नई दिल्ली: भारत सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी (crypto) और डिजिटल एसेट्स के माध्यम से होने वाले अवैध वित्तीय लेन-देन पर लगाम लगाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। लोकसभा में सांसद श्री रवि किशन (रविंद्र शुक्ल) द्वारा पूछे गए एक महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर में वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि देश की सुरक्षा और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए अब ‘वर्चुअल डिजिटल एसेट’ (VDA) प्रदाताओं के लिए केवाईसी (KYC) के नियमों को अत्यंत सख्त बना दिया गया है।

संसद में गूँजा क्रिप्टो का मुद्दा: रवि किशन का सवाल और सरकार का जवाब
संसद के सत्र के दौरान गोरखपुर के लोकप्रिय सांसद रवि किशन ने देश में बढ़ रहे क्रिप्टो(crypto) अपराधों और उनके पारदर्शी नियमन को लेकर सरकार की मंशा जाननी चाही। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए माननीय वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सरकार डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार को पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए PMLA 2002 के दायरे को और अधिक प्रभावी बनाया गया है।
8 जनवरी 2026 से लागू हुई नई व्यवस्था: क्या बदला?
वित्त मंत्रालय के अनुसार, अब क्रिप्टोकरेंसी(crypto) एक्सचेंज और सर्विस प्रोवाइडर्स को ‘रिपोर्टिंग एंटिटी’ (Reporting Entity) के रूप में कार्य करना होगा। 8 जनवरी 2026 से लागू हुए नए दिशा-निर्देशों में निम्नलिखित कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं:
- लाइवनेस डिटेक्शन (Selfie): अब केवल फोटो अपलोड करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि निवेशक को रीयल-टाइम में अपनी सेल्फी (लाइवनेस डिटेक्शन) देनी होगी ताकि पहचान की पुष्टि हो सके।
- जियो-टैगिंग (Geo-tagging): लेन-देन करने वाले व्यक्ति की भौगोलिक स्थिति का पता लगाने के लिए जियो-टैगिंग को अनिवार्य किया गया है।
- IP एड्रेस ट्रैकिंग: सुरक्षा एजेंसियां अब हर लेन-देन के IP address पर नजर रखेंगी ताकि यह पता चल सके कि ट्रांजेक्शन किस डिवाइस और लोकेशन से किया गया है।
- ₹1 का अनिवार्य बैंक लेन-देन: बैंक खाते की सत्यता की जांच के लिए अब एक रुपये का अनिवार्य ट्रांजेक्शन करना होगा।
मनी लॉन्ड्रिंग पर लगाम: विशेषज्ञों की राय
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सदन को आश्वस्त किया कि इन कदमों से मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण जैसी अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स’ को रिपोर्टिंग एंटिटी घोषित करने से अब हर छोटे-बड़े संदिग्ध लेन-देन की जानकारी Financial Intelligence Unit (FIU) के पास उपलब्ध होगी।
सांसद रवि किशन ने जताया आभार
सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए सांसद रवि किशन ने माननीय वित्त राज्य मंत्री को बधाई दी। उन्होंने कहा, “यह निर्णय भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुरक्षित, जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। आम निवेशकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए ऐसे कड़े नियम समय की मांग थे।”
निवेशकों पर क्या होगा असर?

नए नियमों के बाद, जो लोग क्रिप्टोकरेंसी(crypto) में निवेश करना चाहते हैं, उन्हें अब अधिक गहन सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा। हालांकि इससे प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है, लेकिन यह निवेशकों को भविष्य में होने वाली कानूनी पेचीदगियों और साइबर हमलों से सुरक्षा प्रदान करेगा। Cryptocurrency बाजार में अब केवल वही खिलाड़ी टिक पाएंगे जो पूर्ण पारदर्शिता और सरकारी नियमों का पालन करेंगे।
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