गोरखपुर। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को धरातल पर उतारने और जनता की शिकायतों के त्वरित निस्तारण को लेकर शासन अब बेहद सख्त नजर आ रहा है। इसी क्रम में, गोरखपुर के मंडलायुक्त सभागार में मंडलायुक्त अनिल ढींगरा की अध्यक्षता में मंडल स्तरीय मुख्यमंत्री डैशबोर्ड (सीएम डैशबोर्ड) की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मंडल के चारों जनपदों—गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज और कुशीनगर में चल रही विकास परियोजनाओं की जमीनी हकीकत परखना और रैंकिंग में सुधार करना था।

लापरवाही पर मंडलायुक्त के सख्त तेवर
बैठक के दौरान मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि Chief Minister Dashboard शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने विभागवार रैंकिंग और फीडबैक की गहनता से जांच की। जिन विभागों की प्रगति ‘सी’ या ‘डी’ श्रेणी में पाई गई, उनके अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल सुधार करने के निर्देश दिए गए। मंडलायुक्त ने कहा कि आंकड़ों की बाजीगरी के बजाय धरातल पर काम दिखना चाहिए।
डिजिटल माध्यम से जुड़े अन्य जिलों के अधिकारी

बैठक में प्रशासनिक तालमेल का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। जहाँ एक ओर गोरखपुर के जिलाधिकारी दीपक मीणा, जिला विकास अधिकारी सतीश कुमार सिंह और परियोजना निदेशक दीपक सिंह सभागार में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे, वहीं देवरिया, महराजगंज और कुशीनगर के जिलाधिकारियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने ऑनलाइन माध्यम से इस मंथन में हिस्सा लिया।
इन प्रमुख योजनाओं की हुई बारीकी से जांच
समीक्षा बैठक में मंडल के सर्वांगीण विकास से जुड़ी योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:
- जल जीवन मिशन: हर घर नल से जल योजना की पाइपलाइन और कनेक्शन की स्थिति।
- प्रधानमंत्री आवास योजना: पात्रों को आवास आवंटन और निर्माण की समयबद्धता।
- स्वास्थ्य एवं शिक्षा: अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और स्कूलों में कायाकल्प योजना की प्रगति।
- राजस्व एवं समाज कल्याण: भूमि विवादों का निपटारा और वृद्धावस्था/विधवा पेंशन का समय पर भुगतान।
रैंकिंग सुधारने पर जोर: जिलाधिकारी दीपक मीणा
गोरखपुर के जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बैठक में बताया कि जनपद स्तर पर सीएम डैशबोर्ड की 24×7 मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि आम जनता से प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी की जाने वाली मासिक रैंकिंग में गोरखपुर मंडल को शीर्ष स्थान पर लाने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से काम कर रहे हैं।
डेटा फीडिंग और पारदर्शिता

मंडलायुक्त ने तकनीकी पक्ष पर जोर देते हुए कहा कि पोर्टल पर डेटा की फीडिंग समय से होनी चाहिए। अक्सर देखा जाता है कि काम पूरा होने के बावजूद पोर्टल पर सूचना अपडेट न होने के कारण रैंकिंग गिर जाती है। उन्होंने निर्देश दिया कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों पर नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता की संतुष्टि के आधार पर होना चाहिए।
प्रशासनिक सतर्कता और जनहित
इस बैठक का दूरगामी प्रभाव मंडल के विकास कार्यों पर पड़ेगा। गोरखपुर मंडल, जो मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र भी है, वहां प्रशासनिक सतर्कता का होना अनिवार्य है। Uttar Pradesh Government की मंशा है कि तकनीक के माध्यम से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जाए और पारदर्शिता बढ़ाई जाए। सीएम डैशबोर्ड इसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
निष्कर्ष
मंडलायुक्त की यह समीक्षा बैठक इस बात का संकेत है कि अब ढुलमुल रवैया अपनाने वाले अधिकारियों की खैर नहीं है। समयबद्धता, गुणवत्ता और पारदर्शिता—इन तीन स्तंभों पर ही मंडल का विकास टिका है। बैठक के अंत में मंडलायुक्त ने सभी अधिकारियों को एक लक्ष्य दिया: “योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और मंडल की रैंकिंग प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ हो।”
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