बृजनाथ तिवारी की रिपोर्ट
गोलाबाजार, गोरखपुर: 17 March 2026

जनपद के गोला तहसील अंतर्गत धुरियापार के कोर्रा गांव में स्थित प्राचीन श्री चतुर्भुजीनाथ मंदिर की बेशकीमती भूमि को लेकर चल रहा तीन साल का लंबा संघर्ष अंततः सत्य की जीत के साथ समाप्त हुआ। चतुर्भुजीनाथ मंदिर अतिक्रमण मुक्त की कार्रवाई के तहत उप जिलाधिकारी (एस डी एम) गोला ने राजस्व विभाग और उरुवा पुलिस के साथ मिलकर मंदिर की 6 डिसमिल जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त करा दिया। इस कार्रवाई ने न केवल भू-माफियाओं के हौसले पस्त किए हैं, बल्कि उन भ्रष्ट राजस्व कर्मियों का भी पर्दाफाश किया है जो धनबल के प्रभाव में मंदिर की जमीन को रास्ते के नाम पर बेचने की साजिश रच रहे थे।
साजिश का पर्दाफाश: प्रॉपर्टी डीलर और फर्जी बैनामा
प्राप्त विवरण के अनुसार, मंदिर की कुल 14 डिसमिल जमीन में से 6 डिसमिल पर रणविजय व राकेश गुप्ता ने अवैध कब्जा कर रखा था। इसी बीच, एक बाहरी प्रॉपर्टी डीलर ने मंदिर के समीप करीब ढाई एकड़ जमीन खरीदी और वहां अपना कार्यालय खोल दिया।
- डेमोग्राफी बदलने की आशंका: ग्रामीणों के मन में यह सवाल गहरे थे कि सुनसान क्षेत्र में हो रही यह प्लाटिंग किन लोगों के लिए है और क्या इसके पीछे धुरियापार की डेमोग्राफी बदलने की कोई गहरी साजिश है?
- अवैध रजिस्ट्री: इसी दौरान, रणविजय व राकेश गुप्ता ने मंदिर की अतिक्रमित 6 डिसमिल जमीन को प्रॉपर्टी डीलर के रास्ते के लिए मोटी रकम लेकर अवैध रूप से रजिस्ट्री कर दी।
एस डी एम की पैमाइश: खुल गई कानूनगो और लेखपाल की कलई
मंदिर समिति के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश जायसवाल ने तीन वर्षों तक मुख्यमंत्री के जनता दरबार से लेकर अधिकारियों तक गुहार लगाई। इससे पूर्व, राजस्व निरीक्षक रमेश पांडे और लेखपाल अमित शुक्ला ने प्रॉपर्टी डीलर के प्रभाव में फर्जी रिपोर्ट लगाई थी कि ग्रामीणों की सहमति से मंदिर की जमीन से 12 फीट का रास्ता निकाला गया है।
लेकिन 16 मार्च को जब एस डी एम गोला ने खुद कमान संभाली, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
- जमीन की माप: पूर्व की टीम ने जमीन 12 डिसमिल बताई थी, जबकि एस डी एम की पैमाइश में वह पूरी 14 डिसमिल निकली।
- फर्जी सहमति पत्र: यह खुलासा हुआ कि कानूनगो और लेखपाल ने ग्रामीणों के हस्ताक्षरों का दुरुपयोग कर उसे प्रॉपर्टी डीलर के पक्ष में ‘सहमति पत्र’ के रूप में पेश किया था।
कड़ी कार्रवाई: एस डी एम की फटकार और निर्देश
एस डी एम गोला ने मौके पर ही राजस्व निरीक्षक उरुवा को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रिंटू शाही को निम्नलिखित कड़े निर्देश दिए:
- सुरक्षा: मंदिर परिसर में अविलंब सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएं।
- कानूनी एक्शन: मंदिर की जमीन का फर्जी बैनामा करने और कराने वालों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।
- चारदीवारी: आश्वासन दिया गया कि नवरात्रि के बाद प्रशासन की देखरेख में मंदिर की 6 डिसमिल जमीन की चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) करा दी जाएगी।
एस डी एम ने अतिक्रमणकारी पक्ष को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी अपनी जमीन कम है और कब्जा अधिक, यदि दोबारा ऐसी हिमाकत हुई तो बेदखली की कार्रवाई तय है।
ग्रामीणों में हर्ष और प्रशासन का धन्यवाद
मंदिर की भूमि अतिक्रमण मुक्त होने पर पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल है। ग्रामीणों ने एस डी एम गोला की निष्पक्ष और पारदर्शी कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए उन्हें हृदय से धन्यवाद दिया। चतुर्भुजीनाथ मंदिर अतिक्रमण मुक्त 2026 की यह घटना अन्य भू-माफियाओं के लिए एक कड़ा संदेश है कि आस्था और सार्वजनिक संपत्ति के साथ खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं होगा।
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