बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर:
चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र के विकास और किसानों की समस्याओं के स्थाई समाधान के लिए क्षेत्रीय विधायक राजेश त्रिपाठी ने एक बार फिर सदन में पुरजोर आवाज उठाई है। मंगलवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र के दौरान उन्होंने क्षेत्र के तरैना नाला, कचनी नाला, कवितापुर नाला और भुतहा नाला सहित कई अन्य छोटे-बड़े नालों की गहरी खुदाई करने और उन्हें परस्पर जोड़ने की नाला खुदाई मांग सरकार के समक्ष रखी। विधायक ने स्पष्ट किया कि जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण प्रतिवर्ष हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो जाती है।
बरसात में विकराल रूप लेते हैं नाले: समाधान की आवश्यकता
विधायक राजेश त्रिपाठी ने एक निजी याचिका के माध्यम से सदन को अवगत कराया कि चिल्लूपार क्षेत्र के ये नाले बरसात के मौसम में अत्यंत खतरनाक हो जाते हैं। इन नालों में जलभराव के कारण आसपास के गांवों में पानी घुस जाता है और किसानों की मेहनत की फसल जलमग्न हो जाती है।
उन्होंने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि यदि इन नालों की गहरी खुदाई कर इनकी गहराई बढ़ा दी जाए, तो जल निकासी सुचारू रूप से हो सकेगी। नाला खुदाई मांग के साथ ही उन्होंने तरैना और कवितापुर नाले पर रेगुलेटर बनाने का भी प्रस्ताव रखा। रेगुलेटर बनने से राप्ती नदी की बाढ़ का पानी वापस नालों में नहीं घुस पाएगा और गर्मी के मौसम में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी भी रोका जा सकेगा।
उरुवा नगर पंचायत में कचनी नाले का मुद्दा
नियम 301 के तहत एक अन्य महत्वपूर्ण विषय उठाते हुए राजेश त्रिपाठी ने उरुवा नगर पंचायत क्षेत्र से होकर गुजरने वाले कचनी नाले की दुर्दशा पर सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि यह नाला कई स्थानों पर पट जाने के कारण अपना अस्तित्व खो रहा है। कचनी नाले की खुदाई और पक्का निर्माण न होने से स्थानीय किसानों और ग्रामीणों में भारी रोष है, जिसके लिए वे कई बार आंदोलन भी कर चुके हैं।
विधायक ने सदन में स्पष्ट रूप से नाला खुदाई मांग करते हुए कहा कि नगर पंचायत उरुवा की सीमा तक इस नाले का पक्का निर्माण कराया जाना जनहित में अनिवार्य है। इससे न केवल जल निकासी की समस्या सुलझेगी, बल्कि भविष्य में होने वाले भू-क्षरण को भी रोका जा सकेगा।
विधानसभा अध्यक्ष ने दिए कार्रवाई के निर्देश
चिल्लूपार विधायक की इस गंभीर और जनहित से जुड़ी नाला खुदाई मांग को विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने गंभीरता से लिया। उन्होंने विधायक द्वारा उठाए गए दोनों विषयों को स्वीकार करते हुए प्रदेश सरकार को इस पर उचित कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। विधायक राजेश त्रिपाठी ने बताया कि इन नालों का सुदृढ़ीकरण होने से क्षेत्र की बड़ी आबादी को बाढ़ और जलजमाव की समस्या से स्थाई मुक्ति मिलेगी।

किसानों और ग्रामीणों के लिए राहत की उम्मीद
क्षेत्र में नाला खुदाई मांग लंबे समय से की जा रही थी। राप्ती नदी के तटीय इलाकों में बसे गांवों के लिए यह नाले जीवनदायिनी भी हैं और बरसात में मुसीबत भी। यदि सरकार विधायक के प्रस्ताव पर अमल करते हुए खुदाई और रेगुलेटर निर्माण कराती है, तो चिल्लूपार क्षेत्र में कृषि उत्पादकता में बड़ी वृद्धि देखी जा सकती है। स्थानीय ग्रामीणों ने विधायक के इस प्रयास की सराहना करते हुए उम्मीद जताई है कि जल्द ही धरातल पर कार्य शुरू होगा।
निष्कर्ष: सुदृढ़ ड्रेनेज सिस्टम से बदलेगी सूरत
चिल्लूपार क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए एक एकीकृत ड्रेनेज सिस्टम का होना बहुत जरूरी है। नाला खुदाई मांग पूरी होने से न केवल पर्यावरण संतुलन बना रहेगा, बल्कि जल संचयन के जरिए सिंचाई सुविधाओं का भी विस्तार होगा। विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश के बाद अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह कितनी जल्दी इस योजना के लिए फंड आवंटित करती है।
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