उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में प्राकृतिक संपदा की लूट और सरकारी राजस्व की चोरी करने वालों के विरुद्ध जिलाधिकारी दीपक मीणा ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए कड़ा रुख अख्तियार किया है। शनिवार को जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों पर खनन विभाग की टीम ने जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर अवैध खनन (Illegal Mining) और ओवरलोडिंग के बड़े खेल का पर्दाफाश किया। इस विशेष अभियान के दौरान कुल 10 भारी वाहनों को मौके पर ही सीज कर दिया गया और संबंधित स्वामियों से लगभग 5 लाख रुपये का अर्थदंड वसूल कर राजकोष में जमा कराया गया।
प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से खनन माफियाओं और अवैध परिवहन में लिप्त सिंडिकेट के बीच हड़कंप मचा हुआ है।

तीन थाना क्षेत्रों में एक साथ छापेमारी: खनन विभाग की रणनीति
जिलाधिकारी के निर्देश मिलते ही खनन अधिकारी के नेतृत्व में कई टीमों का गठन किया गया, जिन्होंने संवेदनशील इलाकों में घेराबंदी की। इस कार्रवाई का मुख्य केंद्र चौरी-चौरा, रामगढ़ताल और बेलीपार क्षेत्र रहे।
कार्रवाई का विवरण:
- थाना चौरी-चौरा: यहाँ से सर्वाधिक 6 वाहनों को बिना वैध प्रपत्रों के खनिज परिवहन करते हुए पकड़ा गया।
- थाना रामगढ़ताल: शहर के इस पॉश इलाके के समीपवर्ती क्षेत्रों से 2 वाहनों को सीज किया गया।
- थाना बेलीपार: हाईवे पर चेकिंग के दौरान 2 ओवरलोडेड वाहनों पर कार्रवाई की गई।
जांच में पाया गया कि ये सभी वाहन न केवल ओवरलोडेड थे, बल्कि उनके पास एम-चेक (M-Check) या रायल्टी से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज नहीं थे। नियमानुसार सभी वाहनों को निकटतम थानों के सुपुर्द कर दिया गया है।
जिलाधिकारी का सख्त संदेश: राजस्व और पर्यावरण की सुरक्षा सर्वोपरि
जिलाधिकारी दीपक मीणा ने इस कार्रवाई के उपरांत स्पष्ट संदेश दिया कि जनपद की सीमा के भीतर अवैध खनन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीएम ने कहा कि इस अवैध गतिविधि से केवल राजस्व की हानि नहीं होती, बल्कि इसके दूरगामी दुष्परिणाम भी हैं:
- सड़क सुरक्षा: ओवरलोडेड वाहनों के कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और पक्की सड़कें समय से पहले क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।
- पर्यावरण का दोहन: बिना अनुमति के मिट्टी और बालू के खनन से पारिस्थितिक तंत्र असंतुलित हो रहा है।
- कानून का उल्लंघन: नियमों को ताक पर रखकर परिवहन करना प्रशासन को सीधी चुनौती देना है।
राजकोष में जमा हुआ 5 लाख का अर्थदंड
प्रशासन ने केवल वाहन सीज करने तक ही अपनी कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि त्वरित कार्रवाई करते हुए 5 लाख रुपये का भारी जुर्माना भी वसूला। अधिकारियों ने बताया कि अर्थदंड की यह राशि केवल एक दिन की कार्रवाई का परिणाम है। यदि वाहन स्वामी भविष्य में भी ऐसी गतिविधियों में लिप्त पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।
डीएम ने पुलिस विभाग को भी निर्देशित किया है कि वे गश्त के दौरान संदिग्ध वाहनों की जांच करें और यदि कोई वाहन अवैध खनन की पुष्टि करता है, तो उसे तुरंत खनन विभाग के सुपुर्द करें।
निष्कर्ष: माफियाओं के विरुद्ध निरंतर जारी रहेगा अभियान
गोरखपुर प्रशासन की इस सक्रियता ने यह साफ कर दिया है कि जिले में कानून का राज स्थापित करना ही प्राथमिकता है। खनन विभाग के सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में यह अभियान और भी तेज होगा। विशेष रूप से राप्ती और रोहिन नदी के तटीय क्षेत्रों में ड्रोन कैमरों के माध्यम से निगरानी करने की योजना बनाई जा रही है। आम जनता ने भी डीएम के इस साहसी निर्णय का स्वागत किया है, क्योंकि भारी वाहनों के आतंक से ग्रामीण क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा प्रभावित हो रही थी।
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