बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 07 फरवरी 2026
गोरखपुर जिले के गोला थाना क्षेत्र में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। सुरक्षा के तमाम दावों के बीच बैंक के भीतर ही एक बुजुर्ग के साथ ठगी की घटना को अंजाम दिया गया है। टप्पेबाज ठगों ने एक सेवानिवृत्त शिक्षक को अपना निशाना बनाया और बड़ी ही चालाकी से उनकी मेहनत की कमाई से 25 हजार रुपये उड़ा लिए। इस घटना ने बैंक की सुरक्षा और पुलिस गश्त पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बैंक के भीतर ही जालसाजों ने बिछाया जाल
घटना नगर पंचायत गोला के मन्नीपर गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक बेनीमाधव तिवारी के साथ हुई। जानकारी के अनुसार, बेनीमाधव तिवारी बीते बुधवार को बेबरी चौराहा स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शाखा में अपनी पेंशन का पैसा निकालने गए थे। उन्होंने बैंक से 40 हजार रुपये नकद निकाले और बैंक परिसर के भीतर ही बैठकर रुपयों की गिनती कर रहे थे।
इसी दौरान वहां पहले से घात लगाए बैठे एक शातिर टप्पेबाज ने बुजुर्ग को अपना शिकार बनाने के लिए ठगी की घटना का ताना-बाना बुना। ठग ने बहुत ही विनम्रता के साथ बुजुर्ग से कहा कि वह नोट गिनने में उनकी मदद कर देता है। बुजुर्ग शिक्षक उसकी बातों में आ गए और नोटों की गड्डी उसे थमा दी।
हाथ की सफाई और 25 हजार की चपत
नोट गिनने के बहाने शातिर ठग ने अपनी “हाथ की सफाई” दिखाई। उसने 500-500 रुपये के नोटों की गड्डी में से चुपके से 25 हजार रुपये निकाल लिए और बाकी बचे पैसों को एक लिफाफे में पैक कर बुजुर्ग को वापस कर दिया। बुजुर्ग को लगा कि उनके पैसे सुरक्षित हैं और ठग बड़ी ही आसानी से बैंक से रफूचक्कर हो गया।
कैसे हुआ ठगी का खुलासा?
इस ठगी की घटना का खुलासा तब हुआ जब बेनीमाधव तिवारी बैंक से निकलकर मिनी बैंक (ग्राहक सेवा केंद्र) पहुँचे। उन्हें वहां से अपने परिवार के किसी सदस्य को पैसे भेजने थे। जब उन्होंने लिफाफा खोलकर पैसे गिने, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। 40 हजार रुपये की जगह लिफाफे में केवल 15 हजार रुपये ही बचे थे, बाकी के 25 हजार रुपये गायब थे। ठग ने बड़ी चालाकी से लिफाफे में कुछ कम मूल्य के नोट (100 के नोट) इस तरह रखे थे कि बाहर से देखने पर गड्डी वैसी ही नजर आ रही थी।
जांच में जुटी गोला पुलिस: सीसीटीवी खंगाल रही टीम
पीड़ित बुजुर्ग ने तत्काल इसकी सूचना गोला थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम हरकत में आई और बैंक के साथ-साथ बेबरी चौराहे पर घटनास्थल की जांच-पड़ताल शुरू की। पुलिस ने बैंक के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है। फुटेज में कुछ संदिग्ध युवक नजर आ रहे हैं, जो बैंक में बिना किसी काम के काफी देर से टहल रहे थे।
पुलिस का मानना है कि यह किसी पेशेवर गिरोह का काम हो सकता है जो अक्सर बैंकों में बुजुर्गों और पेंशनभोगियों को अपना निशाना बनाते हैं। ठगी की घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आसपास के संदिग्धों और पूर्व के अपराधियों से भी पूछताछ कर रही है।
बैंकों में सुरक्षा की कमी और बढ़ती टप्पेबाजी
गोला क्षेत्र में इस तरह की ठगी की घटना पहली बार नहीं हुई है। अक्सर बैंक परिसरों में सुरक्षाकर्मियों की कमी का फायदा उठाकर ऐसे गिरोह सक्रिय रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक प्रशासन को परिसर के भीतर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। बुजुर्गों को सलाह दी जाती है कि वे बैंक में किसी भी अनजान व्यक्ति से मदद न लें और पैसों की लेनदेन हमेशा बैंक काउंटर पर या अपने किसी विश्वसनीय व्यक्ति की मौजूदगी में ही करें।
पीड़ित परिवार में मायूसी
सेवानिवृत्त शिक्षक बेनीमाधव तिवारी के लिए यह राशि उनकी मेहनत की पेंशन थी, जिसे उन्होंने अपनी जरूरतों के लिए निकाला था। इस ठगी की घटना के बाद से उनके परिवार में मायूसी का माहौल है। क्षेत्र के लोगों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द ठगों को गिरफ्तार किया जाए और बुजुर्ग के पैसे वापस दिलाए जाएं।
निष्कर्ष
गोला में हुई यह ठगी की घटना हम सभी के लिए एक चेतावनी है। डिजिटल इंडिया के दौर में भी अपराधी पारंपरिक टप्पेबाजी के जरिए आम जनता को लूट रहे हैं। गोला पुलिस ने आश्वासन दिया है कि अपराधियों की पहचान कर ली गई है और वे जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे। लेकिन तब तक, बैंक जाने वाले हर नागरिक को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
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