ढकने का कार्य पूरा करे, ताकि वार्ड नंबर सात और आठ के निवासी भयमुक्त होकर अपने घरों से बाहर निकल सकें।












