बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 12 March 2026
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में गोरखपुर जनपद के नगर पंचायत गोला स्थित सभागार में एक भव्य और प्रेरणादायी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। बाईफ (BAIF) और एल एंड टी (L&T) के संयुक्त तत्वावधान में संचालित ‘डिजिटल सखी परियोजना’ के अंतर्गत क्षेत्र की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 140 सक्रिय महिलाओं को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। डिजिटल सखी परियोजना गोला के माध्यम से इन महिलाओं ने न केवल डिजिटल साक्षरता हासिल की है, बल्कि ग्रामीण अंचल में वित्तीय जागरूकता फैलाने में भी अग्रणी भूमिका निभाई है।
सम्मान समारोह: प्रशस्ति पत्र से बढ़ा मनोबल
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं की उपलब्धियों को रेखांकित करना था, जिन्होंने घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ समाज को डिजिटल रूप से साक्षर बनाने का बीड़ा उठाया है। नगर पंचायत अध्यक्ष लालती देवी, परियोजना प्रबंधक डीसी वर्मा और भाजपा जिला कोषाध्यक्ष व सभासद प्रतिनिधि शत्रुघ्न कसौधन ने संयुक्त रूप से महिलाओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। सम्मान पाकर महिलाओं के चेहरों पर आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की चमक साफ देखी जा सकती थी।
नगर पंचायत अध्यक्ष का संदेश: सशक्त महिला, समृद्ध समाज
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नगर पंचायत अध्यक्ष लालती देवी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाएं समाज की धुरी हैं। उन्होंने डिजिटल सखी परियोजना गोला की सराहना करते हुए कहा:
“जब एक महिला आर्थिक रूप से स्वतंत्र और शिक्षित होती है, तो वह पूरे परिवार की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करती है। डिजिटल सखी जैसी पहल ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़कर उन्हें मुख्यधारा में ला रही है। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बहुत बड़ा और सराहनीय कदम है।“
डिजिटल साक्षरता: समय की सबसे बड़ी मांग
भाजपा जिला कोषाध्यक्ष शत्रुघ्न कसौधन ने डिजिटल युग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के समय में बिना डिजिटल ज्ञान के प्रगति अधूरी है। स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं जिस तरह से गांव-गांव जाकर ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल एप्स और सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा कर रही हैं, वह ग्रामीण समाज में बदलाव की एक बड़ी मिसाल है। सरकार की मंशा भी यही है कि हर महिला ‘लखपति दीदी’ बने और तकनीक का उपयोग कर अपना स्वरोजगार स्थापित करे।
परियोजना की गहराई: क्या है ‘डिजिटल सखी’?
परियोजना प्रबंधक डीसी वर्मा ने डिजिटल सखी परियोजना गोला की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस पहल का मूल उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को निम्नलिखित तीन स्तंभों पर सशक्त बनाना है:
- डिजिटल साक्षरता: स्मार्टफोन का सही उपयोग, सरकारी पोर्टल और ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी।
- वित्तीय जागरूकता: बैंकिंग सेवाओं, बचत योजनाओं और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के तरीके।
- स्वरोजगार: महिलाओं को छोटे व्यवसायों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना।
उन्होंने बताया कि ये 140 ‘डिजिटल सखियां’ अब अपने क्षेत्रों में प्रशिक्षक (Trainers) के रूप में कार्य कर रही हैं, जो अन्य महिलाओं को भी जागरूक कर रही हैं।

स्वयं सहायता समूहों की भूमिका
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाएं मौजूद रहीं। इन समूहों ने न केवल महिलाओं को संगठित किया है, बल्कि उन्हें छोटे ऋण और सामूहिक व्यापार के अवसर भी प्रदान किए हैं। डिजिटल सखी परियोजना गोला ने इन समूहों को तकनीक का ‘हथियार’ देकर उनकी कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है। अब ये महिलाएं घर बैठे ही अपने व्यापार का प्रबंधन और लेन-देन डिजिटल माध्यम से करने में सक्षम हैं।
ग्रामीण परिवेश में बदलाव की गूंज
गोला और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इस परियोजना का सकारात्मक असर दिख रहा है। पहले जो महिलाएं मोबाइल को केवल बातचीत का साधन मानती थीं, अब वे ई-श्रम कार्ड, आयुष्मान कार्ड और पीएम किसान योजना जैसी जटिल प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से हल कर रही हैं। यह कार्यक्रम केवल एक दिन का सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि उन 140 परिवारों के सशक्तिकरण का उत्सव था, जो अब डिजिटल दुनिया का हिस्सा बन चुके हैं।
इनकी रही सक्रिय उपस्थिति
समारोह को सफल बनाने में परियोजना से जुड़े पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नगर पंचायत के कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के अंत में सभी महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे अपने गांव की कम से कम 10 अन्य महिलाओं को डिजिटल रूप से साक्षर बनाएंगी, जिससे यह श्रृंखला निरंतर बढ़ती रहे।
निष्कर्ष: भविष्य की ओर बढ़ते कदम
डिजिटल सखी परियोजना गोला के तहत हुआ यह सम्मान समारोह इस बात का प्रमाण है कि यदि सही अवसर और प्रशिक्षण मिले, तो ग्रामीण महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। 140 महिलाओं का यह सम्मान आने वाले समय में हजारों अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देगा।
read more news: विकास के दावों के बीच ‘धुरियापार चीनी मिल सड़क मार्ग’ बदहाल: सरम के पास दो फुट धंसी सड़क, जल निकासी न होने से हर साल बन रहा दलदल












